जंतर- मंतर आंदोलन में श्रेय की राजनीति? चंद्रशेखर आजाद के अनशन खत्म करने पर डॉ. रोहिणी घावरी ने दागे तीखे सवाल
जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच सांसद चंद्रशेखर आजाद का अनशन समाप्त। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने नीयत और गृह मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए।
- जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: चंद्रशेखर आजाद के अनशन समाप्ति पर रोहिणी घावरी के गंभीर सवाल, दिल्ली पुलिस और MHA की भूमिका पर घमासान
- दिल्ली में जंतर-मंतर आंदोलन और राजनीति: सांसद चंद्रशेखर आजाद पर रोहिणी घावरी के तीखे आरोप, संसद मार्ग पर पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प
- जंतर-मंतर पर बवाल: चंद्रशेखर आजाद का अनशन खत्म, डॉ. रोहिणी घावरी के आरोपों से गर्माई दिल्ली की राजनीति
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर क्षेत्र पिछले कई दिनों से छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक निकाले गए मार्च के दौरान युवाओं और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। इसी बीच, नगीना से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद द्वारा संसद परिसर में शुरू किया गया तीन दिवसीय धरना व अनशन अचानक समाप्त घोषित कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद 'जनपॉवर' NGO की संस्थापक डॉ. रोहिणी घावरी ने सांसद पर तीखे हमले करते हुए आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने और वास्तविक मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया है।
देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले 20-25 दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर एक अनुशासित और शांतिपूर्ण सत्याग्रह चलाया जा रहा था। इस आंदोलन में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। जब प्रदर्शन में जनसमर्थन बढ़ने लगा और लाखों की संख्या में युवा जुटने लगे, तब राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला। नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संसद परिसर में अकेले तीन दिनों का धरना और अनशन शुरू किया। हालांकि, 20 जुलाई को संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प और लाठीचार्ज के बाद चंद्रशेखर आजाद का अनशन समाप्त हो गया। अनशन समाप्ति के तुरंत बाद सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर सांसद की नीयत, रणनीति और आंदोलन में देर से शामिल होने पर सवाल खड़े कर दिए।
- संसद मार्ग पर उग्र प्रदर्शन
20 जुलाई की सुबह 8 बजे कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों का प्रदर्शन शुरू हुआ। 10 बजे बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़े हजारों प्रदर्शनकारी जनपथ और विजय चौक होते हुए मुख्य द्वार तक पहुंचे।
जंतर-मंतर पर शुरू हुआ सत्याग्रह शुरुआती दिनों में अत्यंत अनुशासित था। बुजुर्ग कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने लगातार अनशन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। जब आंदोलन अपने चरम पर पहुंचा, तब सांसद चंद्रशेखर आजाद भी इसमें शामिल हुए।
- संसद मार्च और सुरक्षा बलों से झड़प
20 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे हजारों की तादाद में युवा और कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। लगभग 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करना शुरू कर दिया।
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जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ और विजय चौक के रास्ते प्रदर्शनकारी संसद परिसर के अत्यंत संवेदनशील मुख्य द्वारों तक पहुंच गए।
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सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संसद के मुख्य द्वारों को तुरंत बंद कर दिया।
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बैरिकेड्स तोड़े जाने के बाद पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
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धक्का-मुक्की और पथराव में 50 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग इतने ही प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
- पुलिस कार्रवाई और सुरक्षाबल संघर्ष
