Ballia: बलिया का सुरहा ताल बना भारत का 100 वां रामसर स्थल, प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद चमका अंतरराष्ट्रीय फलक पर
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का कभी ड्रीम प्रोजेक्ट रहे जिले के ऐतिहासिक जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरसा ताल)
Report- Syed Asif Hussain zaidi.
बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का कभी ड्रीम प्रोजेक्ट रहे जिले के ऐतिहासिक जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरसा ताल) को भारत के 100 वें रामसर स्थल के रूप में शुक्रवार को मान्यता मिल गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी औपचारिक घोषणा की। इसी के साथ बलिया का सुरहा ताल अंतरराष्ट्रीय पटल पर रामसर स्थल के रूप में इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में नामित हो गया। यह उपलब्धि भारत की समृद्ध जैव विविधता, पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- क्या है रामसर कनवेंशन
48 साल पहले 2 फरवरी 1971 को रामसर कनवेंशन का गठन दुनिया भर की वेटलैंड (आद्रभूमि) को सुरक्षित-संरक्षित करने के लिए किया गया था। इसमें दुनिया के 170 से ज्यादा देश भागीदार हैं। 2100 से ज्यादा वेटलैंड इसकी सूची में दर्ज हैं, जिनमें भारत के 98 वेटलैंड हैं। वेटलैंड प्रकृति एवं पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये वेट लैंड जल का स्तर बढ़ाने, विविधता के संरक्षण एवं संवर्द्धन के साथ प्रवासी पक्षियों के मौसमी आवास के रूप में भी उपयोगी हैं।.
- प्रदेश सरकार ने केंद्र को भेजा था प्रस्ताव
जश्न-ए-आजादी में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराने वाली महर्षि भृगु की धरती वेटलैंड के मामले में भी काफी समृद्ध है। शहर से लगभग 17 किमी दूर बसंतपुर के पास स्थित सुरहा ताल प्रदेश के बड़े वेटलैंड (आर्द्र भूमि) में से एक है। प्रदेश सरकार आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के संरक्षण को विस्तार देते हुए जिले के सुरहाताल पक्षी विहार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने को प्रयासरत थी। इसी कड़ी में पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित कराने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था।
क्या होंगे फायदे
- रामसर स्थल का दर्जा मिलने से सुरहा ताल की जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को मिलेगी वैश्विक पहचान।
- क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और ईको-टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा बढ़ावा।
- वेटलैंड संरक्षण के प्रयासों को मिलेगा बल।
- बढ़ जाएगी सुरहा ताल की निगरानी जिससे प्रवासी पक्षियों के शिकार पर भी लग सकेगी रोक।
- रोजगार के संसाधनों में भी होगी व्यापक स्तर पर वृद्धि।
अब एक नजर सूबे के सबसे बड़े सुरहा ताल की ओर
सरहा ताल जलीय जीवों के साथ अनेक वनस्पतियों से भी भरा पड़ा है। यहां जैव विविधता का भी भंडार है। सर्दियों में यहां साइबेरियन सहित विभिन्न देशों से आने वाले पक्षियों का जमावड़ा रहता है। वर्ष 1991 से यह पक्षी अभयारण्य आधिकारिक तौर पर 'जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार' के नाम से जाना जाता है। यह प्रदेश के सबसे बड़े ताल में एक है, जो लगभग 24.9 किमी में विस्तृत है। बरसात के दिनों में यह 34.32 वर्ग किमी से 42.32 वर्ग किमी तक भी हो जाता है। गर्मी में जल अधिग्रहण क्षेत्र कम हो जाने से इसका क्षेत्रफल करीब 21 वर्ग किमी रह जाता है। यह ताल लगभग 4.5 किमी की लंबाई और 3.7 किमी की चौड़ाई में है। इसमें वर्ष भर पानी रहता है। यह ताल वर्षों से अप्रत्यक्ष रूप से जिले के कई क्षेत्रों के भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करने के साथ ही सैकड़ों लोगों की आजीविका का आधार बना हुआ है। यहां के जलीय पौधे भूमिगत जल प्रदूषकों को भी अवशोषित कर जल शुद्धिकरण का कार्य करते हैं। इसके चलते इसे बायोलाजिकल सुपर मार्केट कहना भी उचित होगा।
- कृतज्ञ जनता ने पीएम-सीएम के प्रति जताया आभार
बलिया की जनता ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का हृदय से आभार जताया है। यहां के लोगों का मानना है कि यह सम्मान हमारे जिले को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और स्थानीय विकास के नए अवसर भी प्रदान करेगा। गर्व है कि बलिया का सुरहा ताल आज भारत के 100वें रामसर स्थल के रूप में विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।
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