महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजा में सावधानी बरतें, भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 वर्जित चीजें वरना पूजा अधूरी रह सकती है
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जो भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस दिन भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते
- महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण सलाह, शिवलिंग पर इन 5 चीजों का अर्पण पूरी तरह वर्जित
- शिवलिंग अभिषेक के नियमों का पालन जरूरी, महाशिवरात्रि पर केतकी फूल से सिंदूर तक ये 5 चीजें न चढ़ाएं
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जो भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस दिन भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं और विभिन्न सामग्रियां अर्पित करते हैं। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ चीजें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। इनका अर्पण करने से पूजा अधूरी रह सकती है और भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं। महाशिवरात्रि पर भक्तों को इन नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि पूजा विधिपूर्वक हो सके।
शिवलिंग पर वर्जित चीजों में सबसे पहले केतकी के फूल शामिल हैं। केतकी फूल को शिव पूजा में कभी नहीं चढ़ाया जाता। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ था। शिव ने एक विशाल ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर कहा कि जो पहले इसका अंत पाएगा वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा ने केतकी फूल से झूठ बोला कि उन्होंने अंत देख लिया। इस झूठ के कारण केतकी फूल को शिव पूजा में वर्जित कर दिया गया। इसलिए महाशिवरात्रि सहित किसी भी समय शिवलिंग पर केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता।
दूसरी वर्जित चीज सिंदूर या कुमकुम है। शिवलिंग वैराग्य, त्याग और तप का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर और कुमकुम सौभाग्य, श्रृंगार और वैवाहिक जीवन से जुड़े होते हैं। ये स्त्रियों द्वारा पति की लंबी आयु के लिए लगाए जाते हैं। शिव के वैरागी स्वरूप के कारण इनका उपयोग शिव पूजा में नहीं किया जाता। शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम चढ़ाने से पूजा का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसके बजाय चंदन का लेप लगाया जाता है।
तीसरी प्रमुख वर्जित वस्तु तुलसी की पत्तियां हैं। तुलसी को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय माना जाता है और इसे विष्णु पूजा में अनिवार्य रूप से अर्पित किया जाता है। लेकिन शिव पूजा में तुलसी दल का निषेध है। मान्यता है कि तुलसी शिवलिंग पर चढ़ाने से पूजा फलदायी नहीं होती। इसलिए महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाए जाते। भक्त इसके स्थान पर बेलपत्र अर्पित करते हैं जो शिव को विशेष प्रिय है।
चौथी चीज हल्दी है जिसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। हल्दी को शुद्धता, सौंदर्य और स्त्री ऊर्जा से जोड़ा जाता है। यह मुख्य रूप से देवी पूजा या वैवाहिक अनुष्ठानों में उपयोग होती है। शिवलिंग पुरुषत्व और तप का प्रतीक होने के कारण हल्दी का उपयोग नहीं किया जाता। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की मनाही है। इससे पूजा में बाधा आ सकती है।
पांचवीं वर्जित चीज शंख से जल अर्पित करना है। शिव पूजा में शंख का उपयोग नहीं किया जाता। मान्यता है कि महादेव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था। इसलिए शंख से जल चढ़ाना या शंख बजाना वर्जित माना गया है। जलाभिषेक के लिए साधारण लोटे या अन्य पात्रों का उपयोग किया जाता है। शंख विष्णु पूजा से जुड़ा होता है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर शंख से जल डालने से बचना चाहिए।
ये पांच चीजें शिवलिंग पर अर्पित करने से बचनी चाहिए। महाशिवरात्रि पर भक्त बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध, दही, शहद, गंगाजल और शुद्ध जल अर्पित करते हैं। इन वर्जित चीजों का ध्यान रखकर पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों में इन नियमों का उल्लेख विभिन्न ग्रंथों में मिलता है। भक्तों को इनका पालन करके पूजा पूरी करनी चाहिए। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखा जाता है और रात्रि जागरण किया जाता है। पूजा में विधि-विधान का पालन आवश्यक है। वर्जित चीजों से दूर रहकर ही सच्ची भक्ति प्राप्त होती है।
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