बेंगलुरु प्राइवेट स्कूल में टीचर पर बच्चे को थप्पड़ मारने का आरोप, दूसरी कक्षा के छात्र को मैथ सवाल न बता पाने पर महिला टीचर ने मारा थप्पड़।
बेंगलुरु के डोड्डनागमंगला इलाके में एक प्राइवेट स्कूल में हुई घटना ने समाज में हंगामा मचा दिया है, जहां एक महिला स्कूल टीचर पर
बेंगलुरु के डोड्डनागमंगला इलाके में एक प्राइवेट स्कूल में हुई घटना ने समाज में हंगामा मचा दिया है, जहां एक महिला स्कूल टीचर पर दूसरी कक्षा के सात वर्षीय छात्र को मैथ का सवाल न बता पाने पर थप्पड़ मारने और मारपीट करने का आरोप लगा है। पुलिस ने टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जो भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आता है। घटना 2 मार्च 2026 को दोपहर के समय हुई, जब टीचर ने बच्चे से मैथ का एक सवाल पूछा लेकिन बच्चा जवाब नहीं दे सका। इस पर टीचर ने कथित तौर पर बच्चे के कान मरोड़े, चेहरे पर थप्पड़ मारा और लकड़ी के डंडे से कंधे पर चोट पहुंचाई। इसके अलावा टीचर ने बच्चे को अपशब्द भी कहे, जिससे बच्चा डर गया और घर आने पर अपनी मां को पूरी घटना बताई। बच्चे की मां ने 5 मार्च को डोड्डनागमंगला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जहां बच्चे के शरीर पर निशान देखकर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। यह मामला स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली मारपीट और शारीरिक दंड के खिलाफ चल रही बहस को फिर से तेज कर देता है, क्योंकि कानूनन स्कूलों में कोई भी शारीरिक सजा प्रतिबंधित है।
घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और स्कूल प्रबंधन से बयान लिए गए। बच्चे के अभिभावकों ने बताया कि घटना के बाद उनका बेटा बहुत डरा हुआ है और स्कूल जाने से कतराता है। बच्चे के चेहरे पर थप्पड़ के निशान और कंधे पर चोट के निशान स्पष्ट थे, जिसे डॉक्टरों ने जांचा और मेडिकल रिपोर्ट तैयार की। पुलिस ने बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें चोटों की पुष्टि हुई। टीचर ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया है। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, क्योंकि पीड़ित नाबालिग है। स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और आवश्यक कदम उठाएंगे, लेकिन अभी तक टीचर को निलंबित करने या कोई अन्य कार्रवाई की जानकारी नहीं आई है। यह घटना शहर के अन्य स्कूलों में भी चिंता पैदा कर रही है, जहां अभिभावक अब बच्चों की सुरक्षा पर अधिक सतर्क हो गए हैं।
इनसेट: पुलिस का प्रारंभिक बयान पुलिस ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल से संपर्क किया गया है और टीचर से पूछताछ की जा रही है।
बच्चे के अभिभावकों ने बताया कि घटना से उनका बेटा मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बच्चा पहले से ही स्कूल जाना पसंद करता था लेकिन अब रात में डर के मारे जाग जाता है और टीचर का नाम सुनते ही रोने लगता है। अभिभावकों का कहना है कि टीचर ने न केवल शारीरिक चोट पहुंचाई बल्कि अपशब्द कहकर बच्चे की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। बच्चे की मां ने शिकायत में लिखा कि टीचर ने बच्चे को डांटा और कहा कि वह बेवकूफ है और कुछ नहीं सीख सकता। इस तरह के व्यवहार से बच्चे का आत्मविश्वास टूट गया है और परिवार अब स्कूल बदलने पर विचार कर रहा है। मेडिकल रिपोर्ट में बच्चे के कान पर लाल निशान और कंधे पर सूजन दर्ज की गई है, जो मारपीट की पुष्टि करती है। पुलिस ने स्कूल के अन्य छात्रों और स्टाफ से भी बयान लिए हैं ताकि पूरी घटना की पुष्टि हो सके।
यह घटना स्कूलों में शारीरिक दंड के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को याद दिलाती है। भारत में राइट टू एजुकेशन एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत स्कूलों में किसी भी तरह की शारीरिक सजा प्रतिबंधित है। शिक्षकों को बच्चों को प्रोत्साहित करने और सकारात्मक तरीके से पढ़ाने की जिम्मेदारी है, लेकिन कई मामलों में पुरानी सोच के कारण मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बेंगलुरु जैसे शिक्षा केंद्र में ऐसी घटनाएं बच्चों के अधिकारों पर सवाल उठाती हैं और अभिभावकों में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टीचर ट्रेनिंग में बच्चों के साथ व्यवहार और भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
पुलिस जांच में स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है। अगर प्रबंधन को पहले से ऐसी शिकायतें मिली थीं तो उनकी लापरवाही भी सामने आ सकती है। बच्चे के परिवार ने स्कूल से माफी और उचित कार्रवाई की मांग की है, साथ ही बच्चे को मनोवैज्ञानिक मदद की व्यवस्था करने को कहा है। घटना के बाद स्थानीय अभिभावक संघ ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों की मांग की। पुलिस ने स्कूल को नोटिस जारी किया है कि वे जांच में सहयोग करें और टीचर को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से दूर रखें।
What's Your Reaction?











