नोएडा चाइल्ड पीजीआई में इमरजेंसी प्रभारी ने जूनियर डॉक्टर को मारे थप्पड़, आदेश न मानने पर पीड़िता ने पुलिस में दर्ज कराया मुकदमा
चाइल्ड पीजीआई नोएडा में बच्चों के विशेष उपचार के लिए जाना जाता है और यहां इमरजेंसी विभाग हमेशा व्यस्त रहता है। घटना की रात लगभग 2 बजे के आसपास हुई, जब अस्पताल में म
सेक्टर-30 अस्पताल में रात के ड्यूटी के दौरान हुआ विवाद
नोएडा के सेक्टर-30 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, जिसे चाइल्ड पीजीआई के नाम से जाना जाता है, में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) या इमरजेंसी प्रभारी ने एक जूनियर महिला डॉक्टर को कई थप्पड़ मारे। यह घटना बुधवार रात को हुई, जब दोनों डॉक्टर इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर थे। विवाद किसी आदेश या मरीज से संबंधित निर्देश को लेकर शुरू हुआ, जिसे जूनियर डॉक्टर ने नहीं माना। इससे नाराज होकर सीनियर डॉक्टर ने पीड़िता पर हमला कर दिया और लगभग दस थप्पड़ मारे। पीड़िता डॉक्टर शिवांगी राज जायसवाल ने सेक्टर-20 थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने शारीरिक हमले का आरोप लगाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चाइल्ड पीजीआई नोएडा में बच्चों के विशेष उपचार के लिए जाना जाता है और यहां इमरजेंसी विभाग हमेशा व्यस्त रहता है। घटना की रात लगभग 2 बजे के आसपास हुई, जब अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक थी और स्टाफ पर दबाव था। सीनियर महिला डॉक्टर, जो यहां लंबे समय से तैनात हैं, ने जूनियर डॉक्टर अदित्य वर्मा या संबंधित जूनियर से किसी मेडिकल प्रक्रिया या मरीज हैंडलिंग के बारे में निर्देश दिया। जूनियर डॉक्टर ने इसे नहीं माना या असहमति जताई, जिससे बहस तेज हो गई। बहस के दौरान सीनियर ने गुस्से में आकर जूनियर पर हाथ उठाया और कई थप्पड़ मारे। पीड़िता ने बताया कि हमला अचानक और हिंसक था, जिससे उन्हें शारीरिक चोट के साथ मानसिक आघात पहुंचा।
पीड़िता ने तुरंत घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दी और पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें मारपीट और हमला शामिल है। पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि जांच चल रही है और दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी मामले की संज्ञान लिया है और आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है। यह घटना अस्पताल के भीतर ही डॉक्टरों के बीच हिंसा का एक दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है, जो आमतौर पर मरीजों या उनके परिजनों से जुड़ी घटनाओं के विपरीत है।
इनसेट: अस्पतालों में डॉक्टरों के बीच विवाद या हिंसा की घटनाएं दुर्लभ होती हैं, लेकिन जब होती हैं तो कार्यस्थल पर तनाव, लंबी ड्यूटी और दबाव के कारण बढ़ सकती हैं। चाइल्ड पीजीआई जैसे विशेष अस्पताल में जहां बच्चों की जान दांव पर लगी रहती है, वहां निर्णय लेने में मतभेद सामान्य हैं लेकिन हिंसा अस्वीकार्य है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अनुशासनात्मक कदम भी शामिल हो सकते हैं।
घटना के बाद पीड़िता डॉक्टर ने अस्पताल में काम करना जारी रखा लेकिन घटना ने पूरे स्टाफ में चर्चा का विषय बना दिया। कई जूनियर डॉक्टरों ने ऐसे मामलों में सुरक्षा और सम्मान की मांग की है। सीनियर डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया और जूनियर को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाई। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों की जांच की जा रही है, क्योंकि इमरजेंसी वार्ड में कैमरे लगे होते हैं। अगर फुटेज उपलब्ध हुआ तो यह मामले को मजबूत कर सकता है। चाइल्ड पीजीआई में पहले भी विभिन्न विवाद सामने आए हैं, जैसे स्टाफ के बीच झगड़े या अन्य मुद्दे, लेकिन डॉक्टर द्वारा डॉक्टर पर हमला दुर्लभ है। अस्पताल प्रशासन ने दोनों पक्षों को शांत रहने की सलाह दी है और मामले को सुलझाने के प्रयास कर रहा है। पुलिस ने कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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