Twisha Sharma Case : जबलपुर जिला अदालत में सरेंडर के दौरान आरोपी समर्थ सिंह ने की भागने की कोशिश, कोर्टरूम में वकीलों के बीच तीखी झड़प।
मध्य प्रदेश की न्यायधानी कहे जाने वाले जबलपुर से एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जिला अदालत
- एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव का बड़ा आरोप: आरोपी को भागने से रोकने पर विरोधी वकीलों ने दिया धक्का, जबलपुर कोर्ट परिसर में तनाव
- अदालती कार्यवाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तार-तार: जबलपुर न्यायालय में आरोपी के भागने के प्रयास के दावे के बाद वकीलों में हुआ भारी विवाद
मध्य प्रदेश की न्यायधानी कहे जाने वाले जबलपुर से एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जिला अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और वकीलों के आपसी तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबलपुर जिला कोर्ट के भीतर उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक संवेदनशील मामले के आरोपी समर्थ सिंह की आत्मसमर्पण (सरेंडर) प्रक्रिया चल रही थी। कोर्टरूम के भीतर मौजूद वकीलों के बीच अचानक शुरू हुई बहस ने देखते ही देखते एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि अदालती कार्यवाही और सरेंडर की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आरोपी समर्थ सिंह ने कानून की गिरफ्त से बचने के लिए कोर्टरूम से भागने की कोशिश की थी। इस कथित कोशिश के बाद अदालत कक्ष के भीतर दोनों पक्षों के वकीलों में तीखी झड़प हुई, जिससे कुछ समय के लिए न्यायिक कार्य भी प्रभावित हुआ। इस पूरी घटना के घटनाक्रम के अनुसार, आरोपी समर्थ सिंह अपने वकीलों की टीम के साथ नियमानुसार न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए जबलपुर जिला कोर्ट पहुंचा था। जैसे ही सरेंडर से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएं शुरू हुईं, वैसे ही कोर्टरूम के भीतर का माहौल अचानक गरमा गया। पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि आरोपी समर्थ सिंह ने अदालत की नजरों से बचकर पिछले दरवाजे या भीड़ का फायदा उठाकर वहां से रफूचक्कर होने का एक सोचे-समझे तरीके से प्रयास किया। अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने आरोपी की इस संदिग्ध गतिविधि को भांपा, उन्होंने तुरंत आगे बढ़कर उसे रोकने की कोशिश की। इसी दौरान आरोपी के बचाव में आए अन्य वकीलों ने विरोध किया, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि कोर्टरूम के भीतर ही वकीलों के दो गुट आमने-सामने आ गए और सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव के लिए आगे आना पड़ा।
विवाद की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोर्टरूम के भीतर मौजूद अन्य अधिवक्ताओं और वादियों के बीच इस हंगामे के कारण दहशत फैल गई। एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव का दावा है कि जब उन्होंने पूरी सजगता दिखाते हुए आरोपी समर्थ सिंह को कानून की कस्टडी से भागने से रोकने के लिए शारीरिक रूप से अवरोध पैदा किया, तो समर्थ के पक्ष से आए वकीलों ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव पक्ष के वकीलों ने उन्हें न केवल अपशब्द कहे बल्कि उनके साथ धक्का-मुक्की भी की, जिससे उन्हें चोट आते-आते बची। इस धक्का-मुक्की और हंगामे के कारण कोर्टरूम के भीतर का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया और न्यायाधीश के सामने ही कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके चलते अदालती कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। जिला कोर्ट परिसर में इस तरह की घटना होना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा अलार्म है। वकीलों के बीच कोर्टरूम के भीतर हुई इस धक्का-मुक्की के बाद बार एसोसिएशन और पुलिस प्रशासन दोनों ही इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।
इस घटना के तुरंत बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल और अतिरिक्त पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए ताकि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में किया जा सके। पीड़ित पक्ष के वकीलों का कहना है कि एक गंभीर आपराधिक मामले के आरोपी द्वारा न्यायालय के भीतर इस तरह की हिमाकत करना यह दर्शाता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं है। वहीं दूसरी ओर, आरोपी समर्थ सिंह के वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बचाव पक्ष का कहना है कि समर्थ सिंह खुद कानून का पालन करते हुए आत्मसमर्पण करने के लिए स्वेच्छा से कोर्ट आया था, ऐसे में उसके भागने की बात पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी है। उनके अनुसार, पीड़ित पक्ष के वकीलों ने जानबूझकर मामले को तूल देने और अदालत का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का हंगामा खड़ा किया है।
इस विवाद के बाद जबलपुर जिला अदालत परिसर में वकीलों के विभिन्न गुटों के बीच बैठक और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत स्थानीय पुलिस थाने और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि कोर्टरूम के भीतर एक अधिवक्ता के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि कोर्टरूम और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच की जानी चाहिए, जिससे यह पूरी तरह साफ हो सके कि सरेंडर प्रक्रिया के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और किसने किसको धक्का दिया था।
न्यायालय परिसर के भीतर हुई इस घटना ने जिला अदालत की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आए दिन अदालतों में होने वाले हंगामे और आरोपियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को देखते हुए स्थानीय वकीलों ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग तेज कर दी है। वकीलों का एक धड़ा इस बात पर जोर दे रहा है कि कोर्टरूम के भीतर केवल संबंधित पक्षों और उनके अधिकृत वकीलों को ही प्रवेश मिलना चाहिए, ताकि अनावश्यक भीड़ के कारण इस तरह की अप्रिय स्थितियां दोबारा पैदा न हों। पुलिस प्रशासन ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद ही आगे की उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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