'सचिन तेंदुलकर से भी बड़ा असर छोड़ सकते हैं वैभव सूर्यवंशी': रॉबिन उथप्पा ने तारीफ के साथ दी कांबली और शॉ की चेतावनी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की तुलना सचिन तेंदुलकर से करते हुए विनोद कांबली और पृथ्वी शॉ का उदाहरण देकर आगाह किया है।

Aug 7, 2026 - 17:55
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'सचिन तेंदुलकर से भी बड़ा असर छोड़ सकते हैं वैभव सूर्यवंशी': रॉबिन उथप्पा ने तारीफ के साथ दी कांबली और शॉ की चेतावनी
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भारतीय क्रिकेट के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने देश के 15 वर्षीय उभरते हुए बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की जमकर सराहना की है। उथप्पा ने एक क्रिकेट शो के दौरान 7 अगस्त 2026 को दिए अपने वक्तव्य में कहा कि वैभव के पास सीमित ओवरों के प्रारूप में महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से भी बड़ा प्रभाव छोड़ने की असाधारण क्षमता मौजूद है। हालांकि, अपनी इस बड़ी तारीफ के साथ ही उथप्पा ने इस युवा खिलाड़ी को करियर के शुरुआती दौर में मिलने वाली शोहरत और भटकाव से बचने की सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के दो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों विनोद कांबली और पृथ्वी शॉ की मिसाल देते हुए कहा कि यदि सही मार्गदर्शन और अनुशासन नहीं मिला, तो इतनी कम उम्र में मिली सफलता करियर को गलत दिशा में भी मोड़ सकती है।

भारतीय घरेलू क्रिकेट और जूनियर स्तर पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचाने वाले 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। भारत के पूर्व टी20 विश्व कप विजेता खिलाड़ी रॉबिन उथप्पा ने वैभव की बल्लेबाजी क्षमता और उनके उग्र अंदाज की तुलना महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के शुरुआती दिनों से की है। उथप्पा का मानना है कि सफेद गेंद के क्रिकेट में वैभव जिस तरह से गेंद को हिट करते हैं और जिस आत्मविश्वास के साथ क्रीज पर खड़े होते हैं, वह उन्हें अपने दौर का सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज बना सकता है। लेकिन इस अपार प्रतिभा के साथ आने वाले दबाव और ध्यान भटकाने वाले कारकों को लेकर उथप्पा ने एक वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं।

वैभव सूर्यवंशी ने बहुत ही छोटी उम्र में प्रथम श्रेणी और जूनियर स्तर के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी बल्लेबाजी में बड़े-बड़े शॉट खेलने की क्षमता और किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का निडर रवैया साफ नजर आता है। हाल ही में एक खेल कार्यक्रम के दौरान जब उथप्पा से भारतीय क्रिकेट के भविष्य और युवा प्रतिभाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के खेल का विशेष विश्लेषण किया।

उथप्पा ने कहा कि जब सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, तब उनके पास खेल को समझने और अपनी बल्लेबाजी को ढालने की अद्भुत कला थी। वैभव के पास भी वही ईश्वरदत्त प्रतिभा है, जो उन्हें सीमित ओवरों के क्रिकेट में सचिन से भी अधिक आक्रामक और प्रभावशाली बना सकती है। हालांकि, उथप्पा ने तुरंत ही अतीत के पन्नों को पलटते हुए दो ऐसे नाम लिए जिनका करियर अपार प्रतिभा होने के बावजूद अनुशासन और सही दिशा के अभाव में भटक गया।

उन्होंने विनोद कांबली का उदाहरण दिया, जिन्होंने सचिन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय करियर की धमाकेदार शुरुआत की थी और बैक-टू-बैक दोहरे शतक जड़े थे, लेकिन वे अपनी सफलता को लंबे समय तक संभाल नहीं सके। इसके साथ ही उथप्पा ने आधुनिक दौर के प्रतिभाशाली सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपने पदार्पण टेस्ट में शतक बनाकर सचिन और कांबली की याद ताजा कर दी थी, लेकिन बाद के वर्षों में वे फिटनेस, फॉर्म और मैदान से बाहर के विवादों के कारण टीम से बाहर हो गए।

रॉबिन उथप्पा के इस बयान पर क्रिकेट जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व खिलाड़ियों और खेल विश्लेषकों का मानना है कि उथप्पा का यह आंकलन पूरी तरह से व्यावहारिक और दूरदर्शी है। कई वरिष्ठ प्रशिक्षकों ने उथप्पा के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि 15-16 साल की उम्र में मीडिया का अत्यधिक ध्यान और अचानक मिलने वाला पैसा किसी भी युवा खिलाड़ी का मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है।

वैभव सूर्यवंशी के कोचिंग स्टाफ और परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, खिलाड़ी का पूरा ध्यान इस समय अपने खेल को सुधारने और फिटनेस पर केंद्रित है। परिवार और उनके मेंटर्स यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वैभव मैदान से बाहर की अनावश्यक चकाचौंध से दूर रहें और अपने खेल के प्रति उसी तरह समर्पित रहें जैसे वे शुरुआती दिनों में थे।

उथप्पा की यह चेतावनी भारतीय क्रिकेट की उस युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा सबक है, जो बहुत कम उम्र में घरेलू लीगों, आईपीएल और सोशल मीडिया के जरिए रातों-रात मशहूर हो जाती है। यह बयान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों के लिए भी एक रिमाइंडर की तरह है कि उन्हें महज प्रतिभा की पहचान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे युवा खिलाड़ियों के लिए खेल मनोवैज्ञानिकों (Sports Psychologists) और व्यक्तिगत मेंटर्स की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि वैभव सूर्यवंशी जैसी असाधारण प्रतिभा को सही दिशा, उचित कार्यनीति और अनुशासित माहौल मिलता है, तो वे आने वाले दशक में भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम के मुख्य आधार स्तंभ बन सकते हैं।

वैभव सूर्यवंशी के सामने अब आने वाले घरेलू क्रिकेट सत्र और भारत की जूनियर राष्ट्रीय टीमों के दौरों में अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने की चुनौती होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो-तीन साल उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे, जहां उन्हें लाल गेंद से अपनी तकनीक को और दुरुस्त करना होगा और सफेद गेंद से अपनी स्वाभाविक आक्रामकता को बनाए रखना होगा। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि वैभव अतीत की गलतियों से सीख लेते हुए अपने मार्गदर्शन प्रणाली को मजबूत रखेंगे और भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

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