Sambhal: हर घर में था नीम-बकायन का पेड़, अब कंक्रीट के जंगल में घुट रही सांसें... सम्भल से उठी हरियाली बचाने की आवाज़
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सम्भल में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों ने चिंता जताई और हरियाली बढ़ाने
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सम्भल में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों ने चिंता जताई और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया। बुजुर्गों का कहना है कि एक समय था जब शहर और गांवों में लगभग हर घर के आंगन में नीम, बकायन और अन्य छायादार पेड़ हुआ करते थे, लेकिन अब तेजी से पेड़ों की संख्या घटती जा रही है। इसका असर बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है।
स्थानीय निवासी मोहम्मद साबिर ने बताया कि पहले हर घर में पेड़ होते थे, जिससे वातावरण शुद्ध रहता था और लोगों को ठंडी हवा मिलती थी। लेकिन नई पीढ़ी पेड़ लगाने की बजाय उन्हें कटवा रही है, जिसके कारण हरियाली लगातार कम हो रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जन्मदिन, शादी और अन्य खुशी के अवसरों पर पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। वहीं समाजसेवी सईद अख्तर इसराइली ने कहा कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन, ठंडी हवा और छाया भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से सैकड़ों पौधे लगा चुके हैं और आगे भी यह अभियान जारी रखेंगे। पर्यावरण दिवस पर सम्भल से उठी यह आवाज़ केवल एक अपील नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का संदेश है। क्योंकि अगर आज पेड़ नहीं बचाए गए, तो कल स्वच्छ हवा और हरियाली केवल किताबों और यादों तक सीमित रह जाएगी।
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