Special Article: एक जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और देश विरोधी गैंग सक्रिय। 

माननीय सुप्रीमकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में फरवरी  2020 में  उत्तर- पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम

Jan 9, 2026 - 11:03
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Special Article: एक जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और देश विरोधी गैंग सक्रिय। 
एक जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और देश विरोधी गैंग सक्रिय। 

लेखक- मृत्युंजय दीक्षित 

माननीय सुप्रीमकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में फरवरी  2020 में  उत्तर- पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। इसी केस में उमर और शरजील के 5 साथियों को 12 कड़ी शर्तो के साथ जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उमर और  शरजील इमाम पर कड़ी टिप्पणियां करी हैं । अब ये दोनों अभियुक्त आने वाले एक साल में  जमानत के लिए अपील भी नहीं कर पाएंगे। 

फरवरी  2020 के दिल्ली दंगे अत्यंत वीभत्स दंगो में से एक थे। इस दंगे में मारे गए 53 निर्दोष लोगों में एक युवा आईबी अधिकारी अंकित शर्मा, पौढ़ी  गढ़वाल से पांच महीने पहले आया गरीब माता का बेटा दिलबर नेगी  और दो पुलिस कर्मी भी शामिल थे। ऐसे कुख्यात दंगों के अपराधियों को जमानत न मिलने पर सर्व साधारण में संतोष का भाव है किन्तु कुछ लोग इस पर भी तुष्टीकरण की रोटियां सेंकते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए न केवल आंसू बहा रहे हैं वरन अनर्गल प्रलाप भी कर रहे हैं ।

शरजील इमाम केवल दिल्ली दंगों का ही अपराधी नहीं है वरन चिकन नेक तोड़कर पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने कि बात करने वाला देशद्रोही है । शरजील इमाम भारत को खंड -खंड मे विभाजित देखना चाहता हैं। भारत के जो  विपक्षी दलो ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत ण मिलने पर उसको सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं क्या वे इन विचारों से सहमत हैं?  

दरअसल उमर व शरजील के साथ खड़े लोग अपनी कुंठा और  हताशा को ही जगजाहिर कर रहे हैं। इस  कुंठित टोली मे कोई जमानत न मिलने को  कायरता पूर्ण कार्रवाई कह रहा है तो कोई इसे बेतुका बता रहा है जबकि कोई इसे अत्याचार बता रहा है । एक ने तो सारी लज्जा त्यागते हुए इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बता दिया। एक व्यक्ति ने कहा कि 5 साल से अधिक बिना किसी दोष साबित हुए जेल में रखना  बर्बरता बता दिया। यह बात भारतीय जनमानस के समझने योग्य है कि इन सेक्युलर नेताओं को सुप्रीम कोर्ट का फैसला बर्बर लग रहा है। अमेरिकी अब्राहम लिंकन ने एक बार कहा था कि जो अदालतों के अधिकार  व उनके फैसलों को नकारता है  वह राष्ट्र की नींव को नकारता है । 

इस तुष्टीकरण गैंग से पूछा जाना चाहिए कि आज देश में 4 लाख 34 हजार 302 विचाराधीन कैदी हैं जो सजा पाए बिना जेल में बंद हैं। करीब 26 हजार ऐसे कैदी हैं जो 3 से 5 साल तक जेल में बंद हैं और करीब साढ़े 11 हजार ऐसे कैदी हैं जो 5 वर्षों से अधिक समय से जेल  में बंद हैं ।  यह आंकड़े  केवल 2020 तक के ही हैं । इंडिया  जस्टिस रिपोर्ट- 2025 के अनुसार यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इसमें भी अधिकांश बंदी जन गरीब, दलित अल्पसंख्यक व महिला समाज के हैं । इन कैदियों के लिए टुकड़े टुकड़े गैंग के समर्थकों का   मन कभी नहीं छटपटाता है। यह लोग उन उमर खलिद और शरजील इमाम के लिए रो रहे हैं जिनकी जमानत के फैसले से पूर्व ही न्यूयार्क के मेयर ममदानी का एक आपत्तिजनक पत्र सार्वजनिक हो गया था। ममदानी के पत्र से पता चलता है कि भारत के खिलाफ कितनी गहरी साजिशें रची जा रही हैं। यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया शरजील इमाम राष्ट्र द्रोही  व घातक व्यक्ति है। 

चिंता का विषय है कि उमर खालिद और  शरजील इमाम के बचाव में अदालत में जो लोग खड़े हुए हैं वह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं अपितु देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ काग्रेंस नेता और प्रभावशाली व्यक्ति हैं। इनमें  कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, अश्विनी कुमार जैसे नाम शामिल हैं जिन्होंने कांग्रेस सरकार मेंं बडे मंत्रालय संभाले। इसके अतिरिकत सिद्धार्थ दवे, सिद्धार्थ लूथरा, त्रिदीप पैइस भी इनके वकील रहे।प्रश्न यह उठता है कि ”क्या यह केवल कानूनी सहायता है” या ”किसी विशेष मानसिकता का स्पष्ट संकेत ?” 

यह सब चल ही रहा था तभी बीच में जेएनयू के ढपली वालों ने आकर ताल से ताल मिला दी। दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की जमीन से एक बार फिर देश के विरुद्ध आपतिजनक नारे लगे। दस साल पूर्व भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह -इंशा अल्लाह के नारे लगाए गएा थे उसी जगह “मोदी तेरी कब्र खुदेगी , अमित शाह तेरी कब्र खुदेगी खुदेगी“ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इस गैंग की नारेबाजी की वजह थी दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम  की जमानत की अर्जी का खारिज होना। कांग्रेस व उसके अन्य  विरोधी दलों  के नेताओं ने इस प्रदर्शन व नारेबाजी को गुस्से ,नाराजगी के प्रकटीकरण का तरीका बता दिया। 

दिल्ली दंगो से सम्बंधित  एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय दिल्ली में आप मुखिया अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे। दंगो की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी आप पार्षद ताहिर हुसैन और विधायक अमानतुल्लाह खान की इसमें बड़ी भूमिका थी, इनकी जांच प्रगति पर है और अभी कोई बरी नहीं हुआ है। केजरीवाल मुख्यमंत्री रहते सरकारी तौर पर इन  तत्वों को बचाने का पूरा प्रयास किया गया और उन्हीं की वजह से आज भी वह जमानत पर घूम रहे  हैं । जब तक दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री रहे तब तक उनकी ओर से दिल्ली दंगो की जांच में कोई सहयोग नहीं किया जा रहा था। अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में संभव है फरवरी 2020 के पीड़ितों को न्याय मिल जाए । 

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