Bareilly: क्रांति की यादें सिसक रहीं: 121 साल पुराने 'आज़ाद छात्रावास' पर ताला, गुमनामी में चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा, इतिहास उपेक्षा का शिकार
स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटे बरेली कॉलेज का 'आज़ाद छात्रावास' आज प्रशासन की अनदेखी और
बरेली। स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटे बरेली कॉलेज का 'आज़ाद छात्रावास' आज प्रशासन की अनदेखी और उपेक्षा का दंश झेल रहा है। वर्ष 1905 में निर्मित यह ऐतिहासिक परिसर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। देश के महान अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद जी के नाम पर नामित यह छात्रावास वही पावन स्थल है, जहाँ स्वतंत्रता आंदोलन के समय देश के अनेक वीरों ने आश्रय लेकर आज़ादी की अलख जगाई थी। इसी प्रांगण से वर्ष 1907 में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के चाचा, सरदार अजीत सिंह जी ने भी बरेली कॉलेज से कानून की शिक्षा ग्रहण की थी।
इस स्वर्णिम इतिहास के बावजूद, वर्ष 2016 से यह छात्रावास पूरी तरह बंद पड़ा है। रखरखाव के अभाव में छात्रावास परिसर में चारों ओर झाड़ियां और घास उग आई है, जिससे यह स्थल कीड़े-मकोड़ों का ठिकाना बन चुका है। बेहद अफसोसजनक पहलू यह भी है कि अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद जी की प्रतिमा भी वर्षों से ताले में बंद पड़ी है और नियमित साफ-सफाई न होने से धूल फांक रही है।
हरदोई जिले के पिहानी निवासी पूर्व छात्र अजीत चौहान ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इसी छात्रावास में रहकर B.Com, NCC और मास कम्युनिकेशन की अपनी पढ़ाई पूरी की थी। अजीत चौहान और अन्य पूर्व छात्रों का कहना है कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। आज इसकी ऐसी दुर्दशा देखकर हर किसी का मन व्यथित हो जाता है। यदि प्रशासन इसे पुनः चालू कराता है, तो दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब विद्यार्थियों को रहने का ठिकाना मिलेगा और वे अपनी शिक्षा सुचारू रूप से पूरी कर सकेंगे।
अजीत चौहान समेत अन्य छात्रों और पूर्व पुरातन छात्रों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि अमर सेनानियों की स्मृतियों का सम्मान हो सके और विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिल सके।
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