Sambhal: चीनी मांझा बना मौत का फंदा, देवदूत बनकर पहुंचे अस्पताल कर्मचारी ने कबूतर की बचाई जान।

सम्भल में प्रतिबंधित चीनी मांझे का खौफनाक रूप एक बार फिर देखने को मिला, जब जिला अस्पताल की चौथी मंज़िल पर एक कबूतर चीनी मांझे में

Feb 2, 2026 - 15:42
Feb 2, 2026 - 15:42
 0  7
Sambhal: चीनी मांझा बना मौत का फंदा, देवदूत बनकर पहुंचे अस्पताल कर्मचारी ने कबूतर की बचाई जान।
चेतन सिंह, कबूतर को बचाने वाला अस्पताल कर्मचारी

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल में प्रतिबंधित चीनी मांझे का खौफनाक रूप एक बार फिर देखने को मिला, जब जिला अस्पताल की चौथी मंज़िल पर एक कबूतर चीनी मांझे में फंसकर मौत से जूझता नजर आया। काफी देर तक कबूतर हवा में लटककर फड़फड़ाता रहा। नीचे खड़े लोग बेबस होकर उसकी हालत देखते रहे, लेकिन तभी अस्पताल का एक कर्मचारी देवदूत बनकर सामने आया और उसने कबूतर की जान बचा ली।

यह घटना सम्भल जिला अस्पताल की है। चौथी मंज़िल पर लगे चीनी मांझे में कबूतर बुरी तरह उलझ गया था। कबूतर की तड़प देख नीचे खड़े लोगों की नजरें ऊपर टिक गईं। लोगों की बेचैनी को देखते हुए अस्पताल कर्मचारी चेतन सिंह ने हालात को समझा और बिना समय गंवाए कैंची लेकर अस्पताल की छत पर दौड़ पड़े। उन्होंने साहस दिखाते हुए मांझा काटा, जिससे कबूतर को पहली राहत मिली। हालांकि कबूतर के पंखों में अब भी मांझा फंसा हुआ था। इसके बाद चेतन सिंह दूसरी मंज़िल पर पहुंचे, कबूतर को सावधानी से पकड़ा और उसके पंखों में फंसे पूरे मांझे को काटकर उसे पूरी तरह आज़ाद कर दिया। कुछ ही देर में कबूतर सुरक्षित उड़ गया। घटना के दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद लोग कर्मचारी की मानवता और बहादुरी की तारीफ करते नहीं थके। प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद फैज ने बताया कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती तो कबूतर की जान जा सकती थी। यह घटना जहां चीनी मांझे के जानलेवा खतरे को उजागर करती है, वहीं देवदूत बनकर पहुंचे अस्पताल कर्मचारी की इंसानियत भी समाज के सामने एक प्रेरणा बनकर उभरी है।

Also Read- Lucknow : यूपी का कुल सीडी रेशियो 60.39% के पार, मार्च तक 62% का लक्ष्य, प्रदेश का बैंकिंग व्यवसाय 08 वर्ष में रू.12.80 लाख करोड़ से बढ़कर रू.32.79 लाख करोड़

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।