स्कीइंग क्यों है इतना खतरनाक? जिसने ले ली वेदांता समूह के मालिक के इकलौते बेटे की जान। 

वेदांता समूह के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल इन दिनों अपने जीवन के सबसे बड़े व्यक्तिगत सदमे से गुजर रहे हैं। 71 वर्षीय उद्योगपति

Jan 10, 2026 - 12:20
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स्कीइंग क्यों है इतना खतरनाक? जिसने ले ली वेदांता समूह के मालिक के इकलौते बेटे की जान। 
स्कीइंग क्यों है इतना खतरनाक? जिसने ले ली वेदांता समूह के मालिक के इकलौते बेटे की जान। 

बर्फीली ढलानों में छिपा है मौत का खतरा

वेदांता समूह के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल इन दिनों अपने जीवन के सबसे बड़े व्यक्तिगत सदमे से गुजर रहे हैं। 71 वर्षीय उद्योगपति ने इस दुखद क्षण को अपने जीवन का सबसे स्याह दिन बताया है।

उनके 49 वर्षीय इकलौते पुत्र, वेदांता ग्रुप के वारिस और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के चेयरमैन अग्निवेश अग्रवाल की अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में मृत्यु हो गई। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि स्कीइंग जैसा रोमांचक खेल आखिर इतना खतरनाक क्यों माना जाता है? इससे पहले भी यह खेल कई नामचीन हस्तियों की जान ले चुका है।

  • स्कीइंग क्या है?

जब पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ की मोटी परत जम जाती है, तब उस पर फिसलने के खेल को स्कीइंग कहा जाता है। इसमें खिलाड़ी लकड़ी, प्लास्टिक या धातु से बने लंबे और चपटे बोर्ड (स्कीज़) पैरों से बांधकर बर्फीली ढलानों पर फिसलते हैं।

यह खेल जितना रोमांचक दिखाई देता है, उतना ही जानलेवा भी साबित हो सकता है। अतीत में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे माइकल केनेडी, अभिनेत्री नताशा रिचर्डसन और फ्रांस के मशहूर अभिनेता गैस्पर्ड उलिच की भी स्कीइंग हादसों में मौत हो चुकी है।

राष्ट्रमंडल कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2012 से 2016 के बीच यूरोपीय रिसॉर्ट्स में स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के कारण 58 ब्रिटिश नागरिकों की मृत्यु हुई, जबकि 118 लोगों को गंभीर चोटों के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह आंकड़े इस खेल के खतरे को स्पष्ट करते हैं।

स्कीइंग क्यों है इतना खतरनाक? जानिए 5 बड़े कारण

1- अत्यधिक गति

स्विट्जरलैंड के एल्टीट्यूड स्कूल के अनुसार, ढलानों पर स्की करते समय खिलाड़ी की गति 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि पेशेवर स्कीयर 100 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार पकड़ लेते हैं।
इतनी तेज़ गति पर नियंत्रण खोना कार दुर्घटना जैसा प्रभाव डाल सकता है। पेड़ या चट्टान से टकराने पर हेलमेट के बावजूद सिर और आंतरिक अंगों को गंभीर चोट लग सकती है।

2- उबड़-खाबड़ ढलान

पर्वतीय ढलान एक जैसी नहीं होती। कहीं गहरी खाई, कहीं छिपी हुई चट्टानें और कहीं जमी या पिघली बर्फ।
कई बार स्कीयर को ढलान की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और तेज़ रफ्तार में चट्टान से टकराने पर गंभीर सिर की चोट मौत का कारण बन जाती है।

3- हिमस्खलन (Avalanche)

स्कीइंग का सबसे बड़ा खतरा हिमस्खलन है। कई बार स्कीयर की हलचल या वजन से बर्फ की ऊपरी परत खिसक जाती है और पूरा पहाड़ नीचे आ गिरता है। ऐसे हादसों में दम घुटने या बर्फ के नीचे दबने से मौत की आशंका सबसे अधिक होती है।

4- घुटनों और जोड़ों पर अत्यधिक दबाव

स्कीइंग के दौरान स्की बोर्ड पैरों से बंधे रहते हैं। गिरते समय यदि बोर्ड नहीं खुलता, तो पूरा दबाव घुटनों पर पड़ता है। लिगामेंट का फटना, फ्रैक्चर और स्थायी चोटें इस खेल में आम हैं, जो जीवन भर की समस्या बन सकती हैं।

5- ऊंचाई और मौसम का खतरा

अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से एल्टीट्यूड सिकनेस हो सकती है, जिससे चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना आम है। इसके अलावा पहाड़ों का मौसम बेहद अनिश्चित होता है। अचानक तूफान, बर्फीली हवाएं और अत्यधिक ठंड हाइपोथर्मिया का कारण बन सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

स्कीइंग में आम चोटें

रेस्टोरकेयर हेल्थ के अनुसार, स्कीइंग हादसों में सबसे अधिक मामले ब्रेन इंजरी के होते हैं। इसके बाद

  • घुटनों के फ्रैक्चर
  • लिगामेंट्स का फटना
  • कंधे की गंभीर चोटें

सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं। ऐसे मामलों में समय पर मेडिकल सहायता मिलना बेहद जरूरी होता है।

स्कीइंग एक रोमांचक लेकिन अत्यंत जोखिम भरा खेल है। उचित प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और मौसम की सही जानकारी के बिना इसे खेलना जानलेवा साबित हो सकता है।

अग्निवेश अग्रवाल की दुखद मृत्यु ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि रोमांच के साथ-साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

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