रणवीर सिंह की सफलता ने बदला नजरिया, मधु बोलीं- 'जब लोग हंसते हैं तो हम अपनी सोच और खुद को समय के साथ बदल लेते हैं'।

सिनेमाई गलियारों में इस प्रकार के बयानों को अक्सर सकारात्मक रूप से देखा जाता है, क्योंकि यह प्रदर्शित करता है कि वरिष्ठ कलाकार भी नई पीढ़ी के काम और उनकी विशिष्ट पहचान को खुले दिल से स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। मधु ने साफ किया कि कला और कलाकारों का मूल्यांक

Jun 7, 2026 - 12:08
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रणवीर सिंह की सफलता ने बदला नजरिया, मधु बोलीं- 'जब लोग हंसते हैं तो हम अपनी सोच और खुद को समय के साथ बदल लेते हैं'।
  • अभिनेत्री मधु का रणवीर सिंह को लेकर बड़ा बयान, कहा- शुरुआत में अभिनेता के लुक और अतरंगी फैशन से बिल्कुल नहीं थीं प्रभावित।
  • कपड़ों का मजाक उड़ाने वालों में खुद को बताया शामिल, पुराने दौर और आधुनिक सिनेमा के बीच बदलते हुए विचारों पर खुलकर की बात।

बॉलीवुड की दिग्गज और बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री मधु ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री के ऊर्जावान सुपरस्टार रणवीर सिंह को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत के गलियारों तक एक नई बहस छेड़ दी है। अपने शानदार अभिनय और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि जब रणवीर सिंह ने पहली बार फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब वे उनके अभिनय और उनके व्यक्तित्व से बिल्कुल भी प्रभावित या आश्वस्त नहीं थीं। मधु के अनुसार, रणवीर के शुरुआती दिनों के पहनावे और उनके अतरंगी फैशन सेंस को देखकर वे भी उन लोगों की सूची में शामिल थीं जो अभिनेता के अनूठे कपड़ों का जमकर मजाक उड़ाया करते थे, क्योंकि उस समय के पारंपरिक सिनेमाई माहौल में ऐसे पहनावे को स्वीकार करना हर किसी के लिए काफी कठिन था। अपने जमाने की कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहीं मधु ने सिनेमा के बदलते दौर और कलाकारों के प्रस्तुतीकरण के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनके दौर में हीरो की एक तय और मर्यादित छवि हुआ करती थी, जहां अभिनेताओं के लुक, उनके चलने के ढंग और उनके कपड़ों में एक खास तरह का क्लासिक अनुशासन देखने को मिलता था। ऐसे में जब रणवीर सिंह ने बॉलीवुड में कदम रखा और सार्वजनिक आयोजनों में बेहद चमकीले, अजीबोगरीब और लीक से हटकर कपड़े पहनने शुरू किए, तो वह शैली पुरानी पीढ़ी के कई कलाकारों को रास नहीं आई। मधु ने ईमानदारी से माना कि उन्होंने भी शुरुआत में रणवीर के इस अजीबोगरीब अंदाज को गंभीरता से नहीं लिया था और उन्हें लगता था कि यह सिर्फ ध्यान आकर्षित करने का एक अस्थायी तरीका है।

हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अपनी जबरदस्त सफलता का लोहा मनवाया, बल्कि आलोचकों को भी अपने बेहतरीन अभिनय से सोचने पर मजबूर कर दिया। 'बाजीराव मस्तानी', 'पद्मावत' और 'गली बॉय' जैसी ऐतिहासिक और कल्ट फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए किरदारों ने उनकी असाधारण अभिनय क्षमता को पूरी दुनिया के सामने साबित किया। मधु ने कहा कि जब उन्होंने रणवीर को पर्दे पर इतनी शिद्दत और गहराई के साथ अभिनय करते देखा, तब जाकर उन्हें अपनी शुरुआती राय पर दोबारा विचार करना पड़ा। उन्होंने महसूस किया कि एक कलाकार का पहनावा उसकी कला की सीमाओं को तय नहीं कर सकता और कपड़ों के पीछे छिपा हुआ हुनर ही अंततः सबसे ज्यादा मायने रखता है।

