Delhi Blast : दिल्ली धमाके में बचने वाली महिला की दर्दनाक गवाही-  ‘मैं चिल्लाते-भागते, गुरुद्वारे में छिपी, शरीर के टुकड़े जैन मंदिर तक पहुंचे’

बैग बेचने वाली इस महिला द्वारा बताई आपबीती ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक-स्थान हादसों में कितना भयावह क्षति-चक्र सामने आ सकता है: दुकानें, दुकानदा

By INA News Desk
Nov 11, 2025 - 23:20
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Delhi Blast : दिल्ली धमाके में बचने वाली महिला की दर्दनाक गवाही-  ‘मैं चिल्लाते-भागते, गुरुद्वारे में छिपी, शरीर के टुकड़े जैन मंदिर तक पहुंचे’
Delhi Blast : दिल्ली धमाके में बचने वाली महिला की दर्दनाक गवाही-  ‘मैं चिल्लाते-भागते, गुरुद्वारे में छिपी, शरीर के टुकड़े जैन मंदिर तक पहुंचे’
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नई दिल्ली : राजधानी के पुराने शहर स्थित लाल किला के पास सोमवार शाम लगे आतंकवादी हमला का गवाह बनने वाली एक बैग बेचने वाली महिला ने अपनी भयावह रात की कहानी सुनाई है। विस्फोट हुआ लगभग शाम 6 52 बजे, जब एक सफेद रंग की Hyundai i20 कार लाल बत्ती पर रुकी थी और अचानक उसमें भयंकर धमाका हो गया था। इस धमाके ने न सिर्फ कई जानें लीं बल्कि मृतकों-घायलों के पीछे बेहिसाब दर्द और त्रासदी छोड़ी है।

इस महिला ने बताया कि वह उस समय अपने बैगों के स्टाल पर सामान सजाने में लगी थी और अचानक जोरदार धमाके की आवाज-रोशनी ने उसे страх में डाल दिया। “मैं चिल्लाती हुई भागी”, उसने कहा, “नीचे कार फट पड़ी और हमारे आसपास कारें तथा रिक्शा जलने लग गए। कई लोगों के शरीर के टुकड़े मैं-ही-मैं दारू-दाम होते-देखी। मैं गुरुद्वारे की ओर भागी और वहाँ छिप गयी।” witnesses ने यह भी बताया कि हास्पिटल मुकाम पर ले जाते-ल जाते एक इंसान का हाथ-पैर वहाँ-उधर बिखरा मिला था और “जैन मंदिर तक शरीर-टुकड़े उड़कर पहुँचे थे”।

उसने बताया कि धमाके के तुरंत बाद न केवल आग लगी बल्कि धुंआ इतना ऊँचा उठा कि आसपास की दुकानों-गली-मंडी तक धुंए से घिर गयी। और कहती है “मैंने देखा कि जैन मंदिर की खिड़कियाँ टूटी थीं, बाहर लोग दौड़ रहे थे, कुछ लोग अपने अपनों को ढूंढ रहे थे।” इसके बाद उसने आगे कहा कि सुरक्षा तथा बचाव कार्य काफी देर तक ठप रहे क्योंकि भीड़, धुंआ, जले हुए वाहन और चीख-चिल्लाहट का मंजर कुछ ऐसा था कि “कहीं-कहीं तो एम्बुलेंस भी नहीं पहुँच रही थी।” witnesses ने यह बात भी कही है कि “घायलों को ऑटो या रिक्शा में ही अस्पताल ले जाना पड़ा”।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कार में विस्फोटक पदार्थ था और यह‌ स्थान संकेत करता है कि यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि साजिश-धधक वाला हमला हो सकता है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि वाहन लाल बत्ती पर रुकने के बाद विस्फोट हुआ था और आसपास के वाहन-पालिका-दुकाने पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

महिला के अनुभवों में कई ऐसे बिंदु हैं जो इस घटना की भयावहता को उजागर करते हैं:

