Politics News: शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए फिर की पीएम मोदी की तारीफ, कहा ‘भारत के लिए प्राइम एसेट’, कांग्रेस में बढ़ा असंतोष। 

कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है, जिससे उनकी अपनी पार्टी में...

By INA News Desk
Jun 24, 2025 - 12:31
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Politics News: शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए फिर की पीएम मोदी की तारीफ, कहा ‘भारत के लिए प्राइम एसेट’, कांग्रेस में बढ़ा असंतोष। 
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कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है, जिससे उनकी अपनी पार्टी में असहजता और तनाव बढ़ गया है। थरूर ने ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने एक लेख में पीएम मोदी को उनकी “ऊर्जा, गतिशीलता और वैश्विक मंच पर संवाद की तत्परता” के लिए “भारत का प्राइम एसेट” बताया। यह टिप्पणी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की कूटनीतिक पहल के संदर्भ में आई, जिसमें थरूर ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, कोलंबिया, गुयाना और पनामा सहित पांच देशों में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर पहले से मौजूद मतभेदों को और गहरा कर दिया है, क्योंकि पार्टी ने मोदी सरकार की विदेश नीति की लगातार आलोचना की है, इसे “विखंडित” और “वैश्विक स्तर पर भारत को अलग-थलग करने वाला” करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने थरूर के बयान का इस्तेमाल कांग्रेस और इसके नेता राहुल गांधी पर निशाना साधने के लिए किया, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

23 जून 2025 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में, शशि थरूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की कूटनीतिक पहल की सफलता पर प्रकाश डाला। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली पर्यटक मारे गए थे। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद, भारत ने सात सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को 32 देशों में भेजा, ताकि वैश्विक समुदाय को भारत की कार्रवाई को आत्मरक्षा के वैध कदम के रूप में समझाया जा सके। थरूर ने अपने लेख में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा, गतिशीलता और संवाद की तत्परता भारत के लिए वैश्विक मंच पर एक प्राइम एसेट है, लेकिन इसे और समर्थन की आवश्यकता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद की कूटनीतिक पहल राष्ट्रीय संकल्प और प्रभावी संचार का एक क्षण थी। इसने पुष्टि की कि भारत, जब एकजुट होता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज को स्पष्टता और दृढ़ता के साथ पेश कर सकता है।”

थरूर ने यह भी उल्लेख किया कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने कोलंबिया जैसे देशों की प्रारंभिक आलोचना को बदलने में सफलता हासिल की, जहां कोलंबिया ने पहले पाकिस्तान में हुए हताहतों पर शोक व्यक्त किया था। थरूर के कड़े विरोध के बाद, कोलंबिया ने अपनी टिप्पणी वापस ले ली, और थरूर ने इसे आतंकवादियों और आत्मरक्षा करने वालों के बीच कोई नैतिक समानता न होने के तर्क के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की रणनीति को “टेक, ट्रेड और ट्रेडिशन” (प्रौद्योगिकी, व्यापार और परंपरा) के तीन स्तंभों पर आधारित बताया, जो भारत को वैश्विक मंच पर एक “न्यायपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध” दुनिया की ओर ले जा सकता है।

  • कांग्रेस में असहजता और आंतरिक तनाव

थरूर की यह तारीफ कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से उलट है, जो मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना करती रही है। कांग्रेस ने दावा किया है कि भारत की कूटनीति “विखंडित” हो रही है और देश वैश्विक स्तर पर “अलग-थलग” पड़ रहा है, खासकर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की वाशिंगटन डीसी में मुलाकात के बाद। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्रंप के दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की, और पूछा कि क्या भारत ने अमेरिका की मध्यस्थता स्वीकार की है या तटस्थ स्थान पर पाकिस्तान के साथ बातचीत पर सहमति जताई है।

थरूर की टिप्पणियों ने कांग्रेस के भीतर पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। पहले भी, मई 2025 में, थरूर ने पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई और 2016 के उरी सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ की थी, जिस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय हुई सर्जिकल स्ट्राइक्स की याद दिलाई थी। इसके अलावा, थरूर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने पर भी विवाद हुआ था, क्योंकि कांग्रेस ने उनके नाम की सिफारिश नहीं की थी, फिर भी सरकार ने उन्हें चुना। कांग्रेस के कुछ नेताओं, जैसे उदित राज, ने थरूर को “भाजपा का सुपर प्रवक्ता” तक करार दिया था।