पुराने बनाम नए दौर का फैशन

  • पुराना दौर: मर्यादित, क्लासिक और साधारण पहनावे को दी जाती थी प्राथमिकता।

  • रणवीर सिंह का दौर: जेंडर-फ्लुइड, अतरंगी, चमकीले और अत्यधिक प्रयोगात्मक आउटफिट्स।

  • बदलाव: शुरुआत में भारी आलोचना और उपहास झेलने के बाद अब इसे एक वैश्विक स्टाइल स्टेटमेंट माना जाता है।

अभिनेत्री ने मानवीय स्वभाव और समाज की मानसिकता पर एक गहरा दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि हम अक्सर उन चीजों का मजाक उड़ाते हैं जो हमारी स्थापित सोच और परंपराओं से मेल नहीं खातीं। जब कोई व्यक्ति समाज के बनाए नियमों से अलग हटकर कुछ नया करने का प्रयास करता है, तो शुरुआत में लोग उस पर हंसते हैं और उसकी आलोचना करते हैं। लेकिन जब वही व्यक्ति अपने काम और अटूट लगन के दम पर बड़ी सफलता हासिल कर लेता है, तो हमारा नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। मधु के अनुसार, रणवीर के मामले में भी ऐसा ही हुआ और जब पूरी दुनिया ने उनकी प्रतिभा को सलाम किया, तो खुद उन्होंने भी अपने विचारों को बदलते हुए रणवीर के प्रति सम्मान व्यक्त करना शुरू कर दिया।

रणवीर सिंह के अनोखे स्टाइल स्टेटमेंट ने आज के दौर में न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में भी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। वे बिना किसी हिचकिचाहट के स्कर्ट्स, अत्यधिक चमकीले सूट्स और जेंडर-न्यूट्रल परिधानों को बेहद आत्मविश्वास के साथ कैरी करते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि वे किसी भी तरह के रूढ़िवादी सामाजिक बंधनों में बंधने के लिए तैयार नहीं हैं। मधु ने इस बात की सराहना की कि रणवीर ने लोगों के मजाक उड़ाने या आलोचना करने के डर से कभी भी अपने असली स्वभाव और अपनी पसंद को नहीं बदला। उनका यही निडर और बिंदास रवैया आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बन चुका है, जो खुद को खुलकर अभिव्यक्त करने में विश्वास रखती है।

अभिनय की अनूठी क्षमता 'बैंड बाजा बारात' से शुरुआत करने वाले रणवीर सिंह ने 'पद्मावत' के अलाउद्दीन खिलजी और '83' के कपिल देव जैसे विपरीत किरदारों को पर्दे पर बेहद जीवंतता के साथ उतारा है। उनके इसी अभिनय कौशल ने उनके आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया।

सिनेमाई गलियारों में इस प्रकार के बयानों को अक्सर सकारात्मक रूप से देखा जाता है, क्योंकि यह प्रदर्शित करता है कि वरिष्ठ कलाकार भी नई पीढ़ी के काम और उनकी विशिष्ट पहचान को खुले दिल से स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। मधु ने साफ किया कि कला और कलाकारों का मूल्यांकन कभी भी उनके निजी जीवन के फैसलों या उनके पहनावे के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। मनोरंजन उद्योग में हर दौर के अपने अलग नियम और अपनी मांग होती है, और एक सफल कलाकार वही है जो अपने समय के अनुसार दर्शकों को कुछ नया और अप्रत्याशित दे सके। रणवीर सिंह ने बिल्कुल यही किया और अपनी एक ऐसी लीग तैयार की जहां उनका मुकाबला सिर्फ खुद से है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि फिल्म जगत में टिके रहने और अपनी धाक जमाने के लिए केवल लुक्स नहीं, बल्कि अभिनय की गहरी समझ और लगातार खुद को साबित करने की भूख होना सबसे ज्यादा जरूरी है। रणवीर सिंह ने अपने करियर के ग्राफ से यह दिखा दिया है कि वे केवल एक स्टाइल आइकन नहीं हैं, बल्कि एक बेहद संजीदा और समर्पित अभिनेता हैं जो अपने हर किरदार के लिए अपनी आत्मा तक झोंक देते हैं।

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