11 बार असफलता के बाद मिली सफलता, राजस्थान की बेटी ऋषिना शर्मा ने रचा इतिहास, बारां जिले की पहली महिला फ्लाइंग ऑफिसर बनीं। 

राजस्थान के बारां जिले के अंता क्षेत्र के छोटे से गांव अलीपुरा की बेटी ऋषिना शर्मा ने भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्त होकर

Mar 13, 2026 - 16:14
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11 बार असफलता के बाद मिली सफलता, राजस्थान की बेटी ऋषिना शर्मा ने रचा इतिहास, बारां जिले की पहली महिला फ्लाइंग ऑफिसर बनीं। 
11 बार असफलता के बाद मिली सफलता, राजस्थान की बेटी ऋषिना शर्मा ने रचा इतिहास, बारां जिले की पहली महिला फ्लाइंग ऑफिसर बनीं। 
  • अलीपुरा गांव की ऋषिना ने बचपन का सपना पूरा किया, भारतीय वायु सेना में इंटेलिजेंस ब्रांच में नियुक्त

राजस्थान के बारां जिले के अंता क्षेत्र के छोटे से गांव अलीपुरा की बेटी ऋषिना शर्मा ने भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्त होकर जिले का गौरव बढ़ाया है। ऋषिना बारां जिले से वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने वाली पहली महिला हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि 7 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद हासिल की। इस पद पर उन्हें इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनाती मिली है, जहां वे देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देंगी। ऋषिना का जन्म और पालन-पोषण अलीपुरा गांव में हुआ, जहां उनके माता-पिता सरकारी सेवा में हैं और परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है। बचपन से ही देश सेवा का सपना देखने वाली ऋषिना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बारां के सेंट पॉल स्कूल से पूरी की और आगे की पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनकी इस सफलता ने न केवल परिवार और गांव को गौरवान्वित किया है बल्कि पूरे जिले में महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

ऋषिना शर्मा की यात्रा चुनौतियों से भरी रही है, क्योंकि उन्होंने वायु सेना में कमीशन पाने के लिए कई बार प्रयास किए। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने 11 बार असफलता का सामना किया लेकिन हार नहीं मानी। पहले वे साइबर सिक्योरिटी ऑफिसर के रूप में नौकरी कर रही थीं, लेकिन देश सेवा का जज्बा इतना मजबूत था कि उन्होंने नौकरी छोड़कर वायु सेना की तैयारी पर फोकस किया। एयर फोर्स एकेडमी, हैदराबाद में 6 महीने का प्रारंभिक प्रशिक्षण और वायु सेना तकनीकी कॉलेज में विशेष ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे सफल हुईं। ट्रेनिंग मेंटली और फिजिकली बहुत चुनौतीपूर्ण होती है, जिसमें फिटनेस, डिसिप्लिन, तकनीकी ज्ञान और इंटेलिजेंस स्किल्स की परीक्षा होती है। ऋषिना ने इन सभी चुनौतियों को पार करते हुए फ्लाइंग ऑफिसर का रैंक हासिल किया। उनकी मेहनत और लगन ने साबित किया कि बार-बार असफलता के बाद भी दृढ़ संकल्प से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

ऋषिना की सफलता अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026 की पूर्व संध्या पर आई, जिसने इसे और भी खास बना दिया। बारां जिले में यह पहली बार हुआ है जब किसी महिला ने वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर का पद हासिल किया। गांव अलीपुरा में उनके घर पर खुशी का माहौल है, जहां पड़ोसी, रिश्तेदार और स्थानीय लोग बधाई देने पहुंच रहे हैं। उनके माता-पिता को गर्व है कि उनकी बेटी ने न केवल परिवार का नाम रोशन किया बल्कि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए नया रास्ता खोला है। ऋषिना ने कहा है कि उनका बचपन का सपना अब साकार हो गया है और वे देश की सेवा में पूरी समर्पण के साथ कार्य करेंगी। इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनाती से वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्यों में शामिल होंगी, जिसमें सूचना संग्रह, विश्लेषण और रणनीतिक निर्णय लेना शामिल है।

यह उपलब्धि राजस्थान की ग्रामीण बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा है, क्योंकि अलीपुरा जैसे छोटे गांव से निकलकर वायु सेना में अधिकारी बनना आसान नहीं होता। ऋषिना ने अपनी शिक्षा और तैयारी के दौरान कठिन परिश्रम किया, जिसमें शारीरिक फिटनेस, लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट शामिल थे। वायु सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और ऋषिना जैसी सफलताएं इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बारां जिले में शिक्षा और जागरूकता के स्तर पर सुधार हो रहा है, और ऋषिना की कहानी युवा लड़कियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर प्रेरित कर रही है। उनके गांव में अब बेटियों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि लोग देख रहे हैं कि मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

ऋषिना शर्मा की सफलता से परिवार और समाज में बदलाव आया है। उनके माता-पिता सरकारी नौकरी में होने के कारण शिक्षा के महत्व को समझते थे और उन्होंने बेटी को हर संभव समर्थन दिया। ऋषिना ने नौकरी के साथ तैयारी की, जो उनकी समय प्रबंधन क्षमता दिखाता है। अब वे वायु सेना में शामिल होकर नई जिम्मेदारियां निभाएंगी और भविष्य में उच्च पदों पर पहुंच सकती हैं। इंटेलिजेंस में उनकी तैनाती उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने का अवसर देगी। यह खबर कोटा संभाग और हाड़ौती क्षेत्र में भी फैली है, जहां लोग उनकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

ऋषिना की कहानी दृढ़ता और सपनों की ताकत को दर्शाती है। 11 असफल प्रयासों के बाद सफलता पाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी ट्रेनिंग में शामिल फिजिकल एक्सरसाइज, सिमुलेशन, इंटेलिजेंस टेस्ट और टीम वर्क ने उन्हें मजबूत बनाया। अब वे फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में वायु सेना की वर्दी में देश की सेवा करेंगी। गांव अलीपुरा में उनका स्वागत होने की तैयारी है और लोग उन्हें रोल मॉडल मान रहे हैं। यह सफलता राजस्थान की बेटियों को सशक्त बनाने में मदद करेगी।

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