Gorakhpur : सोना उगाने वाले किसानों को समृद्ध कर रही योगी सरकार, अन्नदाताओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ पर जोर दे रही योगी सरकार 

प्रदेश सरकार की कृषि हितैषी नीतियों और ग्रामीण विकास के संकल्प का असर गांवों में भी क्रांतिकारी बदलाव के रूप में दिख रहा है। कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कोरि

Feb 18, 2026 - 22:48
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Gorakhpur : सोना उगाने वाले किसानों को समृद्ध कर रही योगी सरकार, अन्नदाताओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ पर जोर दे रही योगी सरकार 
Gorakhpur : सोना उगाने वाले किसानों को समृद्ध कर रही योगी सरकार, अन्नदाताओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ पर जोर दे रही योगी सरकार 

  • वाराणसी में 94,188 हेक्टेयर में होती है खेती, काशी पर मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद, यहां कोई भूखा नहीं सोता
  • कानपुरः योगी सरकार की नीतियों से किसानों को मिली मुनाफे की राह, खेत तालाब योजना ने बदली तकदीर
  • गोरखपुरः कृषि क्षेत्र को मिल रहे प्रोत्साहन का उदाहरण है ब्रह्मपुर ब्लॉक में एक खास तरह का नवाचार

गोरखपुर/वाराणसी/कानपुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मिट्टी से सोना उगाने वाले अन्नदाता किसानों को प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में हिस्सेदार बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार ने किसानों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ की नीति को केंद्र में रखा है, जिसमें नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभिन्न जनपदों में किसानों की उल्लेखनीय उपलब्धियां सरकार के इन्हीं प्रयासों की सार्थकता साबित कर रही हैं। राज्य सरकार के बजटीय प्रावधानों और योजनाओं से न केवल किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही, बल्कि ग्रामीण आधारभूत ढांचे में भी जबरदस्त सुधार हो रहा है। कृषि क्षेत्र का उन्नयन और अन्नदाता किसानों की आय में वृद्धि, योगी सरकार के पहले कार्यकाल से प्राथमिकता रही है। बजट में साल दर साल सरकार ने कृषि क्षेत्र के बजटीय प्रावधानों में बढ़ोतरी कर यह जताया भी है। 

वाराणसी: सरकारी योजनाओं से किसान भी उत्साहित 
पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में सरकार ने 2026 -27 के बजट में 20 प्रतिशत अधिक का प्रावधान करते हुए कृषि योजनाओं के लिए ₹10.888 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। वाराणसी की बात करें तो यहां 94,188 हेक्टेयर में खेती होती है। यहां किसानों की संख्या 3,05,823 है। वाराणसी में 2025 -26 में 558.067 हज़ार मीट्रिक टन खाद्यान्न और 29.354 हज़ार मीट्रिक टन तिलहन का लक्ष्य था। काशी पर सदैव मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है। मान्यता है कि यहां कोई भूखा नहीं सोता। यहां की मिट्टी सोना उगलती रहे, इसके लिए बजट में सरकार ने भरपूर इंतजाम भी किया है। प्राकृतिक खेती हो या निर्बाध बिजली आपूर्ति, पशुधन समेत सरकार ने सभी का ध्यान रखा है। सरकार ने बजट में ग्राम्य विकास को 25,500 करोड़ दिए हैं। सोलर पंप योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप दिए जा रहे हैं, जिससे बिजली की समस्या से राहत मिली है।

वाराणसी के किसान सतीश सिंह व अजीत कुमार बताते हैं, "सोलर पंप मिलने से सिंचाई की लागत काफी कम हो गई है। अब हम अपनी फसल को समय पर पानी दे पाते हैं। उत्पादन भी बढ़ा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने भी क्षतिपूर्ति देकर प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान की है। इसी तरह कक्कू सिंह व श्रीनाथ ने बताया कि समय पर बीज और खाद मिल जाता है। सरकार की मदद खेती में बड़ा सहयोग कर रही है। किसान पाठशाला, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, अनुदान पर कृषि यंत्र, बीज आदि से हमें काफी राहत मिल रही है। 

