Sambhal: 700 साल पुरानी परंपरा: पृथ्वीराज चौहान की जीत की याद में लगता है ध्वजा मेला।

होली के दूसरे दिन लगने वाला ध्वजा मेला क्षेत्र की प्राचीन और ऐतिहासिक परंपराओं में से एक माना जाता है। स्थानीय निवासी शेखर गिरी के अनुसार

By INA News Desk
Mar 5, 2026 - 16:40
160 Views
Sambhal: 700 साल पुरानी परंपरा: पृथ्वीराज चौहान की जीत की याद में लगता है ध्वजा मेला।
700 साल पुरानी परंपरा: पृथ्वीराज चौहान की जीत की याद में लगता है ध्वजा मेला।

उवैस दानिश, सम्भल 

होली के दूसरे दिन लगने वाला ध्वजा मेला क्षेत्र की प्राचीन और ऐतिहासिक परंपराओं में से एक माना जाता है। स्थानीय निवासी शेखर गिरी के अनुसार इस मेले की शुरुआत मध्यकालीन काल में हुई थी और यह लगभग 700 साल पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि जब पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को पहली बार युद्ध में पराजित किया था, तब उस विजय की खुशी में ध्वजा यानी जीत का प्रतीक झंडा फहराकर उत्सव मनाया गया था। उसी की स्मृति में यह ध्वजा मेला आज भी आयोजित किया जाता है।

होली के दूसरे दिन लगने वाले इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मेले में विभिन्न गांवों से झांकियां निकलती हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में “चौपाइयां” कहा जाता है। ये झांकियां ढिल्लूपुर, नई बस्ती सहित आसपास के कई गांवों और सराय क्षेत्रों से आती हैं और विजय यात्रा की तरह पूरे उत्साह के साथ मेले में पहुंचती हैं। मेले में धार्मिक आस्था भी गहराई से जुड़ी हुई है। यहां स्थित रायसत्ती देवी मंदिर को क्षेत्र की ईष्ट देवी का मंदिर माना जाता है। नई शादीशुदा जोड़े भी यहां आकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। हर वर्ष इस मेले में लगभग 40 से 50 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि आधुनिकता के चलते पहले की तुलना में लोगों की रुचि कुछ कम हुई है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी आस्था और परंपरा को निभाने के लिए मेले में शामिल होते हैं। इस वर्ष भी ध्वजा मेले में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं।

Also Read- Gorakhpur: गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने लिया फाग का आनंद, सीएम संग खेली गई रंगों व फूलों की होली।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement