UP Power Supply: कोयला संकट के बीच यूपी में 27,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति बहाल, अनपरा और हरदुआगंज से जल्द जुड़ेंगे 1500 मेगावाट
देशव्यापी कोयला संकट के बीच उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन ने बिजली प्रबंधन संभालते हुए 27,000 मेगावाट आपूर्ति सुनिश्चित की। 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जल्द मिलेगी।
- यूपी में बिजली संकट पर पावर कारपोरेशन का प्रभावी प्रबंधन: 2000 MW की कमी के बावजूद दिन में निर्बाध सप्लाई, रोस्टर से अधिक आपूर्ति की कवायद
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देश भर के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और जलभराव के चलते थर्मल पावर प्लांट्स को ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर तापीय विद्युत उत्पादन में आई भारी गिरावट के बावजूद उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने ठोस प्रबंधन रणनीति पर काम शुरू किया है। सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 1,500 से 2,000 मेगावाट बिजली की तात्कालिक कमी दर्ज होने के बाद भी राज्य में वर्तमान में करीब 27,000 मेगावाट तक की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वितरण और उत्पादन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी भौगोलिक क्षेत्रों—विशेषकर ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड संभागों में तय रोस्टर के अनुसार आपूर्ति बरकरार रखी जाए और अतिरिक्त स्रोतों से ऊर्जा जुटाकर किसी भी अप्रत्याशित संकट को टाला जाए।
राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन प्रभावित, मांग में रिकॉर्ड वृद्धि
मानसून के दौरान कोयला खदानों में पानी भरने और रेल रैक के परिवहन में आई बाधाओं के कारण पूरे देश में तापीय उत्पादन में लगभग 35 गीगावाट (35,000 मेगावाट) की कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही मौसम के उतार-चढ़ाव और कम हवा चलने के कारण पवन ऊर्जा (विंड पावर) तथा मौसमी कारणों से जलविद्युत (हाइड्रो पावर) परियोजनाओं से भी मिलने वाली आपूर्ति में गिरावट आई है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में उमस और औद्योगिक गतिविधियों के चलते बिजली की मांग पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक बनी हुई है। इस दोहरे दबाव के बीच राज्य को सामान्य उपलब्धता के मुकाबले 1,500 से 2,000 मेगावाट की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए ऊर्जा निगमों ने ऊर्जा एक्सचेंजों और अंतरराज्यीय ग्रिड से अधिकतम संभव खरीद की प्रक्रिया सक्रिय कर दी है, ताकि दिन के समय औद्योगिक और कृषि गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
दिन में कटौती-मुक्त आपूर्ति, रात के पीक आवर्स की रणनीति
पावर कारपोरेशन के अनुसार, संसाधनों के कुशल प्रबंधन के चलते दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सामान्य रूप से कटौती-मुक्त आपूर्ति दी जा रही है। ग्रामीण और तहसील क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर घंटों से अधिक बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, रात के समय (पीक आवर्स) जब मांग अपने उच्चतम स्तर पर होती है और ग्रिड में 2,000 से 3,000 मेगावाट की अतिरिक्त उपलब्धता सीमित हो जाती है, तब संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आंशिक और नियंत्रित कटौती की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह कटौती केवल ग्रिड की सुरक्षा और ट्रांसमिशन लाइनों को ओवरलोडिंग से बचाने के लिए तकनीकी बाध्यता के तहत की जा रही है, जिसे आगामी दो से तीन दिनों में समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
1500 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन की बहाली जल्द
बिजली उपलब्धता को सामान्य स्तर पर लाने के लिए राज्य सरकार ने उत्पादन निगम के बंद पड़े संयंत्रों को तेजी से चालू कराने पर काम तेज कर दिया है। तकनीकी समस्याओं और बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण अस्थायी रूप से बंद चल रहीं अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजनाओं की इकाइयों में युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य चल रहा है।
अधिकारियों का अनुमान है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर इन इकाइयों के दोबारा ग्रिड से जुड़ते ही प्रदेश को लगभग 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगेगी। इसके अतिरिक्त ईंधन प्रबंधन के तहत अनपरा संयंत्र के पास उपलब्ध कोयले को आवश्यकतानुसार लैंको संयंत्र की ओर डायवर्ट किया गया है, जबकि बारा तापीय परियोजना में कोयले की रैक पहुंचने से उत्पादन में सुधार हुआ है। इन आंतरिक समायोजनों से रात्रि के समय लगभग 700 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है।
कोयला मंत्रालय से समन्वय और 2017 व 2021 के अनुभवों का उपयोग
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने केंद्रीय कोयला मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के उच्च प्रबंधन से भी संपर्क स्थापित कर राज्य के ताप विद्युत गृहों के लिए कोयले की रैक बढ़ाने और निर्बाध रसद सुनिश्चित करने का औपचारिक अनुरोध किया है। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से आने वाली बिजली के कोटे का पूरा उपयोग करने के लिए लोड डिस्पैच सेंटर को 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी पर रखा गया है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2017 और वर्ष 2021 में भी मानसून के दौरान इसी प्रकार के कोयला संकट का सामना करना पड़ा था। उन परिस्थितियों से सीख लेते हुए इस बार प्रबंधन ने आपूर्ति श्रृंखला को पहले ही विकेंद्रीकृत कर दिया था, जिसके चलते 2,000 मेगावाट की कमी के बावजूद राज्य के बड़े हिस्से में जनजीवन सामान्य बना हुआ है और उत्पादन इकाइयों की बहाली के साथ ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
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