हाई-प्रोफाइल फिल्म 'धुरंधर-2' की डिजिटल रिलीज को लेकर चल रहा कानूनी गतिरोध समाप्त, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनाया बड़ा फैसला।

मनोरंजन जगत और डिजिटल स्ट्रीमिंग के क्षेत्र से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले काफी समय से

May 16, 2026 - 14:26
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हाई-प्रोफाइल फिल्म 'धुरंधर-2' की डिजिटल रिलीज को लेकर चल रहा कानूनी गतिरोध समाप्त, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनाया बड़ा फैसला।
हाई-प्रोफाइल फिल्म 'धुरंधर-2' की डिजिटल रिलीज को लेकर चल रहा कानूनी गतिरोध समाप्त, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनाया बड़ा फैसला।
  • कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े दावों को अदालत ने किया खारिज, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को मिली हरी झंडी
  • सिनेमा प्रेमियों और ओटीटी दर्शकों का इंतजार हुआ खत्म, कानूनी बाधाएं हटने के बाद अब तय समय पर डिजिटल पटल पर रिलीज होगी फिल्म

मनोरंजन जगत और डिजिटल स्ट्रीमिंग के क्षेत्र से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले काफी समय से गंभीर कानूनी दांव-पेंचों और कॉपीराइट के पेचीदा विवाद में फंसी बहुप्रतीक्षित एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'धुरंधर-2' की डिजिटल रिलीज का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है। देश की राजधानी में स्थित दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस बहुचर्चित मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को गहराई से सुनने के बाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने फिल्म की ओटीटी रिलीज पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को पूरी तरह से आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। इस न्यायिक आदेश के बाद फिल्म के निर्माताओं, वितरकों और संबंधित स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने राहत की गहरी सांस ली है। इस फैसले ने न केवल इस विशिष्ट फिल्म के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर फिल्मों के प्रसारण अधिकारों को लेकर एक नई और स्पष्ट कानूनी नजीर भी पेश की है।

इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म की मूल कहानी, उसके किरदारों की रूपरेखा और पटकथा से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) के इर्द-गिर्द बुनी गई थीं। दरअसल, एक क्षेत्रीय फिल्म निर्माण कंपनी और कुछ स्वतंत्र लेखकों ने यह दावा करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि 'धुरंधर-2' के निर्माताओं ने उनकी पूर्व में पंजीकृत कहानी और वैचारिक कथानक को बिना अनुमति के चुराया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और पटकथा के कई महत्वपूर्ण हिस्से उनके मौलिक काम की हूबहू नकल हैं, जो कॉपीराइट अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने अदालत से यह अंतरिम गुहार लगाई थी कि जब तक इस चोरी की विस्तृत और मुकम्मल जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक फिल्म के किसी भी प्रकार के डिजिटल या सैटेलाइट प्रसारण पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए ताकि उनके व्यावसायिक हितों को नुकसान न पहुंचे। डिजिटल युग में फिल्मों के ओटीटी अधिकार और कॉपीराइट विवाद बेहद आम हो गए हैं। सिनेमाघरों में रिलीज के बाद जब कोई बड़ी फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के लिए तैयार होती है, तो उसके व्यावसायिक मूल्य में भारी इजाफा हो जाता है। ऐसे समय में कानूनी अड़चनें न केवल निर्माताओं के करोड़ों रुपये दांव पर लगा देती हैं, बल्कि स्ट्रीमिंग पार्टनर्स के तय शेड्यूल और साख को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल पीठ के समक्ष हुई इस मैराथन सुनवाई के दौरान प्रतिवादी यानी 'धुरंधर-2' के निर्माताओं के कानूनी सलाहकारों ने बेहद मजबूत और अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को विस्तार से समझाया कि फिल्म की कहानी पूरी तरह से मौलिक है और इसका विकास कई वर्षों की कड़े शोध और रचनात्मक लेखन प्रक्रिया के बाद किया गया है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दोनों कहानियों का एक तुलनात्मक विवरण भी बेंच के सामने रखा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों के बीच कोई सीधा जुड़ाव या साहित्यिक चोरी का मामला नहीं बनता है। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए माना कि महज कुछ सामान्य विचारों या प्रवृत्तियों की समानता के आधार पर किसी भी फिल्म की रिलीज पर अंतिम समय में प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि इससे कलात्मक स्वतंत्रता और भारी वित्तीय निवेश को अपूरणीय क्षति पहुंचती है।

अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में इस बात को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा कि फिल्म पहले ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है और उस समय याचिकाकर्ताओं की ओर से इस प्रकार का कोई कड़ा विरोध या स्थगन आदेश प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया गया था। न्यायपीठ ने टिप्पणी की कि जब कोई फिल्म बड़े पैमाने पर सार्वजनिक डोमेन में आ जाती है और उसके बाद केवल उसके डिजिटल संस्करण को रोकने के लिए याचिका दायर की जाती है, तो उसके पीछे की मंशा पर संदेह होना स्वाभाविक है। उच्च न्यायालय ने साफ किया कि बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग किसी भी वैध व्यावसायिक समझौते को बाधित करने या ब्लैकमेलिंग के टूल के रूप में नहीं किया जा सकता। इस तार्किक रुख ने वादी पक्ष के उन सभी दावों की हवा निकाल दी जिसके दम पर वे फिल्म की रिलीज को अधर में लटकाना चाहते थे।

इस बड़े अदालती फैसले के तुरंत बाद फिल्म के मुख्य अभिनेताओं, निर्देशक और तकनीकी टीम के सदस्यों ने अपनी खुशी और संतोष व्यक्त किया है। फिल्म की स्टारकास्ट ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों के माध्यम से न्यायपालिका के प्रति अपना आभार जताया है। 'धुरंधर-2' एक बहुत बड़े बजट की फिल्म है जिसमें हाई-ऑक्टेन एक्शन दृश्यों के साथ-साथ बेहतरीन विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है। थिएटर में इसे दर्शकों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन इसके बाद से ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसके आगमन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर इस तरह की फिल्मों को एक बहुत बड़ा और विविध दर्शक वर्ग मिलता है, जो थियेटर तक नहीं पहुंच पाता है, इसलिए ओटीटी रिलीज उनके लिए व्यावसायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण कड़ी है।

कानूनी अड़चनें पूरी तरह दूर होने के बाद अब संबंधित स्ट्रीमिंग कंपनी ने भी फिल्म के डिजिटल प्रीमियर की नई तारीखों की घोषणा के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पहले यह फिल्म पिछले महीने ही स्ट्रीम होने वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर आए कानूनी नोटिस के कारण प्लेटफॉर्म को अपनी प्रोग्रामिंग सूची से इसे अस्थाई रूप से हटाना पड़ा था। अब कूटनीतिक और कानूनी जीत के बाद, फिल्म को मल्टी-लैंग्वेज यानी हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी डब करके वैश्विक स्तर पर एक साथ रिलीज किया जाएगा। इस रणनीति से फिल्म के न केवल व्यूअरशिप रिकॉर्ड्स में भारी उछाल आने की उम्मीद है, बल्कि इससे निर्माताओं को होने वाली कमाई का ग्राफ भी काफी मजबूत होगा।

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