रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आसमान में चार चांद दिखने की दुर्लभ खगोलीय घटना ने लोगों को हैरान कर दिया।
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में एक रात आसमान में चार चांद दिखाई देने की दुर्लभ घटना घटी। यह घटना एक फरवरी दो हजार छब्बीस की रात हुई जब
- बर्फ के क्रिस्टलों ने चांद की रोशनी को मोड़कर बनाए नकली चांद का अनोखा नजारा सेंट पीटर्सबर्ग में।
- पैरासेलेनी या मून डॉग घटना ने सेंट पीटर्सबर्ग में रचा खगोलीय चमत्कार ठंडी हवा में बर्फ के क्रिस्टल।
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में एक रात आसमान में चार चांद दिखाई देने की दुर्लभ घटना घटी। यह घटना एक फरवरी दो हजार छब्बीस की रात हुई जब ठंडी हवा में मौजूद बर्फ के क्रिस्टल ने चांद की रोशनी को मोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि असली चांद के साथ नकली चांद जैसे चमकीले धब्बे बन गए जिससे एक साथ चार चांद नजर आए। लोग इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने लगे। यह कोई असली अतिरिक्त चांद नहीं थे बल्कि वायुमंडलीय ऑप्टिकल प्रभाव था।
इस घटना को पैरासेलेनी या मून डॉग कहा जाता है जिसे मॉक मून भी कहते हैं। घटना फरवरी एक दो हजार छब्बीस की रात को हुई जब सेंट पीटर्सबर्ग में सर्द मौसम था। आसमान में पतली ऊंची सिरस बादलों में बर्फ के क्रिस्टल मौजूद थे। चांद की रोशनी इन क्रिस्टलों से गुजरते हुए मुड़ी और चमकीले धब्बे बन गए।
घटना का समय और स्थान घटना फरवरी एक दो हजार छब्बीस की रात हुई। स्थान रूस का सेंट पीटर्सबर्ग शहर था। सर्द रात में ठंडी हवा मौजूद थी। लोगों ने इस दृश्य को कैमरे में रिकॉर्ड किया। दृश्य कुछ मिनटों तक रहा। आसमान में चार चमकीले गोले दिखे।
चांद की रोशनी जब इन क्रिस्टलों से गुजरती है तो प्रकाश की किरणें मुड़ जाती हैं। क्रिस्टल सपाट प्लेट आकार के षट्कोणीय होते हैं। रोशनी इनसे गुजरकर बाईं और दाईं तरफ बाईस डिग्री के कोण पर चमकीले धब्बे बनाती है। साधारण रूप से दो मॉक मून बनते हैं लेकिन इस बार क्रिस्टलों की विशेष व्यवस्था के कारण चार दिखे। क्रिस्टल हल्के से हिल रहे थे जिससे ऊर्ध्वाकार विस्तार भी हुआ।
वैज्ञानिक व्याख्या रोशनी बर्फ के क्रिस्टलों से गुजरकर मुड़ती है। क्रिस्टल षट्कोणीय प्लेट आकार के होते हैं। मुड़ने का कोण बाईस डिग्री है। सिरस बादलों में क्रिस्टल ऊंचाई पर होते हैं। ऊंचाई लगभग छह किलोमीटर है। यह प्रभाव पैरासेलेनी कहलाता है।
सेंट पीटर्सबर्ग में सर्दियों में तापमान बहुत कम होता है। हवा में नमी जमकर बर्फ के क्रिस्टल बन जाते हैं। ये क्रिस्टल ऊंचे सिरस या सिर्रोस्ट्रेटस बादलों में लटके रहते हैं। चांद की रोशनी जब इनसे टकराती है तो अपवर्तन होता है। अपवर्तन से प्रकाश की किरणें अपनी दिशा बदलती हैं। बाईस डिग्री कोण पर क्रिस्टल रोशनी को मोड़ते हैं। इससे असली चांद के बगल में चमकदार बिंदु बनते हैं।
