मशहूर वेब सीरीज 'पंचायत' के विकास बाबू यानी अभिनेता चंदन रॉय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गाड़े झंडे, नई फिल्म 'आरजे बस्तर' के साथ मचाया धमाल

फिल्म के निर्माण और इसके तकनीकी पक्षों को भी बेहद उच्च स्तर का रखा गया है ताकि बस्तर की वास्तविक वादियों और वहां के माहौल को बिना किसी बनावट के सिनेमाई पर्दे पर पेश किया जा सके। कान फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के दौरान फिल्म के निर्देशन, कसी हुई पटकथा और बैकग्रा

By INA News Desk
May 24, 2026 - 12:28
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मशहूर वेब सीरीज 'पंचायत' के विकास बाबू यानी अभिनेता चंदन रॉय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गाड़े झंडे, नई फिल्म 'आरजे बस्तर' के साथ मचाया धमाल
मशहूर वेब सीरीज 'पंचायत' के विकास बाबू यानी अभिनेता चंदन रॉय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गाड़े झंडे, नई फिल्म 'आरजे बस्तर' के साथ मचाया धमाल
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  • फ्रांस के प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल 2026 में हुआ चंदन रॉय की 'आरजे बस्तर' का शानदार प्रीमियर, वैश्विक स्तर पर दर्शकों ने की जमकर सराहना
  • फूलेरा गांव के सीधे-साधे सचिव सहायक का अब बड़े पर्दे पर दिखेगा एकदम अनोखा और चुनौतीपूर्ण अवतार, बस्तर की पृष्ठभूमि पर आधारित है कहानी

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी सादगी और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाने वाले अभिनेता चंदन रॉय इन दिनों अपनी कलात्मक यात्रा के एक बेहद स्वर्णिम दौर से गुजर रहे हैं। लोकप्रिय वेब सीरीज 'पंचायत' में 'विकास बाबू' के अपने सीधे-साधे और वफादार किरदार से घर-घर में मशहूर हुए चंदन रॉय अब अपनी आगामी मुख्यधारा की फीचर फिल्म 'आरजे बस्तर' को लेकर चारों तरफ जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए चंदन एक ऐसे नए और अनूठे अवतार में नजर आने वाले हैं, जिसकी कल्पना उनके प्रशंसकों ने पहले कभी नहीं की होगी। यह फिल्म न केवल उनके अभिनय के विभिन्न नए आयामों को प्रदर्शित करेगी, बल्कि उनके करियर ग्राफ को भी एक नई और ऊंची दिशा में ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रही है।

चंदन रॉय के करियर और इस फिल्म के लिए सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी तब सामने आई, जब 'आरजे बस्तर' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले कान फिल्म फेस्टिवल 2026 में प्रदर्शित करने के लिए चुना गया। फ्रांस के तटीय शहर कान में आयोजित इस वैश्विक सिनेमाई महाकुंभ में फिल्म का बेहद भव्य और सफल प्रीमियर संपन्न हुआ है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समीक्षकों, फिल्म निर्माताओं और दुनिया भर से आए सिनेमा प्रेमियों के सामने जब इस फिल्म को पर्दे पर उतारा गया, तो वहां मौजूद हर कोई इसके कथानक और चंदन रॉय के सधे हुए अभिनय से बेहद प्रभावित नजर आया। एक क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से निकलकर सीधे वैश्विक मंच के रेड कार्पेट तक का यह सफर चंदन रॉय की कड़ी मेहनत और उनकी अद्भुत अभिनय प्रतिभा का जीवंत प्रमाण है।

