चीन के उत्तरी शांक्सी प्रांत में हुआ पिछले 16 वर्षों का सबसे भीषण कोयला खदान हादसा, गैस विस्फोट और जहरीली गैस की चपेट में आने से 90 से अधिक मजदूरों की दर्दनाक मौत
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार की शाम करीब 7:30 बजे हुए इस हादसे के शुरुआती तकनीकी कारणों को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे बेहद डराने वाली हैं। धमाके से ठीक पहले खदान के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य अत्यधिक ज्वलनशील गैसों के रिसाव का एक आपातका
- सैकड़ों फीट गहरी खदान में गैस रिसाव के बाद हुआ जोरदार धमाका, मलबे और धुएं के बीच फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर जारी है बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
- वैश्विक त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति जताई गहरी संवेदना, पीड़ित परिवारों के लिए ढांढस बंधाते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की
पड़ोसी देश चीन के उत्तरी प्रांत शांक्सी से एक बेहद ही दुखद और रोंगटे खड़े कर देने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई है। यहां चांगझी शहर के किनयुआन काउंटी में स्थित लिउशेनयू कोयला खदान में शुक्रवार शाम को अचानक एक भयानक गैस विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 90 से अधिक स्थानीय खदान मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। चीनी प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जिस समय यह जोरदार धमाका हुआ, उस वक्त जमीन से सैकड़ों फीट नीचे अंधेरी सुरंगों में लगभग 247 श्रमिक अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। इस विनाशकारी घटना को पिछले 16 वर्षों में चीन का सबसे बड़ा और सबसे घातक माइनिंग हादसा माना जा रहा है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है।
इस भीषण वैश्विक आपदा और भारी जान-माल के नुकसान पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल कदम उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक संदेश साझा किया और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा वहां की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस अत्यंत कठिन और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील समय में भारत के लोगों की भावनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। उन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले अभागे मजदूरों के परिजनों को यह असहनीय दुख सहने के लिए ईश्वर से शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। इसके साथ ही भारतीय प्रधानमंत्री ने मलबे के भीतर लापता हुए सभी लोगों की जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी और अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से घायल श्रमिकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की है।
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार की शाम करीब 7:30 बजे हुए इस हादसे के शुरुआती तकनीकी कारणों को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे बेहद डराने वाली हैं। धमाके से ठीक पहले खदान के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य अत्यधिक ज्वलनशील गैसों के रिसाव का एक आपातकालीन अलर्ट जारी किया गया था। लेकिन इससे पहले कि प्रबंधन खदान के भीतर काम कर रहे सभी 247 मजदूरों को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल पाता, एक चिंगारी के कारण वहां हवा के दबाव के साथ जोरदार गैस विस्फोट हो गया। यह गैस बिना किसी रंग और गंध के बेहद जहरीली होती है, जिसके कारण खदान के भीतर ऑक्सीजन का स्तर अचानक शून्य हो गया। धमाके के बाद मलबे में दबे होने के अलावा अधिकांश मजदूरों की मौत इसी दम घोंटू और जहरीली हवा के फेफड़ों में भर जाने के कारण दम घुटने से हुई है।
औद्योगिक सुरक्षा और जीवन का संकट
दुनिया भर में ऊर्जा की भारी मांग को पूरा करने के लिए कोयला खदानों में दिन-रात काम होता है, लेकिन अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण ऐसी बड़ी मानवीय त्रासदियां जन्म लेती हैं। गहरे भूगर्भ में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कड़े अंतर्राष्ट्रीय नियमों और वास्तविक समय की निगरानी प्रणालियों को कड़ाई से लागू करना समय की मांग है।
हादसे की सूचना मिलते ही बीजिंग से लगभग 520 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस प्रभावित क्षेत्र में हड़कंप मच गया। प्रांतीय सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट किया और मौके पर 755 से अधिक विशेषज्ञ बचावकर्मियों की सात अलग-अलग विशिष्ट रेस्क्यू और मेडिकल टीमें भेजी गईं। खदान के मुहाने पर दर्जनों एम्बुलेंस और आपातकालीन गाड़ियां तैनात की गई हैं। हालांकि, राहत और बचाव कार्य में जुटे जवानों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि खदान के भीतर अभी भी जहरीली गैसों का गुबार भरा हुआ है और बार-बार मिट्टी धंसने का खतरा बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, खदान संचालक कंपनी द्वारा जो ब्लूप्रिंट या नक्शा प्रशासनिक टीमों को सौंपा गया था, वह वास्तविक भूमिगत लेआउट से मेल नहीं खा रहा है, जिससे बचाव दल को सही रास्तों का पता लगाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इस विनाशकारी माइनिंग हादसे के बाद चीन के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व में भी भारी खलबली मची हुई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय मंत्रालयों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि लापता लोगों की खोज के लिए बिना एक पल गंवाए हर संभव वैज्ञानिक और मानवीय प्रयास किए जाएं और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही उन्होंने दुर्घटना के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि जिन भी अधिकारियों या कंपनी मालिकों ने सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती है, उन्हें कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। इस कड़ी में चीनी कैबिनेट यानी स्टेट काउंसिल ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है जो सुरक्षा नियमों के "गंभीर उल्लंघन" के आरोपों की कड़ाई से पड़ताल कर रहा है।
इस आपदा का शिकार बनी लिउशेनयू कोयला खदान का संचालन शांक्सी तोंगझोउ ग्रुप लिउशेनयू कोल इंडस्ट्री नामक कंपनी द्वारा किया जा रहा था, जो एक बड़े कोकिंग ग्रुप के नियंत्रण में काम करती है। यह खदान सालाना करीब 1.2 मिलियन टन कोयला उत्पादन की क्षमता रखती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसका रिकॉर्ड पहले से ही बेहद खराब रहा था। राष्ट्रीय खदान सुरक्षा प्रशासन ने साल 2024 में ही इस खदान को अत्यधिक गैस रिसाव की संभावना वाले और आपदा-प्रवण खदानों की राष्ट्रीय संवेदनशील सूची में शामिल किया था। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा सुरक्षा उपकरणों को अपग्रेड न करना और मजदूरों को खतरनाक परिस्थितियों में नीचे भेजना एक बहुत बड़ी आपराधिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। वर्तमान में स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो ने कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को हिरासत में ले लिया है और उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।
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