UAE के पूर्व राजदूत का बड़ा बयान- 'PM मोदी की एक कॉल से खत्म हो सकती है ईरान-इजराइल जंग'

युद्धग्रस्त मध्य पूर्व में UAE के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की

Mar 10, 2026 - 16:40
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UAE के पूर्व राजदूत का बड़ा बयान- 'PM मोदी की एक कॉल से खत्म हो सकती है ईरान-इजराइल जंग'
UAE के पूर्व राजदूत का बड़ा बयान- 'PM मोदी की एक कॉल से खत्म हो सकती है ईरान-इजराइल जंग'
  • 'एक फोन कॉल से मोदी ईरान और इजराइल को रोक सकते हैं': UAE पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा
  • खाड़ी युद्ध फैला: ईरान ने UAE में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए, मोदी की मध्यस्थता पर जोर

युद्धग्रस्त मध्य पूर्व में UAE के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फोन कॉल से ईरान और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष समाप्त हो सकता है। मिर्जा, जो भारत में UAE के पहले राजदूत रहे हैं, ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की स्थिति और मोदी की दोनों पक्षों के साथ मजबूत संबंध इस संकट को हल करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध खाड़ी देशों तक फैल चुका है और UAE सहित कई अरब देश प्रभावित हो रहे हैं। मिर्जा ने स्पष्ट किया कि UAE इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और इसका कोई कारण नहीं है, क्योंकि UAE ईरान का पड़ोसी है और अब्राहम समझौते के तहत इजराइल का साझेदार है। उन्होंने कहा कि UAE अपनी धरती को किसी भी पक्ष द्वारा हमले के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देगा। अपडेट्स के अनुसार, यह बयान 9 मार्च 2026 को दिए गए इंटरव्यू में आया, जहां मिर्जा ने मोदी की क्षेत्रीय छवि की प्रशंसा की और कहा कि मोदी को दोनों पक्षों के नेता और समुदायों में सम्मान प्राप्त है। उन्होंने मोदी के ईरान के साथ तेल खरीद और इजराइल के साथ मजबूत संबंधों का जिक्र किया, जो उन्हें मध्यस्थता के लिए उपयुक्त बनाता है।

युद्ध की शुरुआत फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के ईरान पर बड़े हमलों से हुई, जिसके जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए। 28 फरवरी 2026 के बाद ईरान ने UAE में कई अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया, जिसमें अल धफरा एयर बेस शामिल है। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल की गईं, जिससे UAE में विस्फोट हुए, हवाई अड्डे बंद हुए और नागरिक क्षेत्रों में मलबा गिरा। UAE की वायु रक्षा प्रणालियों ने कई हमलों को रोका, लेकिन कुछ मिसाइलों के मलबे से अबू धाबी और दुबई में चोटें आईं और कम से कम एक मौत की खबर आई। ईरान ने इन हमलों को अमेरिकी ठिकानों पर प्रतिशोध बताया और कहा कि क्षेत्रीय देशों की धरती पर हमला नहीं किया जा रहा, बल्कि अमेरिकी संपत्ति पर है। अपडेट्स से पता चलता है कि UAE ने इन हमलों के बाद अपनी रक्षात्मक स्थिति मजबूत की है और कहा है कि कोई भी जवाबी कार्रवाई स्पष्ट और सार्वजनिक होगी। मिर्जा ने इस संदर्भ में कहा कि UAE युद्ध में फंसना नहीं चाहता और डिप्लोमेसी के माध्यम से समाधान चाहता है, जहां भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

मिर्जा के बयान में मोदी की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, क्योंकि भारत ईरान का बड़ा तेल खरीदार है और इजराइल के साथ भी मजबूत साझेदारी रखता है। उन्होंने कहा कि मोदी की एक कॉल से दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है, क्योंकि मोदी को 'योद्धाओं' के बीच भी सम्मान प्राप्त है। यह बयान UAE की तटस्थता को दर्शाता है, जहां देश ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध में शामिल नहीं होगा और अपनी धरती का दुरुपयोग नहीं होने देगा। अपडेट्स के अनुसार, UAE ने ईरान के हमलों के बाद हवाई रक्षा को और मजबूत किया है और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। मिर्जा ने कहा कि UAE ईरान और इजराइल दोनों से संबंध रखता है, इसलिए वह बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, लेकिन मोदी की कॉल से तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को भी रेखांकित करता है, जहां मोदी को क्षेत्रीय मुद्दों पर विश्वसनीय माना जाता है।

  • UAE पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा के मुख्य बिंदु

मिर्जा ने कहा कि UAE युद्ध में शामिल होने का कोई कारण नहीं देखता और अपनी धरती को हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा। उन्होंने मोदी की ईरान और इजराइल दोनों के साथ मजबूत संबंधों का जिक्र किया। एक फोन कॉल से मोदी समस्या हल कर सकते हैं, क्योंकि दोनों पक्ष उन्हें सम्मान देते हैं। UAE डिप्लोमेसी के माध्यम से शांति चाहता है और भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

युद्ध अब खाड़ी देशों तक फैल चुका है, जहां ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं, लेकिन UAE जैसे देशों ने रक्षात्मक रुख अपनाया है। अपडेट्स में पता चला है कि UAE ने ईरान के हमलों के जवाब में कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से डिप्लोमेटिक समाधान की अपील की है। मिर्जा के बयान से UAE की चिंता साफ है कि युद्ध उनके क्षेत्र में फैल रहा है और इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है, जैसे दुबई एयरपोर्ट बंद होना और व्यापार प्रभावित होना। उन्होंने कहा कि UAE अब्राहम समझौते के तहत इजराइल का साझेदार है, लेकिन ईरान का पड़ोसी होने के नाते संतुलन बनाए रखना चाहता है। मोदी की मध्यस्थता का सुझाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत तटस्थ रहते हुए दोनों पक्षों से बात कर सकता है।

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