उत्तर प्रदेश में 'आई लव मुहम्मद' विवाद, मऊ में पथराव और लाठीचार्ज, वायरल सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई टेंशन
'आई लव मुहम्मद' अभियान की शुरुआत पाकिस्तान में एक ईसाई व्यक्ति द्वारा पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से हुई। वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रद
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में शुक्रवार को 'आई लव मुहम्मद' अभियान के समर्थन में निकले जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। जुमे की नमाज के बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और पुलिस पर पथराव करने लगे। स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान एक सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें जुलूस के दौरान भीड़ को भागते और लाठीचार्ज के बाद युवकों को इधर-उधर दौड़ते दिखाया गया है। मऊ की यह घटना बरेली में हुई समान हिंसा का विस्तार लगती है, जहां मौलाना तौकीर रजा खान की गिरफ्तारी के बाद भी तनाव बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे पूर्वनियोजित साजिश बताते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पुलिस ने अब तक दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन कोई मौत नहीं हुई। यह विवाद अब पूरे राज्य में फैल चुका है, जो धार्मिक संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
'आई लव मुहम्मद' अभियान की शुरुआत पाकिस्तान में एक ईसाई व्यक्ति द्वारा पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से हुई। वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनका असर भारत पहुंचा। उत्तर प्रदेश में यह विवाद 4 सितंबर 2025 को कानपुर के ईद-ए-मिलाद-उन-नबी जुलूस के दौरान भड़का। जुलूस के रास्ते पर एक तंबू पर 'आई लव मुहम्मद' का पोस्टर लगाया गया, जिसकी शिकायत पर पुलिस ने नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे धार्मिक अभिव्यक्ति बताया और कहा कि यह कोई अपराध नहीं है। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक तनाव फैलाने का हथियार कहा। अभियान जल्दी ही बरेली, मऊ, उन्नाव, महराजगंज, लखनऊ और कौशांबी जैसे जिलों में फैल गया।
मऊ में घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे मोहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र के बाजार इलाके में हुई। जुमे की नमाज के बाद सैकड़ों युवक 'आई लव मुहम्मद' के बैनर और पोस्टर लेकर जुलूस निकालने लगे। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही धारा 144 लागू कर दी थी और जुलूस की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने लोगों को घर लौटने की चेतावनी दी, लेकिन भीड़ नहीं मानी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग राय ने बताया कि कुछ उपद्रवियों ने आपत्तिजनक नारे लगाए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके जवाब में पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। वायरल सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि जुलूस के दौरान सड़क पर भारी भीड़ जमा हो गई। युवक बैनर लहरा रहे हैं और नारे लगा रहे हैं। फिर अचानक पथराव शुरू होता है, जिसके बाद पुलिस की लाठियां चलती हैं। भागते युवक सड़कों पर इधर-उधर दौड़ते नजर आते हैं। फुटेज करीब 30 सेकंड का है, जो एक दुकान के कैमरे में रिकॉर्ड हुआ। सोशल मीडिया पर इसे हजारों बार शेयर किया गया। एक यूजर ने लिखा, 'शांति का संदेश देने वाले जुलूस में हिंसा? यह क्या पैगाम है?'
मऊ जिला पूर्वांचल का एक संवेदनशील इलाका है, जहां हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। यहां पहले भी सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं हुई हैं। इस बार जुलूस में ज्यादातर 15 से 20 साल के युवक शामिल थे। पुलिस के अनुसार, भीड़ में कुछ लोग पूर्वनियोजित तरीके से हिंसा भड़काने आए थे। पथराव में दो पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हुए। लाठीचार्ज के दौरान कोई गंभीर चोट नहीं लगी। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं ताकि अफवाहें न फैलें। अब तक 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। एफआईआर आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 323 (मारपीट) और 504 (उकसावा) के तहत दर्ज हुई है। मऊ के एसपी ने अपील की कि लोग शांति बनाए रखें। स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने भी हिंसा की निंदा की और कहा कि यह अभियान शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ शरारती तत्वों ने बिगाड़ा।
यह घटना बरेली की हिंसा से जुड़ी लगती है। बरेली में मौलाना तौकीर रजा खान ने सोशल मीडिया पर जुलूस का आह्वान किया था, लेकिन अनुमति न मिलने पर प्रदर्शनकारी भड़क गए। वहां इस्लामिया ग्राउंड के पास 1000 से अधिक लोग इकट्ठा हो गए। पथराव में 10 पुलिसकर्मी घायल हुए और वाहनों में तोड़फोड़ हुई। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। मौलाना तौकीर को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। बरेली के आईजी अजय साहनी ने कहा कि उपद्रवियों ने हवा में फायरिंग भी की। 11 एफआईआर दर्ज हुईं, जिसमें 2000 से अधिक नामजद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में कहा, 'बरेली में एक मौलाना भूल गया था कि राज्य में सत्ता किसकी है। हमने ऐसा सबक सिखाया है कि सात पीढ़ियां सोचेंगी।' उन्होंने इसे पश्चिमी यूपी में निवेश रोकने की साजिश बताया। बरेली में बाजार बंद हो गए और फ्लैग मार्च निकाले गए।
इस विवाद ने राज्य के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया है। उन्नाव में जुलूस के दौरान पथराव हुआ, महराजगंज में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया। लखनऊ में महिलाओं ने इमामबाड़ा पर शांतिपूर्ण विरोध किया। कौशांबी और कासगंज में भी तनाव की खबरें आईं। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, 'लाठीचार्ज सरकार की कमजोरी का प्रतीक है। सद्भाव से काम चलता है, बल से नहीं।' आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। वहीं, बहुजन समाज पार्टी ने शांति की अपील की। भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर YogiRoars ट्रेंड चलाया। एक यूजर ने लिखा, 'शांति का पैगाम देने वाले पथराव? कानून सबके लिए बराबर है।'
सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज ने बहस छेड़ दी है। मऊ के वीडियो में युवक भागते दिख रहे हैं, जो लोगों को डराने वाला लगता है। कुछ ने इसे साजिश बताया, तो कुछ ने कहा कि युवाओं को भड़काया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक अभियान में राजनीति घुसपैठ कर रही है। एक समाजशास्त्री ने कहा, 'ऐसे आयोजन समाज को बांटते हैं। सरकार को जागरूकता बढ़ानी चाहिए।' राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस ने खुफिया तंत्र को अलर्ट किया है। दशहरा त्योहार नजदीक होने से अतिरिक्त सुरक्षा के आदेश दिए गए हैं।
UP : आई लव मोहम्मद विवाद पर भड़की हिंसा, मऊ में भी हुआ पथराव और लाठीचार्ज
◆ मऊ का एक CCTV फुटेज SM पर वायरल हो रहा है, जिसमें जुलूस के दौरान भीड़ और लाठीचार्ज के बाद भागते युवकों को देखा जा सकता है#UttarPradesh | #Mau | #ILoveMuhammad | #UPPolice pic.twitter.com/F2Z2v0cjdY — News24 (@news24tvchannel) September 27, 2025
Also Click : Greater Noida : यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दूसरे दिन पहुंचे रिकॉर्ड 91 हजार से अधिक दर्शक
What's Your Reaction?