मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन- 200 गाड़ियों का काफिला निकालने वाले सौभाग्य सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार निलंबित।
मध्य प्रदेश की राजनीति में सादगी और अनुशासन का कड़ा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया
- प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील की अनदेखी पड़ी भारी, पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को थमाया गया कारण बताओ नोटिस
- अनुशासनहीनता और फिजूलखर्ची पर 'जीरो टॉलरेंस', मध्य प्रदेश सरकार ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए कार्यालय प्रवेश पर लगाई रोक
मध्य प्रदेश की राजनीति में सादगी और अनुशासन का कड़ा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। हाल ही में नियुक्त किए गए एक वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा शक्ति प्रदर्शन के उद्देश्य से निकाले गए विशाल काफिले ने न केवल आम जनता को असुविधा पहुंचाई, बल्कि सरकार की नीतियों के खिलाफ भी एक नकारात्मक संदेश दिया, जिस पर अब मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर के खिलाफ एक अत्यंत सख्त आदेश जारी किया। यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई है जिसमें सौभाग्य सिंह ने पदभार ग्रहण करने के लिए उज्जैन से भोपाल तक लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा 200 से अधिक वाहनों के विशाल काफिले के साथ तय की थी। मुख्यमंत्री ने इस कृत्य को सार्वजनिक जीवन में अनुशासनहीनता और राष्ट्रीय संसाधनों का घोर अपव्यय मानते हुए सौभाग्य सिंह के तमाम प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को तत्काल प्रभाव से छीन लिया है। सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी होने तक वे किसी भी प्रकार के आधिकारिक निर्णय लेने या सरकारी संसाधनों का उपयोग करने के पात्र नहीं होंगे।
इस पूरे विवाद की जड़ में वह विशाल मोटरकेड है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया था। सौभाग्य सिंह ठाकुर को हाल ही में मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। पदभार संभालने की खुशी में उनके समर्थकों ने सैकड़ों एसयूवी और अन्य वाहनों का काफिला तैयार किया, जो सड़क पर कई किलोमीटर तक फैला नजर आया। इस काफिले के कारण न केवल नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित हुआ, बल्कि राहगीरों को भी घंटों जाम का सामना करना पड़ा। वीडियो में देखा जा सकता था कि गाड़ियों की लंबी कतारों के साथ समर्थक नारेबाजी कर रहे थे, जिसे सरकार ने एक लोक सेवक की गरिमा के प्रतिकूल माना है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह घटना उस समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय कारणों से देशवासियों से पेट्रोलियम पदार्थों की बचत और सादगीपूर्ण जीवन अपनाने की विशेष अपील की थी। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने और ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देने का आह्वान किया था। ऐसे संवेदनशील समय में एक सरकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा सैकड़ों गाड़ियों का पेट्रोल-डीजल फूंकते हुए शक्ति प्रदर्शन करना प्रधानमंत्री की अपील का सीधा उल्लंघन माना गया। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि जब शीर्ष नेतृत्व सादगी की बात कर रहा है, तब इस तरह का प्रदर्शन कतई स्वीकार्य नहीं है। सौभाग्य सिंह ठाकुर पर की गई कार्रवाई के तहत अब वे अगले आदेश तक पाठ्यपुस्तक निगम के कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें आवंटित सरकारी वाहन, कर्मचारी, टेलीफोन और कार्यालय की अन्य सुविधाएं भी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए संदेश दिया है कि उनकी सरकार में 'वीआईपी कल्चर' और जनता के पैसे की बर्बादी के लिए कोई स्थान नहीं है। सौभाग्य सिंह को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनकी नियुक्ति को स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाए। नोटिस में यह भी लिखा गया है कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए आपसे जवाबदेही और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना की अपेक्षा की जाती है, जिसका इस रैली के दौरान पूर्णतः अभाव दिखा। मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश ने राज्य के अन्य नेताओं और अधिकारियों के बीच भी एक चेतावनी का कार्य किया है।
इस घटना के बाद राज्य की विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार को घेरने का प्रयास किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई ने विपक्ष के हमलों की धार को कुंद कर दिया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो, यदि वह शासन की सादगी नीति और सार्वजनिक अनुशासन को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी संकोच के कार्रवाई की जाएगी। पाठ्यपुस्तक निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान, जिसका सीधा संबंध बच्चों की शिक्षा और संसाधनों से है, वहां के प्रमुख द्वारा इस तरह का व्यवहार एक गलत मिसाल पेश कर रहा था, जिसे समय रहते सुधारने का प्रयास किया गया है। प्रशासनिक जांच के दौरान अब यह देखा जाएगा कि इस रैली के लिए किन संसाधनों का उपयोग किया गया और क्या इसमें किसी भी प्रकार के सरकारी तंत्र का दुरुपयोग हुआ था। जब तक सौभाग्य सिंह का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तब तक निगम के सभी कामकाज किसी अन्य अधिकारी द्वारा संभाले जाएंगे। पाठ्यपुस्तक निगम के दैनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न हो सके। राज्य सरकार ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया है कि आगामी नियुक्तियों में भी सादगी और शालीनता के मानदंडों का कड़ाई से पालन किया जाए।
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