Prayagraj : पंडित नरेंद्र शर्मा की जयंती पर स्मृति सभा में उनकी साहित्यिक देन की सराहना

अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत के संरक्षक और कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि नरेंद्र शर्मा असाधारण प्रतिभा के मालिक थे। उन्होंने फिल्मों के जरिए हिंदी को

Feb 28, 2026 - 21:37
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Prayagraj : पंडित नरेंद्र शर्मा की जयंती पर स्मृति सभा में उनकी साहित्यिक देन की सराहना
Prayagraj : पंडित नरेंद्र शर्मा की जयंती पर स्मृति सभा में उनकी साहित्यिक देन की सराहना

प्रयागराज में पंडित देवीदत्त शुक्ल-रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान की ओर से सर्वार्य महाविद्यालय इंटर कॉलेज में पंडित नरेंद्र शर्मा की जयंती पर एक स्मृति सभा हुई। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रसिद्ध कवि और गीतकार पंडित नरेंद्र शर्मा ने हिंदी साहित्य और संस्कृति को बहुत समृद्ध किया। उन्होंने 50 से ज्यादा फिल्मों के लिए लगभग 500 गीत लिखे, जिनकी मदद से सरल हिंदी भाषा देश-विदेश में लोकप्रिय हुई। दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक 'महाभारत' की पटकथा लिखकर उन्होंने इस महाकाव्य को आम लोगों तक पहुंचाया और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाई।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। मुख्य वक्ता डॉक्टर वीरेंद्र तिवारी ने कहा कि पंडित नरेंद्र शर्मा ने वेदव्यास की तरह महाभारत को नए रूप में पेश किया। लोग महाभारत से दूर हो गए थे, लेकिन उनकी पटकथा और धारावाहिक ने इसे हर घर तक पहुंचाया। उन्होंने नरेंद्र शर्मा की कविता 'कन्हैया तेरी मुरली पर नाच रही गैया' का गाकर पाठ किया, जिससे सब भावुक हो गए।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत के संरक्षक और कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि नरेंद्र शर्मा असाधारण प्रतिभा के मालिक थे। उन्होंने फिल्मों के जरिए हिंदी को ज्यादा लोकप्रिय बनाया। फिल्म 'ज्वार भाटा' में उन्होंने नवोदित कलाकार युसूफ खान को दिलीप कुमार नाम दिया, जो हमेशा के लिए मशहूर हो गया। उन्होंने सिनेमा में भारतीय संस्कृति को सही ढंग से दिखाने की कोशिश की। नरेंद्र शर्मा अच्छे पत्रकार भी थे। उन्होंने प्रयाग से निकलने वाले 'अभ्युदय' का संपादन किया। क्रांतिकारी विचारों के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जेल में डाला और यातनाएं दीं।

कार्यक्रम के संयोजक व्रतशील शर्मा ने विषय की शुरुआत की और पंडित नरेंद्र शर्मा से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पितामह पंडित देवीदत्त शुक्ल ने छात्र काल में नरेंद्र शर्मा को बहुत प्रोत्साहन दिया था। कवि विवेक सत्यांशु ने उनके साहित्यिक जीवन पर विस्तार से बात की और 'मां' नामक रचना पढ़कर श्रद्धा जताई। गजलकार अजय मालवीय ने 'हिंदी की पीड़ा' कविता सुनाई, जिससे लोग भावुक हो गए। समाजसेवी राजेंद्र मिश्र ने धन्यवाद दिया। सभा में रवींद्र मिश्र, अंकित जायसवाल, प्रवीण तिवारी, जगदीश पांडे, रविशंकर, आशुतोष सिंह, सुनील गुप्त, रूपेश और गुड़िया सहित कई लोग मौजूद थे।

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