Sambhal: 106 साल पुरानी ‘आशिक पब्लिक लाइब्रेरी’ बनी तालीम का खजाना, 35 हजार किताबों से लोग ले रहे ज्ञान।
शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल आशिक पब्लिक लाइब्रेरी आज भी ज्ञान और तालीम का बड़ा केंद्र बनी हुई है। लाइब्रेरी के अध्यक्ष हाजी
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल आशिक पब्लिक लाइब्रेरी आज भी ज्ञान और तालीम का बड़ा केंद्र बनी हुई है। लाइब्रेरी के अध्यक्ष हाजी अब्दुल रहमान ने बताया कि आशिक पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1920 में अंग्रेज कलेक्टर के माध्यम से की गई थी। उस समय नगरपालिका के हॉल में एक अलमारी, दो कुर्सी और एक टेबल के साथ इसकी शुरुआत हुई थी।
उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य सम्भल की जनता को ज्ञान से जोड़ना और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, ताकि लोग विभिन्न विषयों की किताबों से लाभ उठा सकें। आज इस लाइब्रेरी में लगभग 35 हजार किताबें मौजूद हैं, जिनमें उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की किताबें शामिल हैं। इसके अलावा कोर्स, प्रतियोगी परीक्षाओं, इतिहास, साहित्य, उपन्यास, शायरों के दीवान और सभी धर्मों से जुड़ी धार्मिक पुस्तकें भी यहां उपलब्ध हैं। लाइब्रेरी में नियमित रूप से अखबार और पत्रिकाएं भी आती हैं, जिससे पाठकों को देश-दुनिया की ताजा जानकारी मिलती रहती है। लाइब्रेरी का नाम बाद में उस समय के चेयरमैन नवाब आशिक हुसैन खां के नाम पर रखा गया। शुरुआत में लाइब्रेरी की अपनी कोई जमीन या भवन नहीं था, लेकिन बाद में नगर पालिका के चेयरमैन जरीफ हुसैन के कार्यकाल में मास्टर खलीक अहमद, जलाल अफसर, तस्दीक इलाही और सआदत अली सिद्दीकी सहित कई लोगों के प्रयास से नगरपालिका से जमीन अलाट कराई गई। शहर के लोगों के सहयोग से यहां दो मंजिला इमारत का निर्माण कराया गया। आज इस लाइब्रेरी के लगभग 2000 आजीवन सदस्य हैं और यह सम्भल के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है।
Also Read- Lucknow: यूपी सरकार व यामानाशी के बीच ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर ऐतिहासिक समझौता।
What's Your Reaction?











