हाथरस: ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए पंचायत सचिवों और सहायकों को दिया गया प्रशिक्षण
हाथरस में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) में सिकंद्राराऊ विकास खंड के ग्राम पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना और उनकी अपनी आय के स्रोतों में वृद्धि करना था। कार्यशाला में विकास खंड के सभी पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) गजेंद्र तोमर, सहायक विकास अधिकारी प्रेम किशोर यादव और वरिष्ठ फैकल्टी सीमा चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और राजस्व संग्रह की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। सहायक विकास अधिकारी गजेंद्र तोमर ने बताया कि स्वयं के राजस्व स्रोतों के माध्यम से शुल्क संग्रह की प्रक्रिया में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनरों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गोवर्धन योजना, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग और सामुदायिक शौचालयों के माध्यम से राजस्व जुटाने के व्यावहारिक तरीके साझा किए। इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंचायतों को कर लगाने और उसकी वसूली का पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त है। पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए जन सेवा केंद्रों के माध्यम से डिजिटल प्रमाण पत्र जारी करने और पंचायत सहायकों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने जैसे सुझाव भी दिए गए।
वरिष्ठ फैकल्टी सीमा चौधरी ने ऑनलाइन पोर्टल और राजस्व वृद्धि के अन्य माध्यमों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों का प्रस्तुतीकरण और चार्ट पेपर के माध्यम से मूल्यांकन किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की कि जिले के सभी विकास खंडों में पंचायत कर्मियों का यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है।
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