अक्षय तृतीया पर सोने की ऐतिहासिक चमक: एक साल में निवेशकों को मिला 60% का रिकॉर्ड तोड़ रिटर्न।

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भारतीय बाजारों में सोने की चमक इस बार सामान्य से कहीं अधिक तेज नजर आ रही है। निवेश के दृष्टिकोण

Apr 17, 2026 - 14:18
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अक्षय तृतीया पर सोने की ऐतिहासिक चमक: एक साल में निवेशकों को मिला 60% का रिकॉर्ड तोड़ रिटर्न।
अक्षय तृतीया पर सोने की ऐतिहासिक चमक: एक साल में निवेशकों को मिला 60% का रिकॉर्ड तोड़ रिटर्न।
  • निवेश का नया कीर्तिमान: पिछली अक्षय तृतीया से अब तक सोने की कीमतों में आया सबसे बड़ा उछाल
  • सोना हुआ बेमिसाल: वैश्विक अस्थिरता और बढ़ती मांग के बीच पीली धातु ने साबित की अपनी बादशाहत

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भारतीय बाजारों में सोने की चमक इस बार सामान्य से कहीं अधिक तेज नजर आ रही है। निवेश के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पिछले एक साल के दौरान सोने ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। वित्तीय आंकड़ों और बाजार के विश्लेषण के अनुसार, पिछली अक्षय तृतीया से लेकर इस साल की अक्षय तृतीया तक सोने की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह मुनाफा किसी भी अन्य पारंपरिक निवेश माध्यम जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर बाजार या रियल एस्टेट की तुलना में काफी अधिक है। अक्षय तृतीया को भारत में सोना खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है, लेकिन इस बार की खरीदारी केवल धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ठोस वित्तीय निर्णय के रूप में भी उभरी है, क्योंकि सोने ने खुद को सबसे सुरक्षित और लाभदायक एसेट क्लास साबित किया है।

पिछले एक साल के सफर पर नजर डालें तो सोने की कीमतों में आई यह तेजी वैश्विक और घरेलू दोनों कारणों का परिणाम है। अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में सोने के भाव जमीन से आसमान पर पहुँच गए हैं। जहाँ पिछली बार कीमतें 60,000 से 62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) के दायरे में थीं, वहीं इस साल यह आंकड़ा 95,000 रुपये के स्तर को पार कर गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर मध्य पूर्व और यूरोप में जारी अनिश्चितताओं ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को बढ़ाया है। जब-जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का माहौल बनता है, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर सोने की ओर रुख करते हैं। इसी का नतीजा है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं, जिसका सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर पड़ा है।

केंद्रीय बैंकों की रणनीति ने भी इस मूल्य वृद्धि में ईंधन का काम किया है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी शामिल है, अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी को लगातार बढ़ा रहे हैं। डॉलर की मजबूती के बावजूद सोने की मांग में कमी न आना इस बात का संकेत है कि देश अब अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पीली धातु पर भरोसा कर रहे हैं। पिछले बारह महीनों में चीन और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों में सोने के आयात और केंद्रीय खरीद में भारी इजाफा हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच के इस असंतुलन ने कीमतों को 60 प्रतिशत की ऊंचाई तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे आम आदमी के लिए सोना खरीदना अब एक चुनौतीपूर्ण लेकिन फायदेमंद निवेश बन गया है। यदि किसी निवेशक ने पिछली अक्षय तृतीया पर 1 लाख रुपये का सोना खरीदा था, तो आज उसकी कीमत बढ़कर लगभग 1.60 लाख रुपये हो गई है। यह वृद्धि दर पिछले दो दशकों में अक्षय तृतीया से अक्षय तृतीया के बीच देखी गई सबसे ऊंची दरों में से एक है। भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी इस दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बावजूद अक्षय तृतीया पर आभूषणों और सिक्कों की मांग में भारी कमी नहीं आई है। हालांकि, लोग अब भौतिक सोने के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। डिजिटल माध्यमों ने सोने में निवेश को और अधिक सुलभ और सुरक्षित बना दिया है। शादियों के सीजन और त्योहारों की मांग ने घरेलू बाजार को मजबूती प्रदान की है। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि उच्च कीमतों के कारण लोग अब कम वजन वाले लेकिन उच्च शुद्धता वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि भारतीय समाज में सोने का महत्व केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत स्तंभ के रूप में बना हुआ है।

मुद्रास्फीति यानी महंगाई के खिलाफ सोने का प्रदर्शन हमेशा से ही शानदार रहा है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई ने मुद्रा की क्रय शक्ति को कम किया है, ऐसी स्थिति में सोने ने एक 'हेज' के रूप में काम किया है। जब कागजी मुद्रा की वैल्यू गिरती है, तो सोने की आंतरिक कीमत बढ़ जाती है। पिछले एक साल में रुपये की विनिमय दर में आए उतार-चढ़ाव ने भी स्थानीय स्तर पर सोने को और महंगा बना दिया है। आयात शुल्क और अन्य करों के बावजूद सोने के प्रति आकर्षण कम नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का तर्क है कि जिस तरह से वैश्विक ऋण संकट बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाले समय में सोने की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। निवेशकों के लिए यह 60 प्रतिशत का मुनाफा केवल एक शुरुआत हो सकता है, क्योंकि बाजार अभी भी बुलिश ट्रेंड में बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर देखें तो सोने ने कई महत्वपूर्ण 'रेसिस्टेंस' स्तरों को पार कर लिया है। बाजार के विश्लेषक बताते हैं कि 2026 की पहली तिमाही में सोने के भाव में जो उछाल आया है, वह पिछले दस वर्षों के संचयी लाभ को मात दे रहा है। अक्षय तृतीया के दिन बाजारों में भीड़ और डिजिटल ट्रांजेक्शन के आंकड़े यह बताते हैं कि लोगों ने सोने को 'कल के लिए बचत' का सबसे बेहतर जरिया मान लिया है। कई वित्तीय सलाहकार अब पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी को 10-15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20-25 प्रतिशत करने की सलाह दे रहे हैं। यह सलाह पिछले एक साल के शानदार रिटर्न को ध्यान में रखकर दी जा रही है। सोने की यह तेजी यह भी बताती है कि तकनीक और क्रिप्टो करेंसी के दौर में भी 'ओल्ड इज गोल्ड' की कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है।

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