इस घटना में चार चांद दिखने के पीछे क्रिस्टलों का हल्का हिलना था। इससे साधारण दो धब्बों के साथ ऊर्ध्वाकार विस्तार हुआ। कुछ स्रोतों में बताया गया कि क्रिस्टलों की व्यवस्था से चार चमकीले बिंदु बने। चांद पूर्ण या लगभग पूर्ण अवस्था में था जिससे रोशनी तेज थी। साफ ठंडी रात होने से बादल पतले थे और क्रिस्टल अच्छी तरह दिखे।
आवश्यक मौसम स्थितियां बहुत ठंडी हवा जरूरी है। ऊंचे सिरस बादल मौजूद होने चाहिए। षट्कोणीय बर्फ क्रिस्टल लटके रहते हैं। चांद की रोशनी तेज होनी चाहिए। रात साफ और ठंडी होनी चाहिए। तापमान जमाव बिंदु से नीचे हो।
पैरासेलेनी घटना सन डॉग से मिलती-जुलती है। सन डॉग दिन में सूरज के साथ बनते हैं जबकि यह चांद के साथ रात में होता है। दोनों में बर्फ के क्रिस्टल प्रकाश को मोड़ते हैं। सन डॉग ज्यादा आम हैं लेकिन मून डॉग के लिए चांद की रोशनी काफी तेज होनी चाहिए। सेंट पीटर्सबर्ग जैसे ठंडे इलाकों में सर्दियों में यह संभव होता है।
पैरासेलेनी और सन डॉग की तुलना दोनों में बर्फ क्रिस्टल प्रकाश मोड़ते हैं। सन डॉग दिन में सूरज के साथ। मून डॉग रात में चांद के साथ। कोण बाईस डिग्री समान है। मून डॉग के लिए तेज रोशनी जरूरी। सेंट पीटर्सबर्ग में सर्दी अनुकूल है।
घटना कुछ मिनटों तक रही क्योंकि बादल और क्रिस्टल हिलते रहते हैं। दृश्य क्षणिक था और बदलता रहा। लोग इस नजारे को देखकर हैरान थे। कई ने वीडियो और फोटो लिए जो बाद में प्रसारित हुए। दृश्य में असली चांद के साथ बाईं और दाईं तरफ चमकदार गोले थे और ऊपर या नीचे अतिरिक्त प्रभाव दिखा।
दृश्य का विवरण असली चांद केंद्र में चमक रहा था। बाईं तरफ एक चमकीला धब्बा था। दाईं तरफ दूसरा चमकीला धब्बा था। ऊर्ध्वाकार विस्तार से अतिरिक्त बिंदु बने। कुल चार चमकीले गोले दिखे। रात का आसमान साफ था।
वायुमंडल में प्रकाश का अपवर्तन मुख्य कारण है। जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में जाता है तो उसकी गति बदलती है और किरण मुड़ती है। यहां हवा से बर्फ के क्रिस्टल माध्यम हैं। क्रिस्टल के सपाट चेहरों से रोशनी विशिष्ट कोण पर मुड़ती है। षट्कोणीय संरचना बाईस डिग्री कोण बनाती है। इससे चांद के इर्द-गिर्द चमकदार छवियां बनती हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग में फरवरी की शुरुआत में ठंड चरम पर होती है। हवा में नमी जम जाती है। ऊंचाई पर बादल पतले होते हैं जिसमें क्रिस्टल आसानी से बनते हैं। लगभग पूर्ण चांद की रोशनी इन क्रिस्टलों तक पहुंचती है। रोशनी का अपवर्तन और परावर्तन दोनों हो सकता है। कुछ मामलों में परावर्तन से भी प्रभाव बढ़ता है।
प्रकाश का अपवर्तन प्रक्रिया प्रकाश हवा से क्रिस्टल में प्रवेश करता है। गति बदलने से किरण मुड़ती है। षट्कोणीय चेहरा बाईस डिग्री बनाता है। रोशनी बाईं और दाईं तरफ जाती है। चमकीले बिंदु असली चांद के बगल में। हिलते क्रिस्टल से विस्तार होता है।
