बाबा केदार के जयकारों से गूँज उठा हिमालय: 51 क्विंटल फूलों से सजी देवभूमि, आज खुले केदारनाथ धाम के कपाट।
हिमालय की गोद में स्थित भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज, 22 अप्रैल 2026 को सुबह ठीक 8:00 बजे
- श्रद्धालुओं का इंतजार हुआ खत्म: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खुले विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर के द्वार, साक्षी बने सीएम धामी
- आस्था का महाकुंभ शुरू: भारी बर्फबारी और ठंड के बीच बाबा केदार के दर्शन को उमड़े हजारों भक्त, भक्ति के रंग में रंगा केदारनाथ
हिमालय की गोद में स्थित भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज, 22 अप्रैल 2026 को सुबह ठीक 8:00 बजे ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों, पारंपरिक पूजा-अर्चना और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर मुख्य पुजारी (रावल) और मंदिर समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में मुख्य द्वार के ताले खोले गए, जिसके बाद पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय बाबा केदार' के जयकारों से गूँज उठा। मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही हजारों श्रद्धालु धाम में पहुँच चुके थे और भीषण ठंड व बर्फबारी के बावजूद उनकी आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह की पहली किरण के साथ जब मंदिर के द्वार खुले, तो भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक पल को और भी भव्य बनाने के लिए केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे और अन्य सुगंधित फूलों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। फूलों की इस सजावट ने मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगा दिए और पूरे केदारनाथ क्षेत्र को एक दिव्य स्वरूप प्रदान किया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए यह नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं था। मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने पिछले कई दिनों से इस सजावट की तैयारी की थी, ताकि जब बाबा के भक्त उनके द्वार पर पहुँचें, तो उन्हें एक भव्य और स्वागत योग्य वातावरण मिल सके। फूलों की महक और शंखध्वनि ने वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक बना दिया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस पुनीत अवसर के साक्षी बने। वे अपनी पत्नी गीता धामी के साथ सुबह-सुबह केदारनाथ धाम पहुँचे और मंदिर के कपाट खुलने की पूरी प्रक्रिया में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कपाट खुलने के तुरंत बाद भगवान केदारनाथ के दर्शन किए और राज्य की खुशहाली, सुख-समृद्धि तथा चारधाम यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की। दर्शन के उपरांत उन्होंने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए, क्योंकि इस बार रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों के आने की संभावना है। केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए इस साल डिजिटल पंजीकरण और टोकन सिस्टम को अनिवार्य बनाया गया है। मंदिर समिति के अनुसार, कपाट खुलने के पहले ही दिन हजारों की संख्या में लोगों ने दर्शन किए। प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं और रहने की व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया है, क्योंकि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और ठंड एक बड़ी चुनौती होती है। धाम के पैदल मार्ग पर भी एसडीआरएफ और पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि यात्रा सुचारू रूप से चल सके।
कपाट खुलने के साथ ही बाबा केदार की पंचमुखी डोली जो अपने शीतकालीन निवास उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर केदारनाथ पहुँची थी, उसे मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया। डोली के धाम पहुँचने पर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया था। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि हर साल महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर घोषित की जाती है और पंचांग गणना के अनुसार अक्षय तृतीया के आसपास का समय इसके लिए चुना जाता है। छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद जब कपाट खुलते हैं, तो यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी एक नई शुरुआत लेकर आता है। इस साल चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कपाट खुलने से पहले ही लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। अकेले केदारनाथ धाम के लिए ही करीब 6.5 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। मंदिर समिति ने बताया कि कपाट खुलने के पहले दिन श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए गए। मंदिर के भीतर अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। पहाड़ी चोटियों पर जमी सफेद बर्फ और उस पर मंदिर की रंग-बिरंगी फूलों वाली सजावट एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रही थी, जिसे भक्त अपने कैमरों और यादों में कैद कर रहे थे।
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