संभल में उर्स की रौनक चरम पर: मल्लक शाह बाबा के कुल शरीफ में उमड़े अकीदतमंद, शाह अली मुक्तकी दरगाह पर भी शुरू हुआ सालाना उर्स
सम्भल में सूफी परंपरा और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए हजरत बाबा मल्लक शाह रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में सूफी परंपरा और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए हजरत बाबा मल्लक शाह रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स का समापन कुल शरीफ के साथ होगा। उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन ने पहुंचकर चादरपोशी की और मुल्क, प्रदेश तथा सम्भल शहर में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
समाजवादी पार्टी के जिला सचिव सईद अख्तर इसराइली ने दरगाह पर हाजिरी देकर कहा कि उन्होंने देश, प्रदेश और खासकर सम्भल में शांति, सौहार्द और कारोबार की तरक्की के लिए दुआ की है। उन्होंने बीमारों की सेहत, बेरोजगारों को रोजगार और परेशान लोगों की मुश्किलें दूर होने की भी दुआ मांगी। वहीं खुर्रम वारसी ने कहा कि उर्स के मौके पर सभी अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन और भाईचारा कायम रहने की दुआ की। दरगाह के मुतवल्ली ज़रीफ़ अहमद ने बताया कि चार दिवसीय उर्स के दौरान मिलाद शरीफ और कव्वाली के कार्यक्रम आयोजित किए गए। रविवार सुबह को कुल शरीफ और गुस्ल की रस्म अदा की गई। उन्होंने बताया कि दरगाह पर दूर-दराज़ से लोग मन्नतें लेकर आते हैं और उनकी मुरादें पूरी होने की मान्यता है।
उधर मंडी किशन दास सराय स्थित हजरत शाह अली मुक्तकी रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स का भी आगाज हो गया। आयोजन समिति से जुड़े मौहम्मद उमर ने बताया कि उर्स के दौरान लंगर, कव्वाली और नियाज़ के कार्यक्रम होंगे। 14, 15 और 16 जून को विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे, जबकि 16 जून को कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। दोनों दरगाहों पर उर्स के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने गंगा-जमुनी तहजीब, सूफी परंपरा और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
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