दक्षिण दिल्ली के नेचर बाजार में भीषण आग लगी, अंधेरिया मोड़ इलाके में करीब 50 दुकानें जलकर राख
नेचर बाजार दक्षिण दिल्ली का एक लोकप्रिय स्थान है, जहां विभिन्न राज्यों से आए कारीगर और विक्रेता अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेचते हैं। यहां की दुकानें ज्यादातर लकड़ी, कपड़े, का
दक्षिण दिल्ली के अंधेरिया मोड़ के पास स्थित नेचर बाजार में रविवार सुबह एक भीषण आग लग गई, जिसने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। यह बाजार लाडो सराय क्षेत्र में आता है और यहां मुख्य रूप से हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, कपड़े तथा अन्य सजावटी सामान बेचने वाली अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानें लगी रहती हैं। आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि बाजार के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। दिल्ली फायर सर्विसेज को सुबह 7:37 बजे सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद दमकल की 10 गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने के लिए घंटों तक संघर्ष करना पड़ा, लेकिन इस दौरान कोई भी व्यक्ति घायल या हताहत नहीं हुआ। बाजार में मौजूद दुकानदारों और आसपास के लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भागना शुरू कर दिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
नेचर बाजार दक्षिण दिल्ली का एक लोकप्रिय स्थान है, जहां विभिन्न राज्यों से आए कारीगर और विक्रेता अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेचते हैं। यहां की दुकानें ज्यादातर लकड़ी, कपड़े, कागज और अन्य ज्वलनशील सामग्री से बनी होती हैं, जो आग फैलने में सहायक साबित हुईं। आग लगने का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या किसी दुकान में रखे सामान से जुड़ी कोई चिंगारी होने की संभावना जताई जा रही है। बाजार में सुबह के समय दुकानें खुल रही थीं और कुछ विक्रेता अपनी सामग्री सजाने में लगे थे, जिस वजह से आग की शुरुआत जल्दी पकड़ी गई। दमकल कर्मियों ने पानी की तेज धार से लपटों को दबाने का प्रयास किया और आसपास की इमारतों को बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरतीं।
दमकल विभाग की टीमों ने आग को नियंत्रित करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई। पहले 10 गाड़ियां पहुंचीं, लेकिन आग के फैलाव को देखते हुए और संसाधनों की आवश्यकता पड़ी। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि आग मुख्य रूप से बाजार के एक हिस्से तक सीमित रही, लेकिन तेज हवाओं और ज्वलनशील सामग्री के कारण यह तेजी से फैली। दुकानों में रखे हस्तशिल्प, लकड़ी के सामान, कपड़े और अन्य उत्पाद पूरी तरह जल गए, जिससे लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। विक्रेताओं ने अपनी मेहनत से जमा की गई पूंजी और माल को खोने का दुख व्यक्त किया। आग बुझाने के बाद भी धुआं और गर्मी बनी रही, जिससे सफाई और जांच कार्य में समय लगा।
इस घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई, जो एक बड़ी राहत की बात है। बाजार में मौजूद सभी लोग समय रहते बाहर निकल आए, क्योंकि आग की शुरुआत सुबह के समय हुई जब भीड़ कम थी। दमकल कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया और बाजार की खुली संरचना ने बड़े हादसे को टाल दिया। हालांकि, आर्थिक नुकसान काफी बड़ा है, क्योंकि यहां की दुकानें छोटे व्यापारियों और कारीगरों की आजीविका का साधन हैं। कई विक्रेता अन्य राज्यों से आकर यहां अपना व्यवसाय चलाते हैं और इस आग ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रशासन ने प्रभावितों को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
दिल्ली में बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती हैं, खासकर जहां अस्थायी संरचनाएं और ज्वलनशील सामग्री अधिक होती है। नेचर बाजार जैसी जगहों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है। फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी, विद्युत व्यवस्था में खराबी और भीड़भाड़ ऐसी घटनाओं के प्रमुख कारण बनते हैं। अधिकारियों ने कहा है कि जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। आग बुझने के बाद बाजार के मलबे में से सामान निकालने का काम शुरू हुआ। कई दुकानें पूरी तरह नष्ट हो गईं, जहां सिर्फ राख और जले हुए अवशेष बचे हैं। विक्रेताओं ने बताया कि उनके पास रखे हस्तशिल्प, जो महीनों की मेहनत से तैयार होते हैं, सब कुछ जल गया। बाजार की संरचना ऐसी है कि दुकानें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिससे आग एक जगह से दूसरी जगह तेजी से पहुंच गई। दमकल विभाग ने पूरे इलाके को सुरक्षित घोषित किया और जांच शुरू कर दी है। कारणों की पड़ताल के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है।
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