इजराइल का दावा: 2500 से अधिक ठिकानों पर हमले किये, ईरान की 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणाली नष्ट।
मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच छिड़े संघर्ष को आज आठवें दिन में प्रवेश कर गया है, और दोनों पक्षों की ओर से हमलों की
- मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध का आठवां दिन, हमलों की तीव्रता में वृद्धि
- ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की, क्षेत्रीय संकट गहराया
मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच छिड़े संघर्ष को आज आठवें दिन में प्रवेश कर गया है, और दोनों पक्षों की ओर से हमलों की गति और तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है। संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना और शासन परिवर्तन को बढ़ावा देना था। शुरुआती हमलों में अमेरिका और इजराइल ने लगभग 900 ठिकानों पर हमले किए, जिसमें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई, जो संघर्ष की शुरुआत में ही एक बड़ा झटका साबित हुआ। इन हमलों में अमेरिका ने टॉमहॉक मिसाइलों, एफ-18 और एफ-35 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया, जबकि इजराइल ने अपने वायुसेना के माध्यम से ईरान के मिसाइल ठिकानों, वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए, जो इजराइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों तक पहुंचे। संघर्ष में अब तक ईरान में 1332 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जबकि इजराइल में 11 और लेबनान में 31 लोगों की जान गई है। अमेरिका ने अपने केंद्रीय कमान के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के माध्यम से कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 83 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन ईरान ने अपनी रणनीति बदलकर छोटे लेकिन लगातार हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के 2500 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणालियां नष्ट हो चुकी हैं, और 300 से अधिक मिसाइल लांचरों को तबाह किया गया है।
संघर्ष के आठवें दिन इजराइल ने ईरान पर एक और बड़े पैमाने पर हमलों की लहर शुरू की, जिसमें तेहरान और बेरूत दोनों जगहों पर हमले किए गए। इजराइली सैन्य प्रमुख ने कहा कि वे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की ओर बढ़ रहे हैं, और अब तक 6000 से अधिक टन बम गिराए जा चुके हैं। ईरान के दक्षिणी और उत्तरी मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें इस्फहान, काशान, देजफुल और ताबरीज जैसे मिसाइल बेस शामिल हैं। इजराइल का दावा है कि उसने खामेनेई के बंकर को भी तबाह कर दिया है, जहां से ईरानी नेतृत्व हमलों का निर्देशन कर रहा था। अमेरिका ने अपने सेंट्रल कमांड से कहा कि वे ईरान के नौसेना को गंभीर नुकसान पहुंचा चुके हैं, जिसमें 30 जहाज डुबोए गए हैं और एक ड्रोन जहाज को आग लगाई गई है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान पर हमलों की तीव्रता और बढ़ेगी, और अमेरिका इस संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता रखता है। ईरान ने जवाब में इराक, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए, जिसमें अल उदीद एयर बेस, अल धफरा एयर बेस और अन्य स्थानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने अपनी रणनीति बदलकर बड़े हमलों की बजाय छोटे लेकिन बार-बार हमले शुरू किए हैं, जिससे इजराइल और अमेरिका की वायु रक्षा प्रणालियां लगातार व्यस्त रह रही हैं।
- संघर्ष के प्रमुख हमले
अमेरिका-इजराइल ने ईरान के 900 से अधिक ठिकानों पर शुरुआती हमले किए। ईरान ने इजराइल पर 7 बैलिस्टिक मिसाइल बैराज दागे। इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमले तेज किए। संघर्ष का विस्तार अब लेबनान और अन्य क्षेत्रों तक पहुंच गया है, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले तेज कर दिए हैं। हिजबुल्लाह ने इजराइल पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इजराइल ने बेरूत और बेका वैली में हमले किए, जिसमें हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर और हथियार डिपो नष्ट किए गए। हिजबुल्लाह ने इजराइल के हाइफा नौसेना बेस पर रॉकेट हमला किया, लेकिन इजराइल ने दो ड्रोनों को मार गिराया। संघर्ष में यूरोपीय देशों की सेनाएं भी सक्रिय हो गई हैं, क्योंकि ईरान ने साइप्रस पर हमले किए, जहां ब्रिटिश सैन्य ठिकाने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को बिना शर्त समर्पण करना होगा, और संघर्ष को चार से पांच सप्ताह तक चलाने की क्षमता है। ट्रंप ने ईरान पर हमलों को हर घंटे जारी रखने का दावा किया, जबकि ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि वे अमेरिकी आक्रमण का मुकाबला करने में सक्षम हैं। संघर्ष से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
संघर्ष के मानवीय प्रभाव गंभीर हैं, जहां ईरान में स्कूलों और आवासीय इलाकों पर हमलों से सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। अमेरिका-इजराइल के हमलों में मिनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 168 से अधिक मौतें हुईं, हालांकि इजराइल ने इसमें अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। ईरान ने कहा कि यह हमला मानवता के खिलाफ है और जांच की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से तत्काल डी-एस्केलेशन की अपील की है, जबकि सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में हमलों को अवैध बताया गया है। ईरान ने अंतरिम नेतृत्व परिषद गठित की है, लेकिन ट्रंप ने कहा कि ईरान में कौन शासक होगा, उसमें अमेरिका का बड़ा रोल होगा। संघर्ष से क्षेत्रीय सहयोगी देश जैसे बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी प्रभावित हुए हैं, जहां ईरानी मिसाइलों से हमले हुए। संघर्ष की शुरुआत से अब तक अमेरिका और इजराइल ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई से क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है। इजराइल ने कहा कि वह ईरान के साथ युद्ध की अगली चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां ग्राउंड ऑपरेशन की संभावना बढ़ गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि यह संघर्ष अभी शुरू हुआ है और ईरान की नौसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। ईरान ने अपनी मिसाइल रणनीति बदलकर छोटे हमलों पर फोकस किया है, जिससे दैनिक हमले कम हुए हैं लेकिन निरंतर दबाव बना रहा है। संघर्ष से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है, जहां संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन डी-एस्केलेशन की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना मुख्य लक्ष्य है, लेकिन ईरान ने कहा कि हमले अवैध हैं और वे आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहे हैं। संघर्ष से तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, और हवाई यात्रा प्रभावित हुई है।
What's Your Reaction?











