महा शनि जयंती के पावन पर्व से ठीक पहले देश की राजधानी में बड़ी कार्रवाई, प्राचीन मंदिर से चोरी हुई भगवान शनिदेव की पवित्र मूर्ति बरामद।
देश की राजधानी दिल्ली में महा शनि जयंती के पावन और बेहद पवित्र त्योहार से ठीक पहले एक ऐसी घटना सामने आई
- दिल्ली के कबाड़ बाजार में कौड़ियों के भाव बेची जा रही थी सदियों पुरानी आस्था, सतर्क पुलिस टीम ने शातिर चोर को दबोचा
- धार्मिक उत्सव से पूर्व आस्था के केंद्र पर लगा बड़ा दाग धुला, सुरक्षा व्यवस्था और चोरों के नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों ने कसा शिकंजा
देश की राजधानी दिल्ली में महा शनि जयंती के पावन और बेहद पवित्र त्योहार से ठीक पहले एक ऐसी घटना सामने आई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। दिल्ली के एक ऐतिहासिक और बेहद प्रतिष्ठित मंदिर से कुछ दिनों पहले न्याय के देवता माने जाने वाले भगवान शनिदेव की एक बेहद प्राचीन और बहुमूल्य मूर्ति रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई थी। इस घटना के बाद से ही स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के बीच भारी आक्रोश और गहरी निराशा का माहौल बना हुआ था। आगामी त्योहार की तैयारियों के बीच इस तरह की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस की एक विशेष खोजी टीम ने बेहद मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लेते हुए इस मामले में एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने न केवल मूर्ति को सुरक्षित बरामद कर लिया है, बल्कि इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले शातिर चोर को भी रंगे हाथों गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई है।
इस पूरी वारदात की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि इस बात की गवाही देते हैं कि चंद रुपयों के लालच में लोग किस हद तक गिर सकते हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था की ढील का फायदा उठाकर इस बेहद पवित्र मूर्ति को वहां से चुराया था। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह रही कि करोड़ों लोगों की अगाध श्रद्धा के केंद्र भगवान शनिदेव की इस प्राचीन मूर्ति को आरोपी ने दिल्ली के कबाड़ बाजार में ले जाकर एक कबाड़ कारोबारी को मात्र 3,800 रुपये की बेहद मामूली रकम में बेच दिया था। चोर को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस मूर्ति को वह साधारण धातु का टुकड़ा समझकर कौड़ियों के भाव बेच रहा है, उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कीमत अनमोल है। कबाड़ कारोबारी भी इस मामले में पुलिस की रडार पर आ गया है जिसने बिना किसी जांच-पड़ताल के इस पवित्र मूर्ति को खरीद लिया था। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित प्राचीन मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि त्योहारों के सीजन में जब मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ और हलचल बढ़ जाती है, तो असामाजिक तत्व और चोर गिरोह बेहद सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और सुरक्षा गार्डों की तैनाती को अनिवार्य बनाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस हाई-प्रोफाइल चोरी की गुत्थी को सुलझाने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कई विशेष टीमों का गठन किया था। चूंकि महा शनि जयंती का पर्व बेहद नजदीक था, इसलिए पुलिस के ऊपर इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का भारी दबाव भी था। जांच टीम ने सबसे पहले मंदिर परिसर और उसके आसपास के रास्तों पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति की धुंधली सी तस्वीर दिखाई दी जो देर रात मंदिर की दीवार फांदकर भीतर घुसता हुआ और कुछ देर बाद एक भारी झोले के साथ बाहर निकलता हुआ नजर आ रहा था। इसके बाद पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और उस संदिग्ध के हुलिए के आधार पर दिल्ली के विभिन्न कबाड़ बाजारों और पुरानी धातुओं के व्यापारियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी, जिसके बाद आखिरकार सफलता हाथ लगी।
पकड़े गए आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है और पुलिस को अंदेशा है कि वह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय किसी बड़े मूर्ति चोर गिरोह का हिस्सा हो सकता है। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला है कि आरोपी नशे की लत को पूरा करने और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए छोटी-मोटी चोरियां करता रहता था, लेकिन इस बार उसने सीधे तौर पर लोगों की धार्मिक भावनाओं पर चोट करने का दुस्साहस किया। पुलिस अब इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इस चोरी के पीछे किसी ऐसे सिंडिकेट का हाथ तो नहीं है जो प्राचीन और ऐतिहासिक मूर्तियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्करी के जरिए ऊंचे दामों पर बेचने का काम करता है। कबाड़ बाजार के उस दुकानदार से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है जिसने इस चोरी की मूर्ति को छुपाकर अपने गोदाम में रखा हुआ था।
जैसे ही पुलिस द्वारा मूर्ति की सुरक्षित बरामदगी और चोर की गिरफ्तारी की खबर इलाके में फैली, स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सदस्यों ने राहत की गहरी सांस ली। महा शनि जयंती के उत्सव से ठीक पहले भगवान की मूर्ति का वापस मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने पुलिस टीम की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जमकर सराहना की है और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है। इलाके में जो तनाव और असंतोष का माहौल बन रहा था, वह अब पूरी तरह से भक्तिमय उत्सव में तब्दील हो चुका है। मंदिर परिसर को अब आगामी जयंती के लिए बेहद भव्य तरीके से सजाया जा रहा है और मूर्ति को पुनः पूरे विधि-विधान, शुद्धिकरण और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उसके मूल स्थान पर प्रतिष्ठित करने की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।
यह घटना देश के सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ा सबक भी देती है। राजधानी के कई इलाकों में स्थित छोटे और मध्यम स्तर के मंदिरों में अक्सर रात के समय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते हैं, जिसका फायदा ऐसे अपराधी आसानी से उठा लेते हैं। पुलिस प्रशासन ने इस घटना के बाद स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स और मंदिर कमेटियों के साथ एक आवश्यक बैठक भी बुलाई है, जिसमें यह निर्देश दिए गए हैं कि सभी धार्मिक स्थलों पर उच्च गुणवत्ता वाले नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और रात के समय कम से कम दो सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लगाई जाए। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस गश्त को भी त्योहारों के मद्देनजर धार्मिक स्थलों के आसपास काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व दोबारा ऐसी हिमाकत न कर सके।
अदालती प्रक्रिया के तहत पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया है जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में एक बेहद मजबूत चार्जशीट तैयार कर रही है ताकि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए कि किसी की धार्मिक आस्था और धरोहरों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दिल्ली का कबाड़ बाजार जहां अक्सर चोरी का सामान खपाया जाता है, वहां भी अब पुलिस की पैनी नजर है और सभी दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति संदिग्ध रूप से धातु की मूर्तियां या धार्मिक वस्तुएं बेचने आता है, तो उसकी सूचना तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दी जाए।
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