ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग का 5वां दिन: खामेनेई के बाद मोजतबा की ताजपोशी, ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ से पलटवार, खाड़ी में उड़ानें ठप—भारत पर तेल संकट का खतरा

मध्य-पूर्व में जंग का पांचवां दिन और भी ज्यादा भयावह होता जा रहा है। इजराइल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और सैन्य

Mar 4, 2026 - 23:37
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ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग का 5वां दिन: खामेनेई के बाद मोजतबा की ताजपोशी, ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ से पलटवार, खाड़ी में उड़ानें ठप—भारत पर तेल संकट का खतरा

मध्य-पूर्व में जंग का पांचवां दिन और भी ज्यादा भयावह होता जा रहा है। इजराइल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और सैन्य टारगेट्स पर हमले तेज कर दिए हैं, वहीं ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन अटैक के जरिए जवाबी कार्रवाई की है। हालात ऐसे हैं कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

  • खामेनेई की मौत, मोजतबा बने नए सुप्रीम लीडर

पिछले हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद सत्ता परिवर्तन हो गया है। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इजराइल ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी ईरानी नेता इजराइल को धमकी देगा, उसे निशाना बनाया जाएगा।

  • ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ से ईरान का पलटवार

ईरान ने “ट्रू प्रॉमिस 4” ऑपरेशन के तहत बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

दूसरी ओर, इजराइल का कहना है कि उसने ईरान के कई संवेदनशील सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। युद्ध में अब तक ईरान में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें हैं, जबकि दोनों पक्ष अपने-अपने नुकसान को सीमित बताने की कोशिश कर रहे हैं।

  • खाड़ी देशों पर असर, उड़ानें प्रभावित

तनाव का असर खाड़ी देशों — संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और ओमान — पर भी साफ दिख रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गई हैं। एयरस्पेस पर खतरे के चलते यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

  • भारत का रेस्क्यू मिशन, PM मोदी की कूटनीति

भारत ने 58 से ज्यादा विशेष उड़ानों के जरिए हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकाला है। इस अभियान को “ऑपरेशन सिंधु” जैसे पिछले अभियानों की तर्ज पर अंजाम दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं से फोन पर बात कर क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन न करने की अपील की है। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना है।

  • तेल संकट की आशंका, होर्मुज बना बड़ा जोखिम

तेल आपूर्ति पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, वहां तनाव बढ़ने से भारत के आयात रूट प्रभावित हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत रूस से अधिक कच्चा तेल खरीदने की रणनीति पर विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में घरेलू बाजार को स्थिर रखा जा सके।

  • आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान, तेल अवीव और वॉशिंगटन पर टिकी हैं — क्या कूटनीति रास्ता निकालेगी या जंग और भयावह होगी, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

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