थरूर ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम में कहा था कि उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच “कुछ मतभेद” हैं, लेकिन उन्होंने इसे कम महत्व का बताते हुए कहा कि वह कांग्रेस के मूल्यों और कार्यकर्ताओं के प्रति वफादार हैं। फिर भी, उनकी बार-बार की गई मोदी की तारीफ ने पार्टी में असंतोष को बढ़ाया है, खासकर केरल इकाई में, जहां थरूर को निलंबुर उपचुनाव के प्रचार से दूर रखा गया था, हालांकि कांग्रेस ने दावा किया कि उनका नाम स्टार प्रचारकों की सूची में था।

  • भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा ने थरूर के बयान का तुरंत फायदा उठाया और इसे कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा, “शशि थरूर ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी की गतिशीलता और वैश्विक पहुंच भारत के लिए एक रणनीतिक लाभ है। शशि थरूर ने राहुल गांधी को बेनकाब कर दिया।” प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी थरूर के लेख को एक्स पर साझा किया, जिसमें लिखा गया, “लोकसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शशि थरूर ने लिखा - ऑपरेशन सिंदूर की वैश्विक पहल से सबक।” यह कदम थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव को और उजागर करता है।

एक्स पर इस मुद्दे को लेकर कई पोस्ट्स वायरल हुए। @indiatvnews ने लिखा, “शशि थरूर ने फिर की PM मोदी की तारीफ, बताया ‘प्राइम एसेट’; क्या कांग्रेस की बढ़ेंगी मुश्किलें?” @punjabkesari ने टिप्पणी की, “थरूर ने पीएम की ऊर्जा, सक्रियता और इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए उन्हें भारत का ‘प्राइम एसेट’ करार दिया है।” @dhirenpurohit ने कहा, “थरूर की तारीफ से कांग्रेस असहज, क्या पार्टी में नई मुश्किलें खड़ी होंगी?” कुछ यूजर्स ने थरूर की तारीफ को राष्ट्रीय हित में बताया, जबकि अन्य ने इसे कांग्रेस के लिए “शर्मिंदगी” करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “थरूर साहब अपनी बात कहने में माहिर हैं, लेकिन कांग्रेस को यह पचाना मुश्किल हो रहा है।” (@bharatvoice24)

शशि थरूर पहले भी कई बार पीएम मोदी और उनकी नीतियों की तारीफ कर चुके हैं, जिसके लिए उन्हें पार्टी के भीतर आलोचना का सामना करना पड़ा है। 2019 में, उन्होंने कहा था कि विदेश में पीएम मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, और उन्हें वहां सम्मान मिलना चाहिए, हालांकि भारत में उनकी आलोचना का अधिकार है। 2025 में, उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की तटस्थता, वैक्सीन मैत्री पहल, और ट्रंप के साथ मोदी की मुलाकात की तारीफ की थी। थरूर ने हमेशा दावा किया है कि उनकी टिप्पणियां राष्ट्रीय हित में हैं, न कि पार्टी की राजनीति से प्रेरित। उन्होंने कहा, “मैं एक भारतीय के रूप में बोलता हूं, और जब सरकार कुछ अच्छा करती है, तो उसकी तारीफ होनी चाहिए।”

हालांकि, उनकी बार-बार की तारीफ ने यह अटकलें तेज कर दी हैं कि वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। थरूर ने इन अटकलों को खारिज किया है, लेकिन केरल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उनकी टिप्पणियां पार्टी के लिए चुनौती बन सकती हैं।

शशि थरूर की पीएम मोदी को “प्राइम एसेट” बताने वाली टिप्पणी ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर तनाव को उजागर किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की कूटनीतिक सफलता की सराहना करते हुए थरूर ने राष्ट्रीय एकता और प्रभावी संचार पर जोर दिया, लेकिन उनकी टिप्पणियां पार्टी की आलोचनात्मक रुख से मेल नहीं खातीं। भाजपा ने इस अवसर का फायदा उठाकर कांग्रेस पर निशाना साधा, जबकि सोशल मीडिया पर यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। थरूर की यह तारीफ उनके और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाती है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्थिति केरल और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति को कैसे प्रभावित करती है।

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