  • अचानक आने वाला धमाका एवं आग ने शांत शाम को एक डरावने खंड में बदल दिया।

  • जान-बूझकर या अनायास, विस्फोट के बाद शवों-टुकड़ों का बिखराव हुआ, जिसे स्थानीय लोगों ने देखा।

  • भीड़-भाड़ वाले बाजार और पृष्ठभूमि में मौजूद धार्मिक-स्थल जैसे गुरुद्वारा व जैन मंदिर भी इस भयावहता के बीच आ गये।

  • बचने-भागने की कहानी में यह दर्शाता है कि आम नागरिक, जिनका काम-धंधा बाजार-गलियों में था, भी इस हमले का निशाना बने।

  • अस्पतालों की आपातशाखाएँ इस क्षति का सामना करती दिखीं और घायलों-परिजनों की चीख-पुकार-उतावला मंजर सामने आया।

इस महिला ने अपनी गवाही में यह भी कहा कि “मैंने सोचा नहीं था कि इतनी भीषण धमाका हो सकता है। मैंने बस भागने की कोशिश की और गुरुद्वारे की ओर छिप गयी क्योंकि बहार करना मुश्किल था।” उन-वहमानों की तलाश में कई परिवार अस्पतालों के बाहर लंबी देर तक बैठे रहे।

हालाँकि अभी तक इस घटना के द्वारा मारे गए लोगों की पूरी सूची नहीं सार्वजनिक हुई है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स ये बताती हैं कि कम-से-कम आठ लोगों की जान गई और बीस से अधिक घायल हुए हैं।जांच एजेंसियों ने इस धमाके को आतंक-संधर्भ वाला माना है और इसे Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीमों, सीसीटीवी फुटेज, वाहन मालिक-ड्राइवर के रिकॉर्ड, विस्फोटक सामग्री व कार के रख-रखाव की छान-बीन जारी है।

इस प्रकार इस महिला की गवाही ने जनता को यह दिखाया है कि आतंक का असर सिर्फ संख्या-रूप में नहीं होता बल्कि उन-लोगों की जीवन-कहानी के रूप में सामने आता है, जो रोज-रोज का काम करते थे, जो बाजार-गलियों में अपना व्यवसाय चला रहे थे और जिनकी जिंदगी अचानक अशान्ति-हिंसा-घाय-मृत्यु की दिशा में बदल गयी। इस हमले ने आम-लोगों की सुरक्षा-भावना को भी झकझोड़ कर रख दिया है।

घटना की पृष्ठभूमि और अब तक का हाल यह है कि कार लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास लाल बत्ती पर रुकी थी, करीब 6 52 बजे धमाका हुआ था। धुंआ-बिल्कुल वहाँ का मंजर फोरेंसिक टीमों के अनुसार बहुत जली हुई तस्वीरें बताती हैं।

बैग बेचने वाली इस महिला द्वारा बताई आपबीती ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक-स्थान हादसों में कितना भयावह क्षति-चक्र सामने आ सकता है: दुकानें, दुकानदारी, पैदल-बाजार, मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा-जैन-मंदिर-सब-कुछ इस चक्र में प्रभावित हुआ। इसके बाद बचाव-प्रभाग तथा उपचार-सुविधाओं पर भी चर्चा तेज हो गयी है कि सुरक्षा-व्यवस्था, फोर्स-तैनाती, भीड़-नियंत्रण कैसे अगले हमले में असरदार हो सकती है।

अभी आगे की दिशा में क्या होना बाकी है  जांच एजेंसियाँ इस घटना की पूरी तह-तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं। विस्फोटक प्रकार की पुष्टि, किसने कार चलाई, किसने पार्किंग की व्यवस्था की, किस प्रकार की सामग्री थी, क्या यह आत्मघाती हमला था या समय-निर्धारित बम था, इन सब सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं। साथ ही आम नागरिकों की सुरक्षा-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं और राजधानी में ऐसे स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किया गया है।

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