Saharanpur : सहारनपुर कांग्रेस में सामने आई गुटबाजी, आगामी चुनावों से पहले संगठन की एकता पर उठे सवाल और सांसद इमरान मसूद ने किया बड़ा एलान
इसी बीच शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनीष त्यागी की अगुवाई में जिला मुख्यालय पर एक प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर इकाई के कार्यकर्ता तो बड़ी संख्या में मौजूद रहे, लेकिन जिला स्तर के पदाधिकारियों की उपस्थिति बहुत कम दिखी। इससे पार्टी के भीतर की खींचतान
कांग्रेस पार्टी का बड़ा नेतृत्व जहां एक तरफ संगठन को मजबूत करने में लगा है, वहीं सहारनपुर में पार्टी के भीतर जिला और शहर इकाई के बीच बढ़ती दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के स्तर पर दिखाई दे रही यह फूट राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है। पिछले करीब एक महीने से जिले में कांग्रेस के कार्यक्रमों के दौरान यह साफ तौर पर देखा गया है कि पार्टी कार्यकर्ता अलग-अलग गुटों में काम कर रहे हैं। जिला स्तर के कार्यक्रमों में शहर इकाई के लोग कम नजर आते हैं, जबकि शहर इकाई के कार्यक्रमों में जिला संगठन के पदाधिकारियों की मौजूदगी बहुत कम रहती है। राजनीति को समझने वाले लोग इसे आपसी तालमेल की कमी मान रहे हैं।
इसी बीच शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनीष त्यागी की अगुवाई में जिला मुख्यालय पर एक प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर इकाई के कार्यकर्ता तो बड़ी संख्या में मौजूद रहे, लेकिन जिला स्तर के पदाधिकारियों की उपस्थिति बहुत कम दिखी। इससे पार्टी के भीतर की खींचतान को और हवा मिल गई है। कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और दौरा प्रभारी राजबहादुर के आदेशों की अनदेखी करने की बात भी सामने आई है। राजबहादुर ने प्रदेश स्तर से पत्र जारी करके पूरे राज्य में महोबा की घटना के विरोध में जिला और शहर के कार्यकर्ताओं को मिलकर प्रदर्शन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस विरोध प्रदर्शन से जिला कांग्रेस पूरी तरह अलग रही। इसे कांग्रेस में बड़ी फूट का संकेत माना जा रहा है।
दूसरी तरफ, सांसद इमरान मसूद का रुख भी पहले के मुकाबले बदला हुआ नजर आया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ कर दिया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव में उन कार्यकर्ताओं को मौका और सम्मान दिया जाएगा जिन्होंने पिछले चुनाव में कड़ी मेहनत करके पार्टी को जीत दिलाई थी। सांसद इमरान मसूद का यह एलान कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। गठबंधन को लेकर सांसद ने कहा कि सीटों के बंटवारे और गठबंधन का आखिरी फैसला पार्टी का बड़ा नेतृत्व तय करेगा और वह पार्टी के फैसले के मुताबिक संगठन को मजबूत करने तथा चुनावी तैयारी में अपनी भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व जिले में दिख रही इस गुटबाजी को समय रहते कैसे संभालता है?
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