UP CM Relief Fund: 5 वर्षों में 2.44 लाख जरूरतमंदों को मिली ₹4,324 करोड़ की मदद, बिना भेदभाव हर जिले तक पहुंचा सहारा

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 वर्षों में 2.44 लाख लाभार्थियों को 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 74,531 जरूरतमंदों को मिला लाभ।

By INA News Desk
Sep 15, 2026 - 00:33
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UP CM Relief Fund: 5 वर्षों में 2.44 लाख जरूरतमंदों को मिली ₹4,324 करोड़ की मदद, बिना भेदभाव हर जिले तक पहुंचा सहारा
  • मुख्यमंत्री राहत कोष उत्तर प्रदेश: पांच साल में 4.5 गुना बढ़े लाभार्थी, 2025-26 में रिकॉर्ड 74,531 परिवारों तक पहुंची आर्थिक सहायता
  • UP News: गंभीर बीमारियों और आपदा में बड़ा संबल बना मुख्यमंत्री राहत कोष, मंडलवार और जिलेवार आंकड़ों में दिखा व्यापक विस्तार
  • समभाव से जनकल्याण: यूपी में छोटे जिलों से लेकर महानगरों तक पहुंचा सीएम राहत कोष का लाभ, पांच साल का पूरा लेखा-जोखा जारी

उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारियों, असाध्य रोगों के इलाज, प्राकृतिक आपदाओं और अचानक उपजी विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष एक मजबूत वित्तीय संबल बनकर उभरा है। राज्य सरकार द्वारा संकलित आधिकारिक आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में 2,44,263 जरूरतमंदों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस पांच वर्षीय समयावधि में सहायता प्राप्त करने वाले वार्षिक लाभार्थियों की संख्या 16,640 से बढ़कर 74,531 के स्तर पर पहुंच गई है, जो लगभग 4.5 गुना की वृद्धि दर्शाती है।

सहायता वितरण के भौगोलिक और प्रशासनिक आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह राहत व्यवस्था किसी एक क्षेत्र या केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों और 75 जिलों में समान रूप से प्रभावी रही है। शासन स्तर पर निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया और चिकित्सा संस्थानों से प्राप्त अनुमानों (एस्टीमेट) के त्वरित सत्यापन ने जरूरतमंदों तक समयबद्ध सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वर्षवार प्रगति: किस वर्ष कितनी सहायता और कितने लाभार्थी

पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री राहत कोष के आवंटन और लाभार्थियों की संख्या में लगातार सकारात्मक विस्तार दर्ज किया गया है:

  • वित्तीय वर्ष 2021-22: इस वर्ष 289.71 करोड़ रुपये की सहायता राशि से प्रदेश के 16,640 नागरिकों को राहत पहुंचाई गई थी।

  • वित्तीय वर्ष 2022-23: सहायता के दायरे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और कुल 572.97 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर 31,745 लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान किया गया।

  • वित्तीय वर्ष 2023-24: पहली बार वार्षिक सहायता का आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचा। इस दौरान 1,008.50 करोड़ रुपये की राशि से 54,473 लोगों को मदद मिली।

  • वित्तीय वर्ष 2024-25: यह वर्ष कुल स्वीकृत राशि और प्रति व्यक्ति औसत सहायता दोनों ही दृष्टियों से पांच वर्षों में शीर्ष पर रहा। कुल 1,344.94 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई, जिससे 66,874 जरूरतमंद लाभान्वित हुए। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 2.01 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर रही।

  • वित्तीय वर्ष 2025-26: इस वित्तीय वर्ष में कुल सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, जबकि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 1.49 लाख रुपये दर्ज की गई।

संख्यात्मक विस्तार और सहायता की प्रकृति

आंकड़ों की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल व्यय राशि में पिछले वर्ष की तुलना में 17.6 प्रतिशत की कमी आने के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में 11.4 प्रतिशत की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई। इसका सीधा अर्थ यह है कि गंभीर मामलों के साथ-साथ मध्यम श्रेणी के चिकित्सा खर्चों और तात्कालिक संकट से जूझ रहे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक सहायता का विस्तार किया गया, जिससे सहायता पाने वालों का दायरा व्यापक हुआ।

मंडलवार विश्लेषण: पश्चिमी से पूर्वी यूपी तक समान पहुंच

वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासनिक मंडलों की स्थिति यह दर्शाती है कि सहायता का वितरण राज्य के सभी भौगोलिक अंचलों में हुआ है। लखनऊ मंडल में सर्वाधिक 19,507 लाभार्थियों को सहायता प्राप्त हुई। इसके बाद पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल में 13,621, प्रयागराज मंडल में 12,019, अयोध्या मंडल में 10,427, वाराणसी मंडल में 9,364 और कानपुर मंडल में 8,433 जरूरतमंदों को राहत दी गई।

तराई और सीमावर्ती क्षेत्रों में देवीपाटन मंडल के अंतर्गत 7,201, आजमगढ़ मंडल में 6,760, बस्ती मंडल में 3,740 और विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर मंडल में 3,335 लाभार्थी दर्ज किए गए। बुंदेलखंड के झांसी मंडल में 2,263 और चित्रकूट मंडल में 1,894 लोगों को मदद मिली। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल में 1,617, मुरादाबाद मंडल में 1,441 तथा मेरठ मंडल में 1,308 लाभार्थियों को राहत कोष का संबल प्राप्त हुआ। ये आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि सहायता का प्रवाह केवल क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित न होकर वास्तविक आवश्यकताओं पर केंद्रित रहा है।

जिलों के आंकड़े: बड़े शहरों के साथ छोटे जनपदों को भी मिला सहारा

जिलास्तरीय समीक्षा में स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों वाले बड़े जिलों के साथ-साथ ग्रामीण और कम आबादी वाले जनपदों में भी सहायता समान गति से पहुंची है। जिलों की सूची में राजधानी लखनऊ 7,491 लाभार्थियों के साथ शीर्ष पर है, जिसके बाद प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 जरूरतमंदों को सहायता मिली।

मध्यम और अपेक्षाकृत छोटे जनपदों में गोंडा जिले से 3,647, आजमगढ़ से 3,417, प्रतापगढ़ से 3,240, वाराणसी से 3,220, जौनपुर से 3,219 और सीतापुर से 3,192 लोगों को कोष से मदद दी गई। इसी प्रकार कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थियों तक राहत पहुंची। जिला स्तर पर राहत की यह संतुलित पहुंच प्रशासनिक संवेदनशीलता और पारदर्शी प्रक्रिया का प्रमाण है।

आवेदन प्रक्रिया और सामाजिक सुरक्षा का आधार

मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदक को बीमारी की स्थिति में अधिकृत सरकारी अथवा सूचीबद्ध अस्पताल से इलाज का अनुमानित खर्च (एस्टीमेट) और आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है। जिला प्रशासन द्वारा पात्रता और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सहायता राशि सीधे संबंधित अस्पताल के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है, जिससे धनराशि के दुरुपयोग की संभावना समाप्त हो जाती है।

कैंसर, किडनी रोग, हृदय रोग, न्यूरो सर्जरी और अंग प्रत्यारोपण जैसी महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए यह कोष निर्धन परिवारों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हुआ है। पांच वर्षों में 2.44 लाख से अधिक नागरिकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना यह दर्शाता है कि लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत समाज के सबसे कमजोर तबके की सुरक्षा को संस्थागत मजबूती दी गई है।

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