पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर मचा भारी हड़कंप, केंद्रीय जांच एजेंसी के हत्थे चढ़ा सत्ताधारी दल का कद्दावर नेता शौकत मोल्ला

पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था के गलियारों से इस समय एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने

Jun 6, 2026 - 12:12
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर मचा भारी हड़कंप, केंद्रीय जांच एजेंसी के हत्थे चढ़ा सत्ताधारी दल का कद्दावर नेता शौकत मोल्ला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर मचा भारी हड़कंप, केंद्रीय जांच एजेंसी के हत्थे चढ़ा सत्ताधारी दल का कद्दावर नेता शौकत मोल्ला
  • दक्षिण 24 परगना के भंगड़ बम विस्फोट मामले में बड़ी कार्रवाई, घंटों तक फरार रहने के बाद आधी रात को दबोचे गए पूर्व विधायक
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पड़ोसी देश भागने की फिराक में था मुख्य साजिशकर्ता, खुफिया इनपुट के आधार पर बिछाया गया जाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून व्यवस्था के गलियारों से इस समय एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य के बेहद संवेदनशील जिले दक्षिण 24 परगना के अंतर्गत आने वाले भंगड़ इलाके में हुए भीषण बम विस्फोट मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बेहद गोपनीय और त्वरित कार्रवाई करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता शौकत मोल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राज्य की सत्ताधारी पार्टी को एक और गहरा राजनीतिक झटका लगा है। लंबे समय से इस मामले में वांछित चल रहे इस नेता की गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं, जिससे क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मी पूरी तरह बढ़ गई है।

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी द्वारा की गई यह कार्रवाई काफी समय से चल रही तफ्तीश का हिस्सा है। दरअसल, यह पूरा विवाद मार्च महीने की शुरुआत में दक्षिण 24 परगना जिले के दक्षिण बामुनिया गांव में हुए एक भीषण कच्चे बम विस्फोट से जुड़ा हुआ है। उस समय एक रिहायशी इलाके में अवैध रूप से बम बनाने का काम चल रहा था, जिसमें अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग बेहद गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस घटना के बाद से ही केंद्रीय एजेंसी पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके पीछे के मुख्य मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई थी, जिसकी कड़ियां सीधे तौर पर इस प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे से जुड़ती हुई दिखाई दे रही थीं। गिरफ्तारी से ठीक कुछ घंटे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस पूर्व विधायक को आधिकारिक तौर पर 'भगोड़ा' घोषित कर दिया था। आरोपी नेता के सभी तीन मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद आ रहे थे, जिसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया इकाइयों को अलर्ट पर रखा गया था। खुफिया इनपुट से यह संकेत मिले थे कि आरोपी नदी के रास्ते भारत-बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर पड़ोसी देश में छिपने की योजना बना रहा था, जिसके चलते सीमा सुरक्षा बल को भी विशेष रूप से सतर्क किया गया था।

जांच एजेंसी की विशेष टीमों ने इस गिरफ्तारी को अंजाम देने से पहले आरोपी के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। जिला पुलिस की मदद और केंद्रीय बलों की सुरक्षा के बीच मौखाली, बारुईपुर और सोनारपुर सहित कुल आठ अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान आरोपी नेता के आवास और पार्टी कार्यालयों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी एकत्र किए गए थे। इस दौरान टीम ने पूर्व विधायक के परिजनों से भी लंबी पूछताछ की थी और उनके बेटे को भी जांच के दायरे में शामिल किया था। गुरुवार को इस मामले में एक और बड़ी कामयाबी तब मिली थी जब उस चार पहिया वाहन के चालक को दबोच लिया गया था, जिसका इस्तेमाल बम बनाने वाले कारीगरों को लाने-ले जाने के लिए किया गया था।

पूरी रात चले इस व्यापक धरपकड़ अभियान के बाद आखिरकार शुक्रवार की देर रात कोलकाता के नजदीकी इलाके चिंगरीघाटा से पूर्व विधायक को उस समय दबोच लिया गया, जब वे एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर भागने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने मोटरसाइकिल चालक को भी हिरासत में ले लिया है, जो इस फरारी में उनकी मदद कर रहा था। हालांकि, आरोपी के पारिवारिक सदस्यों ने जांच एजेंसी के दावों से अलग रुख अपनाते हुए यह बात सामने रखी है कि उनके पिता कहीं भागे नहीं थे, बल्कि वे अपने निजी काम से बाहर गए थे और उन्होंने स्वयं ही एजेंसी के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। परिवार का कहना है कि वे कोलकाता के एक होटल में ठहरे हुए थे और किसी भी तरह की फरारी की बात पूरी तरह निराधार है।

इस कद्दावर नेता की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वे कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2016 और वर्ष 2021 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे थे और हालिया चुनावों में भी वे भंगड़ क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमा रहे थे। क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव और दखल बेहद मजबूत माना जाता है, जिसके कारण वे हमेशा से चर्चाओं में रहे हैं। इस घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस कार्रवाई से ठीक कुछ समय पहले ही राज्य सरकार द्वारा उनकी आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था को अचानक वापस ले लिया गया था, जिसके बाद से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों का उन पर शिकंजा कसना शुरू हो गया था। इस नई गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या अब बढ़कर चार हो गई है।

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