मथुरा के दौलतपुर गांव ने साइबर ठगी के खिलाफ दिखाई एकजुटता, ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपे दर्जनों मोबाइल फोन। 

मथुरा जिले के गोवर्धन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला दौलतपुर गांव हाल ही में साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल के लिए चर्चा में

Jan 23, 2026 - 12:18
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मथुरा के दौलतपुर गांव ने साइबर ठगी के खिलाफ दिखाई एकजुटता, ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपे दर्जनों मोबाइल फोन। 
मथुरा के दौलतपुर गांव ने साइबर ठगी के खिलाफ दिखाई एकजुटता, ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपे दर्जनों मोबाइल फोन। 
  • मथुरा के गोवर्धन थाना क्षेत्र में दौलतपुर गांव ने साइबर अपराध के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, ग्रामीणों ने 68 मोबाइल फोन पुलिस को सौंपकर दी मिसाल
  • कभी साइबर फ्रॉड के लिए बदनाम रहा दौलतपुर गांव अब अपराध मुक्त होने की दिशा में, ग्रामीणों ने पुलिस के साथ मिलकर की कार्रवाई

मथुरा जिले के गोवर्धन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला दौलतपुर गांव हाल ही में साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल के लिए चर्चा में आया है। यह गांव पहले साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा हुआ माना जाता था, जहां से कई फ्रॉड कॉल्स और डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आती थीं। लेकिन अब गांव के निवासियों ने पुलिस के साथ सहयोग करके अपराध के खिलाफ मजबूत आवाज उठाई है। ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन पुलिस को सौंप दिए हैं। यह घटना 22 जनवरी 2026 को सामने आई, जब ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से इन उपकरणों को थाने में जमा किया। पुलिस ने इस सहयोग को साइबर अपराध पर करारा प्रहार बताया है।

कुछ दिन पहले गोवर्धन थाना पुलिस ने दौलतपुर गांव में एक जागरूकता बैठक आयोजित की थी। इस बैठक का उद्देश्य गांववासियों को साइबर अपराध के खतरों के बारे में जानकारी देना और उन्हें अपराध से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था। बैठक में ग्रामीणों ने भाग लिया और साइबर ठगी जैसी गतिविधियों को पूरी तरह रोकने का फैसला किया। बैठक के दौरान यह सहमति बनी कि गांव में ऐसे कोई भी कार्य नहीं होने चाहिए जो साइबर अपराध से जुड़े हों। ग्रामीणों ने अपराध छोड़ने की घोषणा की और पुलिस को पूर्ण सहयोग देने का वादा किया। इस जागरूकता अभियान का असर जल्द ही दिखाई देने लगा, क्योंकि ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से आगे बढ़कर कार्रवाई शुरू की।

इस जागरूकता के परिणामस्वरूप ग्रामीणों ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन इकट्ठा किए। कुल 68 मोबाइल फोन, जो मुख्य रूप से एंड्रॉइड आधारित थे, ग्रामीणों ने पुलिस को सौंप दिए। ये फोन उन गतिविधियों से जुड़े थे जो डिजिटल ठगी के लिए प्रयोग में लाए जाते थे। ग्रामीणों ने इन्हें स्वेच्छा से थाने में जमा किया, जो पुलिस की कार्रवाई के बाद का प्रत्यक्ष प्रभाव माना जा रहा है। पुलिस ने इन फोनों को प्राप्त करने के बाद उनकी जांच शुरू की है ताकि इनके माध्यम से हुए अपराधों की जानकारी प्राप्त की जा सके। यह कदम साइबर अपराध के नेटवर्क को कमजोर करने में सहायक साबित हो रहा है।

गांव में यह बदलाव तब आया जब पुलिस ने क्षेत्र में पहले से चल रही कार्रवाइयों को तेज किया। दिसंबर 2025 में गोवर्धन क्षेत्र के कई गांवों, जिनमें दौलतपुर भी शामिल था, में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई थी। उन छापेमारी में दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और मोबाइल फोन, सिम कार्ड तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। इन कार्रवाइयों से गांव के लोगों में जागरूकता बढ़ी और वे अपराध से अलग होने के लिए तैयार हुए। दौलतपुर सहित आसपास के गांवों को पहले 'मिनी जमतारा' की संज्ञा दी जाती थी, जहां से साइबर फ्रॉड के मामले सामने आते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

ग्रामीणों ने अपराध छोड़ने के लिए सामूहिक शपथ भी ली। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने धार्मिक ग्रंथों की कसम खाकर अपराध मुक्त जीवन अपनाने का संकल्प लिया। यह शपथ पंचायत में हुई, जहां पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने सहयोग का आश्वासन दिया। थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों को बुलाकर ग्रामीणों ने अपराध रोकने में मदद करने की प्रतिबद्धता जताई। इस शपथ के बाद बुधवार को फोन सौंपे गए, जो अभियान का एक निर्णायक हिस्सा था। पुलिस ने इस सहयोग को सराहनीय बताया और कहा कि इससे साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गई है। जहां पहले साइबर ठगी का जाल फैला हुआ था, वहीं अब अपराध के खिलाफ एकजुटता दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का यह कदम पुलिस की जागरूकता मुहिम और कार्रवाइयों का परिणाम है। पुलिस ने बताया कि ऐसे सहयोग से अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा और नेटवर्क कमजोर होगा। गांव के लोग अब अपराध मुक्त समाज बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह बदलाव न केवल दौलतपुर के लिए बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक है। साइबर अपराध के खिलाफ यह पहल जारी रहेगी। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत दें। इस घटना से साफ है कि सामुदायिक सहयोग से बड़े अपराधों पर भी नियंत्रण संभव है। दौलतपुर गांव अब अपराध के खिलाफ आवाज बन चुका है और मोबाइल फोन सौंपना इसका ठोस प्रमाण है।

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