एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स तय सीमा से ज्यादा पाए गए।

D-Mart से खरीदे गए सैंपल की जांच में सामने आई खामियां, लंबे समय तक सेवन से सेहत को हो सकता है नुकसान

Mar 10, 2026 - 13:04
Mar 10, 2026 - 13:05
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एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स तय सीमा से ज्यादा पाए गए।
एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स तय सीमा से ज्यादा पाए गए।

लोकप्रिय मसाला ब्रांड एवरेस्ट के चार उत्पाद क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए हैं। जांच में इन मसालों में खतरनाक बैक्टीरिया और कई पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) तय सीमा से अधिक मात्रा में पाए गए हैं, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।

जांच के लिए एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरीलाल चिली पाउडर और एवरेस्ट मीट मसाला के सैंपल लिए गए थे। ये सभी मसाले D-Mart से खरीदे गए थे। प्रत्येक उत्पाद के तीन-तीन बॉक्स खरीदे गए, जिनमें से एक-एक बॉक्स को लैब जांच के लिए भेजा गया।

इन मसालों में क्या मिला

जांच में चारों मसालों में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया तय सीमा से अधिक पाया गया। यह बैक्टीरिया समूह कई प्रकार के जीवाणुओं से मिलकर बना होता है, जिसमें ई.कोलाई, साल्मोनेला और क्लेबसिएला जैसे बैक्टीरिया शामिल होते हैं।

इसके अलावा कुछ मसालों में कई तरह के पेस्टिसाइड्स भी सुरक्षित सीमा से ज्यादा मात्रा में पाए गए।

1. एवरेस्ट गरम मसाला
इसमें दो पेस्टिसाइड्स – एसिटामिप्रिड और एज़ोक्सीस्ट्रोबिन – तय सीमा से अधिक पाए गए। साथ ही एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया भी सुरक्षित सीमा से ज्यादा मिला।

2. एवरेस्ट किचन किंग मसाला
इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया के साथ तीन पेस्टिसाइड्स – थियामेथॉक्सम, कार्बेन्डाज़िम/बेनोमिल और कार्बेन्डाज़िम – निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए।

3. एवरेस्ट कश्मीरीलाल चिली पाउडर
इसमें पेस्टिसाइड्स तो सुरक्षित सीमा के भीतर पाए गए, लेकिन एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया तय सीमा से ज्यादा मिला।

4. एवरेस्ट मीट मसाला
इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया के अलावा चार पेस्टिसाइड्स – एथियन, टेबुकोनाज़ोल, एज़ोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूओपायरम – सुरक्षित सीमा से अधिक पाए गए।

मसालों में बैक्टीरिया मिलने का क्या मतलब

डॉक्टरों के अनुसार एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया का अधिक मात्रा में मिलना इस बात का संकेत है कि मसालों को ठीक से सुखाया या साफ नहीं किया गया, या उनकी प्रोसेसिंग और हैंडलिंग में लापरवाही हुई है।

अगर ऐसे मसालों का लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे दस्त, पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइज़निंग और पेट के संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका खतरा खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में ज्यादा होता है।

पेस्टिसाइड्स से क्या खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार मसालों में अधिक पेस्टिसाइड्स का मतलब है कि खेती या प्रोसेसिंग के दौरान केमिकल्स का इस्तेमाल सही तरीके से नियंत्रित नहीं किया गया।

अगर लंबे समय तक ऐसे मसालों का सेवन किया जाए तो शरीर में पेस्टिसाइड्स जमा होकर लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • एसिटामिप्रिड नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और सिरदर्द या उल्टी की समस्या पैदा कर सकता है।

  • एज़ोक्सीस्ट्रोबिन लिवर और आंतों पर असर डाल सकता है।

  • थियामेथॉक्सम नसों पर असर डालकर चक्कर और कमजोरी का कारण बन सकता है।

  • एथियन से उल्टी, उबकाई और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि ये दिक्कतें तब ज्यादा होती हैं जब लंबे समय तक लगातार अधिक मात्रा में इन पेस्टिसाइड्स का सेवन किया जाए।

FSSAI मानकों पर खरे नहीं उतरे मसाले

जांच के नतीजों के अनुसार ये चारों मसाले FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे में यह मामला खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

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