Kanpur : खरीफ उत्पादकता गोष्ठी संपन्न, कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना हुआ अनिवार्य

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने भाषण में कहा कि देश में पुराने समय से ही प्राकृतिक खेती की परंपरा रही है, जो सेहत के लिए सबसे अच्छी है। आज के समय में रासायनिक खादों के ज्यादा इस्तेमाल से बीमारियां बढ़ रही हैं, इसलिए राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस साल इसके

May 16, 2026 - 12:22
May 16, 2026 - 12:29
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Kanpur : खरीफ उत्पादकता गोष्ठी संपन्न, कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना हुआ अनिवार्य
Kanpur : खरीफ उत्पादकता गोष्ठी संपन्न, कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना हुआ अनिवार्य

कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में कानपुर, चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल की संयुक्त खरीफ उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही रहे, जिन्होंने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस गोष्ठी की अध्यक्षता कृषि प्रमुख सचिव रवीन्द्र ने की। कार्यक्रम में तीन मण्डलों के तेरह जिलों से आए किसानों और अधिकारियों ने खेती की पैदावार बढ़ाने और नई तकनीकों की जानकारी साझा करने के लिए हिस्सा लिया।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने भाषण में कहा कि देश में पुराने समय से ही प्राकृतिक खेती की परंपरा रही है, जो सेहत के लिए सबसे अच्छी है। आज के समय में रासायनिक खादों के ज्यादा इस्तेमाल से बीमारियां बढ़ रही हैं, इसलिए राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस साल इसके लिए पंचानबे करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक सौ दस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अनाज उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसमें खास तौर पर दालों की खेती का दायरा चार लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा।

कृषि प्रमुख सचिव रवीन्द्र ने किसानों से रासायनिक खादों की जगह हरी खाद और जैविक खाद का इस्तेमाल करने को कहा ताकि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आने वाले समय में सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी होगा। कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने पानी की कमी वाले इलाकों जैसे चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल के किसानों को दलहन, तिलहन और रागी जैसी फसलें उगाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने बारिश का पानी इकट्ठा करने के लिए चेकडैम बनाने के बारे में भी बताया।

इस गोष्ठी में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को अच्छे बीजों, मिट्टी की सेहत और पशुपालन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां दीं। कार्यक्रम के दौरान ई-लॉटरी से चुने गए चार किसानों को ढैचा बीज की मिनीकिट बांटी गईं। इस मौके पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, कुलपति संजीव गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी सहित अलग-अलग मण्डलों के मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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