Agra: फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक तेरहमोरी बांध उपेक्षा का शिकार, जल संचय के लिए पुनर्जीवित करने की उठी मांग। 

पानी की किल्लत से जूझ रहे जिले के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक तेरहमोरी बांध को फिर से जल संचय के योग्य बनाने की

Mar 9, 2026 - 20:12
 0  15
Agra: फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक तेरहमोरी बांध उपेक्षा का शिकार, जल संचय के लिए पुनर्जीवित करने की उठी मांग। 
फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक तेरहमोरी बांध उपेक्षा का शिकार, जल संचय के लिए पुनर्जीवित करने की उठी मांग। 

आगरा। पानी की किल्लत से जूझ रहे जिले के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक तेरहमोरी बांध को फिर से जल संचय के योग्य बनाने की मांग तेज हो गई है। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की एक टीम ने क्षेत्र का अध्ययन कर बताया कि यदि बांध के क्षतिग्रस्त सुलूस (Sluice) गेटों की मरम्मत कर दी जाए तो यह बांध एक बार फिर क्षेत्र के जल संकट को काफी हद तक दूर कर सकता है।

टीम के अनुसार उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के प्रबंधन वाला यह बांध जिले की सबसे अधिक जल संचय क्षमता रखने वाली संरचनाओं में शामिल है, लेकिन पिछले करीब 40 वर्षों से यह उपेक्षा के कारण निष्प्रयोज्य बना हुआ है। मानसून के दौरान यहां पर्याप्त पानी पहुंचता है, लेकिन गेट क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी रुक नहीं पाता और बहकर निकल जाता है।

सिंचाई विभाग ने नहीं बनाई कार्ययोजना

बताया गया कि वर्ष 1972 में ओवरफ्लो के दबाव से बांध की दो मोरियां बंद हो गई थीं। इसके बाद उन्हें ठीक कराने के बजाय विभाग ने इस संरचना को ही उपेक्षित छोड़ दिया। आश्चर्य की बात यह है कि अब तक इसकी मरम्मत और पुनर्जीवन के लिए कोई कार्ययोजना भी प्रस्तावित नहीं की गई है। जब योजना ही नहीं बनी तो शासन से बजट स्वीकृति और धनराशि मिलने का सवाल भी नहीं उठता।

स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र से मिलता है भरपूर पानी

हालांकि राजस्थान की ओर से अजान बांध से पानी छोड़ा जाना बंद हो चुका है, फिर भी रसूलपुर, सीकरी हिस्सा चतुर्थ, नगर, दादूपुरा और पतसाल सहित एक दर्जन से अधिक गांवों का वर्षा जल तेरहमोरी बांध तक पहुंचता है। लेकिन गेट खराब होने के कारण जल संचय संभव नहीं हो पाता, जिससे भूजल रिचार्ज भी नहीं हो रहा।

किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून में पानी रोककर बाद में नियंत्रित तरीके से छोड़ा जाए तो इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और क्षेत्र का भूजल स्तर भी सुधरेगा। साथ ही राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाओं का असर भी कम होगा।

टीटीजेड क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण

बांध के सूखे रहने से ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) क्षेत्र में राजस्थान से आने वाली धूल भरी हवाओं का असर बढ़ जाता है। इन हवाओं में मौजूद सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (SPM) और पीएम10 व पीएम2.5 जैसे कण पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं।

‘शाही तालाब’ अब भी देता है पानी

फतेहपुर सीकरी के ग्वालियर गेट के पास स्थित ऐतिहासिक ‘शाही तालाब’ में आज भी वर्षभर पानी रहता है। यह तालाब आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से भरता है और स्थानीय किसान इसका उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। हालांकि इसका जल संचय क्षेत्र सीमित है।

नागरिकों की मांग—जल्द हो पुनर्जीवन

स्थानीय निवासी और किसान अमरनाथ पाराशर का कहना है कि फतेहपुर सीकरी की स्थलाकृति ढलान वाली है, जिससे अधिकांश वर्षा जल प्राकृतिक रूप से तेरहमोरी बांध की ओर आता है। यदि इस जल का सही प्रबंधन किया जाए तो बांध का जलस्तर हिरन मीनार तक फैल सकता है।

पत्रकार महावीर वर्मा के अनुसार तेरहमोरी बांध को एक बार फिर जल संचय के योग्य बना दिया जाए तो इससे न केवल भूजल रिचार्ज होगा बल्कि खारी नदी में भी मानसून के बाद जल प्रवाह बना रहेगा, जिससे किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी।

अकबर काल में बना था विशाल जलाशय

इतिहासकारों के अनुसार मुगल सम्राट अकबर के समय इस जल संरचना को विशाल झील और रेगुलेटर के रूप में विकसित किया गया था। उस समय ‘सीकरी झील’ या ‘गुलाबी झील’ के नाम से प्रसिद्ध यह जलाशय लगभग 32 किलोमीटर क्षेत्र में फैला था और शहर की जल आपूर्ति के साथ-साथ किले की उत्तरी दिशा की प्राकृतिक सुरक्षा भी करता था।

अध्ययन में शामिल रहे ये सदस्य

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की अध्ययन टीम में अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, राजेंद्र शुक्ला और असलम सलीमी शामिल रहे।

Also Read- Lucknow: महिलाओं की प्रतिभा से चमका सरस मेला, बोले उपमुख्यमंत्री – ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं महिलाएं ।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।