कानपुरः खेत तालाब योजना बनी कमाई का जरिया
प्रदेश सरकार की कृषि हितैषी नीतियों और ग्रामीण विकास के संकल्प का असर गांवों में भी क्रांतिकारी बदलाव के रूप में दिख रहा है। कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कोरियां गांव में किसान देवेंद्र वर्मा इसका जीता-जागता प्रमाण हैं। देवेंद्र ने साबित कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं के संबंध में सही मार्गदर्शन मिले तो खेती सफल बिजनेस मॉडल बन सकती है। उन्होंने जमीन के एक हिस्से पर 'खेत तालाब योजना' के अंतर्गत तालाब का निर्माण कराया है। आज उनकी पहचान क्षेत्र के सफल प्रगतिशील किसानों में होती है। मछली पालन के बारे में देवेंद्र बताते हैं कि उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया। तालाब तैयार होने के बाद वह अच्छी गुणवत्ता के मत्स्य बीज डालते हैं और नियमित रूप से पानी की शुद्धता और मछलियों के चारे का प्रबंधन करते हैं। 

मछली पालन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि तालाब के किनारों पर अन्य कृषि गतिविधियां भी की जा सकती हैं। वे एक सीजन में 8 से 9 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं, जो उनकी परंपरागत फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) से होने वाली आय से कई गुना अधिक है। देवेंद्र वर्मा कहते हैं कि शुरुआत में लगता था कि मछली पालन में बहुत खतरा है, लेकिन सरकार की नीतियों और अधिकारियों के सहयोग ने हौसला बढ़ाया। मछली पालन के लिए सबसे जरूरी है तालाब का सही प्रबंधन। उन्होंने कम पानी में भी उन्नत किस्म की मछलियां पालने की जानकारी ली, जिससे उनकी सालाना कमाई 8 से 9 लाख रुपये के बीच है। वर्मा ने अन्य किसानों से भी कहा कि सरकार की लाभकारी योजनाओं का लाभ उठाकर मछली पालन जैसे क्षेत्रों में कदम बढ़ाएं। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम होंगे। 

गोरखपुर: सरकारी प्रयास और मेहनत से आय दोगुनी 
कृषि क्षेत्र को सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन की एक नजीर गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में एक खास तरह के नवाचार के जरिये दिख रही है। यहां सरकार के त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम से बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान प्राप्त कर कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जुड़े किसानों ने आय दोगुनी करने में सफलता हासिल की है। एफपीओ से जुड़े कुछ किसानों ने बीते खरीफ सीजन में आठ एकड़ के क्लस्टर में स्वीट कॉर्न की खेती की। इसमें साथ मिला कृषि विभाग और सरकार के त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम का। इस कार्यक्रम से किसानों को सबसे बड़ा फायदा बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान का मिला। स्वीट कॉर्न का बीज बाजार में 3200 रुपये प्रति किलो मिलता है। सरकार भरपूर सब्सिडी नहीं देती तो किसानों के लिए बीज ही खरीदना मुश्किल था। सरकार के साथ से यह बीज सिर्फ 10 फीसदी पर मिल गया।

स्वीट कॉर्न के बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान मिलने से प्रति एकड़ लागत काफी कम, आठ से दस हजार रुपये के बीच ही रही। इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर फसल प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। ढाई माह में फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ औसतन 40 क्विंटल उपज प्राप्त हुई। उत्पादित स्वीट कॉर्न एफपीओ के माध्यम से स्थानीय व्यापारियों के स्तर पर ही हाथों-हाथ 30 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक गया। इन किसानों ने प्रति एकड़ एक से सवा लाख रुपये की आय अर्जित की, जो धान जैसी पारंपरिक फसल की तुलना में काफी अधिक है।

ब्रह्मपुर ब्लॉक में इस एफपीओ के संचालक और प्रगतिशील किसान आकिब जावेद बताते हैं कि योगी सरकार का भरपूर साथ मिलने से किसानों के जीवन में दोगुनी आय की मिठास घुल रही है। इस बार के बजट में कृषि योजनाओं के लिए अधिक धनराशि की व्यवस्था से किसान और लाभान्वित होंगे। बजट में सरकार ने एफपीओ को रिवॉल्विंग फंड के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर कृषि नवाचार को सतत आगे बढ़ाने का भी मार्ग दिखाया है।

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