आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उठाया जीपीयू संकट का मुद्दा, भारत की एआई महत्वाकांक्षा पर बड़ा खतरा।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को राज्यसभा में भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस योजनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने
- जीपीयू की कमी भारत के एआई सपनों की सबसे बड़ी बाधा: राघव चड्ढा ने राज्यसभा में सरकार से मांगे जवाब
- भारत के पास मात्र 34,000 जीपीयू, वैश्विक स्तर पर एआई मॉडल ट्रेनिंग के लिए अपर्याप्त: राज्यसभा में चड्ढा का बयान
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को राज्यसभा में भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस योजनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री से सवाल किया कि देश में एआई विकास की सबसे बड़ी बाधा कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी है खासकर जीपीयू की। राघव चड्ढा ने कहा कि भारत की एआई महत्वाकांक्षा में पूंजी की कमी नहीं है न ही टैलेंट की न फंडिंग की और न ही इरादों की लेकिन कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी मुख्य समस्या है। उन्होंने बताया कि भारत के पास फिलहाल लगभग 34,000 जीपीयू हैं जो उन्नत एआई सिस्टम विकसित करने के लिए वैश्विक स्तर पर बहुत कम हैं।
- जीपीयू की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सप्लाई चेन समस्या भारत के डेटा सेंटर विस्तार को रोक रही हैं
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा कि जीपीयू की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जीपीयू सप्लाई चेन में व्यवधान भारत के डेटा सेंटर विस्तार और एआई मॉडल ट्रेनिंग प्रयासों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि ये दो बड़ी चुनौतियां हैं जो भारत को एआई क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक रही हैं। सांसद ने सरकार से पूछा कि जीपीयू की कमी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और सुरक्षित एवं पूर्वानुमानित तरीके से इन संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है। उन्होंने लक्ष्य समयसीमा और भू-राजनीतिक प्रयासों के बारे में भी जानकारी मांगी। राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि 34,000 जीपीयू की संख्या वैश्विक स्तर पर बड़े डेटा सेंटरों और बड़े एआई मॉडल ट्रेनिंग की आवश्यकताओं के मुकाबले बहुत छोटी है।
- भारत की एआई महत्वाकांक्षा में कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी मुख्य बाधा: राघव चड्ढा का राज्यसभा में बयान
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा कि भारत एआई में महत्वाकांक्षी है लेकिन कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी इसे पूरा होने से रोक रही है। उन्होंने कहा कि एआई विकास में धन पूंजी टैलेंट फंडिंग या इरादों की कमी नहीं है बल्कि जीपीयू जैसे संसाधनों की कमी है। सांसद ने सरकार से पूछा कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जाएगा। उन्होंने वैश्विक स्तर पर जीपीयू की बढ़ती मांग और सप्लाई की कमी का जिक्र किया जो भारत के प्रयासों को प्रभावित कर रही है। राघव चड्ढा ने जोर दिया कि एआई मॉडल ट्रेनिंग के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूट पावर जरूरी है और भारत का वर्तमान पूल अपर्याप्त है।
- राघव चड्ढा के राज्यसभा बयान के मुख्य अंश
भारत की एआई महत्वाकांक्षा में सबसे बड़ी बाधा कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी है खासकर जीपीयू की। पूंजी टैलेंट फंडिंग या इरादों की कमी नहीं है। भारत के पास वर्तमान में लगभग 34,000 जीपीयू हैं। यह संख्या वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक एआई सिस्टम विकसित करने के लिए बहुत छोटी है। जीपीयू की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सप्लाई चेन व्यवधान डेटा सेंटर विस्तार और एआई ट्रेनिंग को सीमित कर रहे हैं। सरकार से पूछा गया कि जीपीयू कमी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षित पहुंच के लिए लक्ष्य समयसीमा और भू-राजनीतिक प्रयास क्या हैं।
- भारत में जीपीयू और एआई कंप्यूट क्षमता के संबंधित तथ्य
भारत का कुल कंप्यूट पूल लगभग 34,000 जीपीयू है। यह संख्या बड़े डेटा सेंटरों और बड़े एआई मॉडल ट्रेनिंग की वैश्विक आवश्यकताओं के मुकाबले बहुत कम है। जीपीयू की वैश्विक कमी और कीमत वृद्धि भारत के प्रयासों को प्रभावित कर रही है। राघव चड्ढा ने राज्यसभा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री से इन मुद्दों पर जवाब मांगा। सांसद ने एआई विकास में संसाधनों की कमी को मुख्य समस्या बताया।
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज प्रश्नकाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री से भारत की एआई महत्वाकांक्षा पर महत्वपूर्ण सवाल पूछने का अवसर मिला। एआई महत्वाकांक्षा पूरी न होने का मुख्य कारण कंप्यूटेशनल संसाधनों की कमी है विशेष रूप से जीपीयू की। भारत दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है जीपीयू की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जीपीयू कमी। उन्होंने पूछा कि सरकार इस कमी को कैसे दूर करने की योजना बना रही है। वर्तमान में देश की कुल कंप्यूट क्षमता लगभग 34,000 जीपीयू है। यह संख्या वैश्विक स्तर पर बड़े डेटा सेंटरों और बड़े एआई मॉडल ट्रेनिंग की जरूरतों के सामने बहुत छोटी है। राघव चड्ढा ने सरकार से लक्ष्य समयसीमा और भू-राजनीतिक स्तर पर प्रयासों के बारे में जानकारी मांगी ताकि जीपीयू जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
यह बयान राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान दिया गया जहां सांसद ने एआई क्षेत्र में भारत की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या संसाधनों की है न कि अन्य कारकों की। जीपीयू वैश्विक स्तर पर उच्च मांग में हैं और सप्लाई सीमित होने से कीमतें बढ़ रही हैं। भारत के डेटा सेंटर विस्तार और एआई मॉडल विकास पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। राघव चड्ढा ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाकर सरकार से ठोस कदमों की मांग की।
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