इस फिल्म की पूरी कहानी भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित आदिवासी बहुल और प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध लेकिन कई सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे बस्तर क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में बस्तर के स्थानीय जनजीवन, वहां की अनूठी संस्कृति और वहां के लोगों के दैनिक संघर्षों को बहुत ही संवेदनशीलता और प्रामाणिकता के साथ पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया है। चंदन रॉय इस फिल्म में एक ऐसे केंद्रीय और जटिल चरित्र को जीवंत कर रहे हैं, जो परिस्थितियों के भंवर में फंसकर भी अपनी आवाज बुलंद रखता है। यह किरदार उनके पिछले हास्य और हल्के-फुल्के रोल्स से पूरी तरह विपरीत है, जिसके लिए उन्हें अपनी शारीरिक भाषा से लेकर संवाद अदायगी के लहजे पर भी बहुत गहरी और विशेष मेहनत करनी पड़ी है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय कहानियों का डंका

कान जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक फिल्म समारोहों में भारत के सुदूर और वास्तविक अंचलों जैसे बस्तर की कहानियों का पहुंचना और वहां सराहना पाना इस बात को साबित करता है कि सिनेमा में जब प्रामाणिकता होती है, तो वह भाषा और भूगोल की सीमाओं को आसानी से लांघ जाता है।

फिल्म के निर्माण और इसके तकनीकी पक्षों को भी बेहद उच्च स्तर का रखा गया है ताकि बस्तर की वास्तविक वादियों और वहां के माहौल को बिना किसी बनावट के सिनेमाई पर्दे पर पेश किया जा सके। कान फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के दौरान फिल्म के निर्देशन, कसी हुई पटकथा और बैकग्राउंड स्कोर की खूब तारीफ हुई है। चंदन रॉय ने इस फिल्म में काम करने के अपने अनुभव को बेहद चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक बताया है। उनका मानना है कि एक कलाकार के रूप में जब आपको अपनी स्थापित छवि से बाहर निकलकर कुछ ऐसा करने का मौका मिलता है जो समाज की हकीकत को बयां करता हो, तो वह अनुभव आपको आंतरिक रूप से बहुत समृद्ध और परिपक्व बना देता है।

'पंचायत' सीरीज में सचिव जी के सहायक विकास का किरदार निभाने के बाद से ही चंदन रॉय को लगातार एक ही तरह के ग्रामीण और सीधे किरदारों के ऑफर मिल रहे थे। हालांकि, उन्होंने टाइपकास्ट होने के खतरे को भांपते हुए बहुत ही सोच-समझकर 'आरजे बस्तर' जैसी समानांतर और गंभीर सिनेमाई परियोजना का हिस्सा बनना स्वीकार किया। इस फिल्म के माध्यम से वह मनोरंजन उद्योग को यह कड़ा संदेश देने में सफल रहे हैं कि उनकी अभिनय क्षमता केवल किसी एक विशेष शैली या किरदार तक सीमित नहीं है। वह जितने सहज तरीके से किसी कॉमेडी दृश्य में दर्शकों को हंसा सकते हैं, उतनी ही शिद्दत के साथ वे किसी गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर आधारित फिल्म को अपने कंधों पर आगे बढ़ा सकते हैं।

वैश्विक प्रीमियर की इस अपार सफलता के बाद अब इस फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों और विभिन्न घरेलू फिल्म समारोहों में रिलीज करने की तैयारियां बहुत तेजी से शुरू कर दी गई हैं। फिल्म के निर्माता-निर्देशक कान फेस्टिवल से मिले इस सकारात्मक रिस्पॉन्स और वैश्विक पहचान का उपयोग देश के भीतर फिल्म के पक्ष में एक मजबूत माहौल तैयार करने के लिए करना चाहते हैं। भारतीय दर्शकों के बीच भी अब 'आरजे बस्तर' को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, क्योंकि हर कोई अपने चहेते विकास बाबू को एक बेहद गंभीर और विद्रोही या पूरी तरह से अलग रंग में देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इस फिल्म से जुड़े अन्य सह-कलाकारों और क्रू मेंबर्स के नामों का भी जल्द ही बड़े स्तर पर अनावरण किया जाएगा।

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