पटना में वैवाहिक सीजन के दौरान कमर्शियल गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत: अब आवेदन के साथ प्रशासन लेगा आवेदकों का साक्षात्कार।

बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में वैवाहिक सीजन का आगाज होते ही कमर्शियल गैस सिलिंडरों की मांग में जबरदस्त

Apr 18, 2026 - 14:45
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पटना में वैवाहिक सीजन के दौरान कमर्शियल गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत: अब आवेदन के साथ प्रशासन लेगा आवेदकों का साक्षात्कार।
पटना में वैवाहिक सीजन के दौरान कमर्शियल गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत: अब आवेदन के साथ प्रशासन लेगा आवेदकों का साक्षात्कार।
  • शादी के कार्ड और मेहमानों की संख्या की होगी गहन जांच: फर्जीवाड़े और कालाबाजारी रोकने के लिए बिहार प्रशासन ने लागू किए सख्त नियम।
  • कैटरर्स के लिए पंजीकरण हुआ अनिवार्य, आम जनता को भी देने होंगे आधार और गैस बुक के दस्तावेज: एस्मा एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी।

बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में वैवाहिक सीजन का आगाज होते ही कमर्शियल गैस सिलिंडरों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए शादियों और अन्य व्यावसायिक आयोजनों में घरेलू सिलिंडरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे कमर्शियल सिलिंडरों पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति केवल 70 प्रतिशत ही रह गई है। इस भारी कमी को देखते हुए जिला प्रशासन ने वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए साक्षात्कार और दस्तावेजों की भौतिक जांच की व्यवस्था शुरू कर दी है। अब केवल आवेदन करने मात्र से किसी भी व्यक्ति या कैटरर को मनचाहे संख्या में गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, बल्कि वास्तविक जरूरत का सटीक आकलन किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर की जा रही इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य गैस सिलिंडरों के दुरुपयोग और कालाबाजारी पर लगाम लगाना है। एडीएम आपूर्ति द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अब आवेदनकर्ताओं को यह प्रमाणित करना होगा कि उनके आयोजन में वास्तव में कितने मेहमान शामिल हो रहे हैं। इसके लिए शादी का निमंत्रण पत्र यानी वेडिंग कार्ड असली है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) खुद आवेदकों से मुलाकात कर सकते हैं या उनके द्वारा दिए गए तथ्यों की गहराई से जांच करवा सकते हैं। यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की मंशा में खोट पाया जाता है या यह संदेह होता है कि सिलिंडर किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि के लिए लिए जा रहे हैं, तो आवेदन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।

गैस आपूर्ति की वर्तमान राशनिंग व्यवस्था के तहत उपलब्ध स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही निर्धारित क्षेत्रों के लिए आवंटित है। कुल 70 प्रतिशत आपूर्ति में से 20 प्रतिशत हिस्सा शहर के प्रमुख होटलों और रेस्तरां को दिया जा रहा है, जबकि 10 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों के लिए आरक्षित है। विवाह आयोजनों और बड़े कैटरर्स के लिए शेष 10 प्रतिशत कोटे में से ही प्रबंधन करना पड़ रहा है। इसी सीमित कोटे के कारण कालाबाजारी की आशंकाएं प्रबल हो गई थीं। कई मामलों में यह देखा गया कि लोग फर्जी कार्ड छपवाकर या मेहमानों की संख्या को दो से तीन गुना बढ़ाकर दिखा रहे थे ताकि अधिक सिलिंडर प्राप्त कर उन्हें ऊंचे दामों पर बेच सकें। इसी को रोकने के लिए अब पात्रता जांच को अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज जमा कर या प्रशासन को गुमराह कर कमर्शियल सिलिंडर प्राप्त करने की कोशिश करता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा - ESMA) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, जिसमें कारावास और भारी दंड का प्रावधान है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक जरूरतमंदों को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। शादी-ब्याह के घर में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा। आम नागरिकों को, जो स्वयं हलवाई और खान-पान का प्रबंध कर रहे हैं, उन्हें अपने आधार कार्ड की छायाप्रति, मौजूदा गैस कनेक्शन की बुकलेट, विवाह का मूल निमंत्रण पत्र और मेहमानों की एक अनुमानित सूची जमा करनी होगी। इसके अलावा, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलिंडर की वर्तमान कीमत 2,353.50 रुपये तय की गई है, लेकिन इसके साथ ही प्रति सिलिंडर 2400 रुपये की सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) भी जमा करनी पड़ रही है। यह राशि सिलिंडर खाली होने के बाद और उसे गैस एजेंसी को वापस करने पर ही वापस की जाएगी। इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ ने मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

कैटरर्स और होटल संचालकों के लिए भी नए नियम किसी चुनौती से कम नहीं हैं। अब किसी भी कैटरर को गैस सिलिंडर तभी आवंटित किए जाएंगे जब उनके पास जीएसटी पंजीकरण, खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस या एसडीओ कार्यालय से प्राप्त वैध पंजीकरण संख्या होगी। पटना में संचालित होने वाले अधिकांश छोटे कैटरर्स के पास अब तक इस तरह के औपचारिक पंजीकरण नहीं थे, जिसके कारण वे अब कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई कैटरर्स ने इस जटिलता और गैस की कमी का हवाला देकर अपने सर्विस चार्ज और मेन्यू की कीमतों में भी भारी वृद्धि कर दी है। हालांकि, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बातचीत कर कैटरर्स के लिए एक सुलभ समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में प्राप्त आवेदनों की स्थिति देखें तो अब तक लगभग 125 से अधिक लोगों ने वैवाहिक आयोजनों के लिए कमर्शियल गैस की मांग की है। इन आवेदनों को गैस कंपनियों को भेजते समय प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि संख्या का निर्धारण उपलब्धता के आधार पर ही हो। गैस कंपनियों के मार्केटिंग अधिकारियों को भी व्यक्तिगत स्तर पर इन स्थलों और आवेदकों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आपूर्ति व्यवस्था में इस तरह की 'चेक एंड बैलेंस' प्रणाली इसलिए लागू की गई है ताकि किसी एक आयोजन को आवश्यकता से अधिक गैस न मिल जाए और दूसरा पक्ष खाली हाथ रह जाए। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिलिंडर सीधे उसी पते पर डिलिवर हों जहां आयोजन होना है।

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