Sambhal : वक्त की कमी और कानूनी पेच में उलझा 'नेजा मेला', अध्यक्ष शाहिद मसूदी बोले- अब सुप्रीम कोर्ट की तैयारी?

​इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ (न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी) ने याचिका संख्या 3186/2026 की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि

By INA News Desk
Feb 28, 2026 - 10:44
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Sambhal : वक्त की कमी और कानूनी पेच में उलझा 'नेजा मेला', अध्यक्ष शाहिद मसूदी बोले- अब सुप्रीम कोर्ट की तैयारी?
शाहिद मसूदी, अध्यक्ष धार्मिक नगर नेजा कमेटी सम्भल

Report : उवैस दानिश, सम्भल

​ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले सय्यद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाले 'नेजा मेले' को लेकर इस साल भी मायूसी हाथ लगी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेजा मेला कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल मेले के आयोजन को लेकर कोई सीधा आदेश नहीं दिया है, जिसके बाद कमेटी ने इस वर्ष मेला स्थगित करने का निर्णय लिया है।

​हाईकोर्ट का आदेश: निचली अदालत जाने की छूट

​इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ (न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी) ने याचिका संख्या 3186/2026 की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता (नेजा मेला कमेटी) का एक मामला पहले से ही निचली अदालत (Trial Court) में लंबित है, इसलिए वे उसी मुकदमे में संशोधन (Amendment) करा सकते हैं।

कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने कमेटी को 6 सप्ताह का समय दिया है कि वे निचली अदालत में प्रार्थना पत्र देकर जरूरी बदलाव और 'स्थगन आदेश' (Injunction) की मांग करें। हाईकोर्ट ने इन निर्देशों के साथ याचिका को निस्तारित (Disposed off) कर दिया है।

​कमेटी अध्यक्ष का बयान: "समय की कमी ने तोड़ी उम्मीदें"

​धार्मिक नगर नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे बहराइच के मेले (जेठ मेला) पर आए लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले से काफी उम्मीदें लगाए हुए थे। उन्होंने बताया ​"प्रशासन से अनुमति न मिलने पर हम बड़ी उम्मीद के साथ हाईकोर्ट गए थे, लेकिन हमें वह राहत नहीं मिली जिससे हम तुरंत मेले का आयोजन कर सकें। हाईकोर्ट का ऑर्डर 23 फरवरी का था, लेकिन नेट पर यह 27 फरवरी को अपलोड हुआ। अब समय बहुत कम बचा है।"

​आयोजन रद्द होने के मुख्य कारण:

​तारीखों का टकराव: मेले की मुख्य रस्में (नेजा का झंडा गाड़ना) 10 मार्च से शुरू होनी थीं, जबकि निचली अदालत में मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च है।​सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियां: आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने में देरी और सुप्रीम कोर्ट में 8 मार्च तक छुट्टियों के कारण कमेटी के पास उच्च अदालत जाने का समय नहीं बचा है।

​अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट या निचली अदालत?

​शाहिद मसूदी ने स्पष्ट किया कि इस साल मेला संपन्न नहीं हो पाएगा। आगे की रणनीति पर उन्होंने कहा कि वे जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता हाजी आरिफ आलम से सलाह मशविरा कर रहे हैं। कमेटी के पास अपील के लिए एक महीने का समय है, और वे जल्द ही तय करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट का रुख करना है या निचली अदालत में ही संशोधन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

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