मशहूर फिल्ममेकर जोया अख्तर और रीमा कागती के प्रोडक्शन हाउस में बड़ी वारदात: ऑफिस से 66 डेटा हार्ड डिस्क चोरी होने से फिल्म इंडस्ट्री में मचा हड़कंप।

भारतीय सिनेमा जगत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक और निर्माता जोया अख्तर तथा उनकी व्यावसायिक साझीदार रीमा कागती

May 26, 2026 - 16:16
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मशहूर फिल्ममेकर जोया अख्तर और रीमा कागती के प्रोडक्शन हाउस में बड़ी वारदात: ऑफिस से 66 डेटा हार्ड डिस्क चोरी होने से फिल्म इंडस्ट्री में मचा हड़कंप।
मशहूर फिल्ममेकर जोया अख्तर और रीमा कागती के प्रोडक्शन हाउस में बड़ी वारदात: ऑफिस से 66 डेटा हार्ड डिस्क चोरी होने से फिल्म इंडस्ट्री में मचा हड़कंप।
  • टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी के दफ्तर से फिल्मों और वेब सीरीज का बेहद गोपनीय डेटा गायब: डेटा लीक होने पर करोड़ों के नुकसान की आशंका
  • शिकायत के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई: मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश नाम के दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, गहन पूछताछ शुरू

भारतीय सिनेमा जगत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक और निर्माता जोया अख्तर तथा उनकी व्यावसायिक साझीदार रीमा कागती के मुंबई स्थित प्रोडक्शन हाउस 'टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी' के कार्यालय से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। प्रोडक्शन हाउस के मुख्य दफ्तर से एक साथ 66 महत्वपूर्ण डेटा हार्ड डिस्क रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हो गईं, जिसके बाद पूरे फिल्म उद्योग में हड़कंप मच गया है। इन चोरी हुई हार्ड डिस्क में प्रोडक्शन हाउस की आने वाली बड़ी फिल्मों, चर्चित वेब सीरीज और कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक विज्ञापन प्रोजेक्ट्स से जुड़ा हुआ अत्यंत संवेदनशील, मूल्यवान और पूरी तरह से गोपनीय डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा गया था। इस अभूतपूर्व डेटा चोरी की घटना का पता चलते ही कंपनी के प्रबंधन में अफरा-तफरी मच गई और बिना कोई बहुमूल्य समय गंवाए फिल्म निर्माताओं द्वारा तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस आपराधिक घटना के खिलाफ एक आधिकारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

पुलिस प्रशासन और फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा की गई प्राथमिक विधिक जांच के अनुसार, भौतिक रूप से इन 66 हार्ड डिस्क की कीमत और चोरी से हुए तात्कालिक नुकसान का अनुमान लगभग 12 से 13 लाख रुपये के बीच लगाया गया है। हालांकि, फिल्म निर्माण के तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस चोरी की वास्तविक गंभीरता इसके हार्डवेयर की कीमत में नहीं, बल्कि उसके भीतर मौजूद बौद्धिक संपदा और रचनात्मक डेटा में छिपी हुई है। यदि इन हार्ड डिस्क में मौजूद फिल्मों और सीरीज का अनरिलीज्ड (अप्रकाशित) डेटा, फुटेज या स्क्रिप्ट्स इंटरनेट पर लीक हो जाती हैं, या किसी प्रतिद्वंद्वी इकाई के हाथ लग जाती हैं, तो प्रोडक्शन हाउस को होने वाला यह मामूली सा दिखने वाला नुकसान पल भर में करोड़ों-अरबों रुपये की भारी व्यावसायिक चपत में बदल सकता है। फिल्म जगत में इस तरह के डेटा की गोपनीयता ही किसी भी प्रोजेक्ट की सफलता की मुख्य रीढ़ मानी जाती है।

शिकायतकर्ता फिल्ममेकर की तहरीर और दफ्तर के आंतरिक रिकॉर्ड्स की जांच के आधार पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत कदम उठाते हुए भारतीय न्याय संहिता की चोरी और विश्वासघात से संबंधित गंभीर धाराओं के तहत एक आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की अपराध शाखा ने प्रोडक्शन हाउस के कार्यालय में काम करने वाले मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों की सूची तैयार की और वहां लगे सुरक्षा कैमरों के फुटेज खंगाले। इस सघन तकनीकी तफ्तीश के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो मुख्य संदिग्धों को चिन्हित किया, जिनकी पहचान मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश के रूप में की गई है। पुलिस ने जाल बिछाकर इन दोनों आरोपियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें अदालत के समक्ष पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया है।

पुलिस की शुरुआती पूछताछ के दौरान पकड़े गए दोनों आरोपियों के पास से इस चोरी की वारदात और गायब की गई संपत्तियों के संबंध में कई महत्वपूर्ण कड़ियां हाथ लगने का दावा किया जा रहा है। जांच अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य केवल कीमती हार्ड डिस्क को बाजार में बेचकर चंद रुपये कमाना था, या फिर वे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय पाइरेसी रैकेट या कूटनीतिक सिंडिकेट के इशारे पर काम कर रहे थे, जो बड़ी फिल्मों का डेटा हैक या चोरी करके उन्हें अवैध रूप से इंटरनेट पर लीक करते हैं। पुलिस इन दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स, व्हाट्सएप संदेशों और उनके बैंक खातों के लेन-देन के विवरण को भी खंगाल रही है ताकि इस साजिश में शामिल अन्य संभावित चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

इस हाई-प्रोफाइल चोरी की घटना ने बॉलीवुड के तमाम बड़े प्रोडक्शन हाउसेस और मनोरंजन उद्योग से जुड़ी कंपनियों के भीतर डिजिटल डेटा की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन को लेकर एक नए विमर्श को जन्म दे दिया है। आज के आधुनिक डिजिटल युग में जब फिल्मों की पूरी शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन का काम डिजिटल स्वरूप में ही होता है, तब इस तरह की भौतिक चोरी किसी भी कंपनी के पूरे साल की मेहनत को पूरी तरह से तबाह कर सकती है। इस घटना के बाद मुंबई के कई अन्य बड़े फिल्म निर्माताओं ने भी अपने कार्यालयों और संपादन स्टूडियो (एडिटिंग सूट्स) की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना शुरू कर दिया है। दफ्तरों में बाहरी डिजिटल उपकरणों के प्रवेश और आंतरिक डेटा सर्वर रूम की सुरक्षा को और अधिक कड़ा करने की प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं।

फिलहाल, पुलिस की टीमें गिरफ्तार किए गए आरोपियों मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश की निशानदेही पर उन सभी 66 हार्ड डिस्क को सकुशल और बिना किसी छेड़छाड़ के बरामद करने के लिए विभिन्न संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। फॉरेंसिक डेटा विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हिरासत में लिए जाने से पहले आरोपियों ने उन हार्ड डिस्क में मौजूद फिल्मों और सीरीज के मुख्य फुटेज की कोई डिजिटल कॉपी या बैकअप तैयार तो नहीं किया है। पीड़ित प्रोडक्शन हाउस के कानूनी प्रतिनिधि भी पुलिस प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं ताकि अपनी बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक विधिक कदम उठाए जा सकें।

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