संसद भवन के मुख्य द्वार बंद कर सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और पथराव की घटनाओं में 50 से अधिक पुलिसकर्मी और 50 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए।
- गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस पर चुनौती
रोहिणी घावरी ने सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है। यदि छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ है, तो केवल शिक्षा मंत्री नहीं बल्कि गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए।
स्विट्जरलैंड से पीएचडी पूरी कर चुकीं और 'जनपॉवर' NGO की संस्थापक डॉ. रोहिणी घावरी ने एक वीडियो संदेश जारी कर चंद्रशेखर आजाद पर कई गंभीर आरोप लगाए:
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राजनीतिक माइलेज का प्रयास: रोहिणी घावरी ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद छात्रों की 20-25 दिनों की मेहनत का राजनीतिक श्रेय लेने के लिए आंदोलन के अंतिम दौर में शामिल हुए थे।
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गृह मंत्रालय से सवाल पूछने की चुनौती: घावरी के अनुसार, उन्होंने सांसद को चुनौती दी थी कि यदि वे वास्तव में छात्रों के प्रति निष्ठावान हैं, तो दिल्ली पुलिस का सीधे संचालन करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लें और उनके इस्तीफे की मांग करें।
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नेताओं का पीछे हटना: आरोप लगाया गया कि उकसावे भरे भाषणों से माहौल खराब हुआ और जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया, तो शीर्ष नेतृत्व युवाओं को सुरक्षा देने के बजाय सुरक्षित दूरी पर चला गया।
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अनशन की सत्यता: उन्होंने दावा किया कि संसद में तीन दिनों तक चला अनशन केवल एक दिखावा था और चुनौती मिलने के बाद इसे बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त कर दिया गया।
- सोनम वांगचुक और CJP का सत्याग्रह
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और सामाजिक संगठनों ने 20-25 दिनों तक शांतिपूर्ण अनशन किया। इसके बाद आंदोलन में लाखों की भीड़ एकत्र हुई, जिसके बाद राजनीतिक हस्तियों का आना शुरू हुआ।
- संसद परिसर में तीन दिवसीय धरना समाप्त
सांसद चंद्रशेखर आजाद द्वारा संसद में अकेले दिया जा रहा तीन दिनों का अनशन समाप्त हो गया। रोहिणी घावरी ने आरोप लगाया कि अनशन के दौरान गंभीरता नहीं दिखाई गई और चुनौती मिलने पर धरना खत्म कर दिया गया।
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डॉ. रोहिणी घावरी: "छात्रों ने 25 दिनों तक भूखे-प्यासे रहकर शांतिपूर्ण आंदोलन खड़ा किया। राजनीतिक नेता केवल फुटेज और माइलेज लेने वहां पहुंचे। जब पुलिस लाठियां चला रही थी, तब इन नेताओं को छात्रों की ढाल बनना चाहिए था, न कि अनशन खत्म करके पीछे हटना चाहिए था।"
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प्रदर्शनकारी छात्र एवं आयोजक: कई छात्र प्रतिनिधियों का मानना है कि आंदोलन की शुरुआत जिन मूल मुद्दों पर हुई थी, वे राजनीतिक घमासान और झड़प के कारण पीछे छूट गए हैं।
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पुलिस एवं प्रशासन: दिल्ली पुलिस का कहना है कि अति-सुरक्षित संसद परिसर की ओर बिना अनुमति के बढ़ना और बैरिकेड्स तोड़ना कानून-व्यवस्था का सीधा उल्लंघन था, जिसके चलते बल प्रयोग करना पड़ा।
- छात्र सुरक्षा और नेतृत्व का दायित्व
आरोप लगाया गया कि उकसावे भरे बयानों के कारण माहौल बिगड़ गया। जब पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू किया, तब युवाओं को आगे कर शीर्ष नेतृत्व मौके से हट गया, जबकि उन्हें युवाओं का बचाव करना चाहिए था।
- डॉ. रोहिणी घावरी का परिचय और विवाद
इंदौर की रहने वाली डॉ. रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड में पीएचडी और जनपॉवर NGO की संस्थापक हैं। उन्होंने सांसद पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है, जबकि दोनों पक्षों के बीच कानूनी व पुलिस शिकायतें जारी हैं।
- व्यक्तिगत और कानूनी विवाद का पहलू
डॉ. रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आजाद के बीच व्यक्तिगत संबंधों और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर पहले से कानूनी लड़ाई चल रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग और पुलिस में दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज हैं।
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