डंबल छोड़ हाथ में ली माला: मुंबई में जिम ट्रेनर से 'फर्जी बाबा' बने शख्स का भंडाफोड़, पुलिस ने दबोचा।
सपनों के शहर मुंबई से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज में फैली अंधश्रद्धा और अपराध के गठजोड़ को एक
- आस्था के नाम पर खिलवाड़: असाध्य रोगों को ठीक करने का दावा कर लाखों की ठगी करने वाला ढोंगी बाबा गिरफ्तार
- सेहत बनाने वाला बना लुटेरा: अंधेरी में चमत्कारी इलाज का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाले जिम ट्रेनर की खुली पोल
सपनों के शहर मुंबई से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज में फैली अंधश्रद्धा और अपराध के गठजोड़ को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है। मुंबई पुलिस ने अंधेरी इलाके से एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो पहले एक पेशेवर जिम ट्रेनर के रूप में काम करता था, लेकिन अधिक पैसा कमाने के लालच में उसने खुद को एक सिद्ध 'बाबा' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। आरोपी ने अपनी कद-काठी और बोलने के लहजे का फायदा उठाते हुए मासूम और लाचार लोगों को अपना निशाना बनाया। पुलिस के अनुसार, यह शख्स पिछले काफी समय से लोगों को गंभीर बीमारियों और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल रहा था। इस गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब लोगों की धार्मिक आस्था और मजबूरी को अपना हथियार बना रहे हैं। मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी जिम में आने वाले क्लाइंट्स की कमजोरियों को भांपने में माहिर था। उसने धीरे-धीरे जिम की नौकरी छोड़ दी और खुद को एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रचारित करना शुरू किया। उसने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह अफवाह फैलाई कि उसके पास ऐसी दिव्य शक्तियां हैं, जिनसे वह कैंसर, मधुमेह और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का जड़ से इलाज कर सकता है। आरोपी ने एक छोटा सा आश्रम जैसा ठिकाना भी बना लिया था, जहाँ वह विशेष अनुष्ठान और 'चमत्कारी' भभूत देने के नाम पर लोगों से भारी भरकम फीस लेता था। उसके जाल में केवल अनपढ़ लोग ही नहीं, बल्कि कई पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी फंस गए थे, जो अपनी समस्याओं का तुरंत समाधान चाहते थे।
धोखाधड़ी का यह खेल तब तक चलता रहा जब तक कि एक पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर पुलिस से संपर्क नहीं किया। उस पीड़ित व्यक्ति ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके परिवार का एक सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, जिसका फायदा उठाते हुए इस फर्जी बाबा ने कई चरणों में उससे लाखों रुपये ठग लिए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और आरोपी ने और अधिक पैसों की मांग की, तो पीड़ित को संदेह हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया और एक डमी ग्राहक भेजकर आरोपी की गतिविधियों की निगरानी की। जब यह पुष्टि हो गई कि वह किसी भी प्रकार की चिकित्सा या आध्यात्मिक शक्ति के बजाय केवल धोखाधड़ी कर रहा है, तो उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी गंभीर बीमारी के लिए केवल प्रमाणित डॉक्टरों और अस्पतालों पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति के पास ऐसी कोई जादुई शक्ति नहीं है जो वैज्ञानिक चिकित्सा के बिना रोगों को ठीक कर सके। आस्था और विश्वास के नाम पर अज्ञात लोगों को पैसा देना जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपी जिम ट्रेनर होने के कारण मानव शरीर की कार्यप्रणाली के बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान रखता था, जिसका उपयोग वह लोगों को डराने और प्रभावित करने के लिए करता था। वह लोगों को बताता था कि उनके शरीर पर किसी 'नकारात्मक ऊर्जा' का साया है और इसे हटाने के लिए महंगे 'हवन' की आवश्यकता है। उसने अपनी जीवनशैली को पूरी तरह से बदल लिया था और एक साधु का चोला ओढ़ लिया था ताकि कोई उसे पहचान न सके। पुलिस को उसके पास से कई मोबाइल फोन, जाली दस्तावेज और भारी मात्रा में नकदी भी मिली है, जो उसने ठगी के जरिए इकट्ठा की थी। पुलिस अब उन सभी खातों की जांच कर रही है जिनमें ठगी की रकम जमा की गई थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून के प्रावधान शामिल हैं। इस तरह के अपराधों में सजा सख्त होती है क्योंकि यह न केवल आर्थिक क्षति पहुँचाते हैं, बल्कि पीड़ित के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। कई बार लोग इन फर्जी बाबाओं के चक्कर में पड़कर अस्पताल का इलाज छोड़ देते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है। पुलिस अब इस मामले को फास्ट ट्रैक पर ले जाने की तैयारी कर रही है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश भेजा जा सके और भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इस तरह का साहस न कर सके। इस घटना ने उन लोगों के बीच भी दहशत पैदा कर दी है जो जिम या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे व्यक्तियों से मिलते हैं। आरोपी ने अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल करके ही अपना शुरुआती 'क्लाइंट बेस' बनाया था। वह लोगों का विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में छोटी-छोटी बातें सही बताता था और फिर उन्हें बड़े वित्तीय नुकसान की ओर ले जाता था। मुंबई पुलिस का मानना है कि इस गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं जो लोगों को ढूंढकर इस फर्जी बाबा के पास लाते थे। पुलिस अब कॉल डेटा रिकॉर्ड्स के जरिए उन बिचौलियों की तलाश कर रही है जो कमीशन के लालच में लोगों को इस जाल में फंसाने का काम करते थे।
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