यह घटना दुर्लभ है क्योंकि सभी स्थितियां एक साथ मिलनी चाहिए। ठंड, साफ रात, सही बादल, तेज चांद रोशनी और क्रिस्टलों का सही अभिविन्यास जरूरी है। साधारण मून डॉग दो होते हैं लेकिन चार दिखना और भी दुर्लभ है। क्रिस्टलों के हल्के हिलने से ऊर्ध्वाकार प्रभाव जुड़ गया। इससे चार चांद जैसे गोले बने।
दुर्लभता के कारण सभी स्थितियां एक साथ मिलनी चाहिए। क्रिस्टल का सही आकार और अभिविन्यास। चांद की तेज रोशनी। पतले सिरस बादल। बहुत कम तापमान। हिलते क्रिस्टल से अतिरिक्त प्रभाव।
घटना के दौरान सेंट पीटर्सबर्ग का मौसम ठंडा था। सर्दियों की रातें लंबी और साफ होती हैं। हवा स्थिर थी जिससे बादल ऊंचाई पर स्थिर रहे। क्रिस्टल ऊंचे वायुमंडल में बने जहां तापमान माइनस कई डिग्री था। चांद की स्थिति भी अनुकूल थी। रोशनी क्रिस्टलों तक बिना बाधा पहुंची।
पैरासेलेनी अक्सर चंद्रमा के चारों ओर हेलो भी बनाती है। हेलो चांद को घेरता है और उसके अंदर मॉक मून दिखते हैं। इस घटना में हेलो के साथ चार स्पॉट बने। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि क्रिस्टल के घूमने से प्रभाव बढ़ा। दृश्य कम समय तक रहा लेकिन प्रभावशाली था। लोग आसमान की ओर देखते रहे।
हेलो और मॉक मून चांद के चारों ओर प्रकाश का घेरा बनता है। घेरे में मॉक मून दिखते हैं। बाईस डिग्री हेलो आम है। इस घटना में चार स्पॉट बने। क्रिस्टल घूमने से प्रभाव। दृश्य क्षणिक लेकिन स्पष्ट था।
यह वायुमंडलीय ऑप्टिकल घटना है न कि कोई खगोलीय। कोई अतिरिक्त चंद्रमा या ग्रह नहीं थे। सब कुछ पृथ्वी के वायुमंडल में हुआ। बर्फ के क्रिस्टल प्रकाश का माध्यम बने। रोशनी का अपवर्तन मुख्य तंत्र था। वैज्ञानिक रूप से इसे पैरासेलेनी कहते हैं। नाम ग्रीक से आया है जहां पैरा का अर्थ बगल से है।
नाम और उत्पत्ति पैरासेलेनी ग्रीक शब्द से बना है। पैरा का मतलब बगल या साथ। सेलेनी चांद से संबंधित। मून डॉग या मॉक मून आम नाम। ऑप्टिकल इल्यूजन है। वायुमंडल में बनता है।
सेंट पीटर्सबर्ग जैसे उत्तरी शहरों में सर्दियों में ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। ठंडी हवा क्रिस्टल बनाती है। साफ आसमान रोशनी पहुंचने देता है। फरवरी एक दो हजार छब्बीस की रात इन स्थितियों ने मेल खाया। घटना रात के समय हुई जब चांद ऊपर था। दृश्य कम ऊंचाई पर बेहतर दिखा।
घटना का अध्ययन वायुमंडलीय विज्ञान से जुड़ा है। अपवर्तन सूत्रों के अनुसार माध्यम के घनत्व से कोण निर्भर करता है। बर्फ क्रिस्टल में प्रकाश की गति कम होती है। इससे मुड़ाव होता है। बाईस डिग्री न्यूनतम विचलन कोण है षट्कोणीय क्रिस्टल के लिए। इससे स्पष्ट धब्बे बनते हैं।
अपवर्तन का गणितीय आधार प्रकाश माध्यम बदलने पर मुड़ता है। बाईस डिग्री न्यूनतम विचलन कोण। षट्कोणीय क्रिस्टल संरचना कारण। रोशनी की किरणें समानांतर रहती हैं। चमकदार बिंदु स्पष्ट दिखते हैं। क्रिस्टल घनत्व प्रभावित करता है।
इस प्रकार सेंट पीटर्सबर्ग में हुई यह घटना वायुमंडलीय ऑप्टिक्स का उदाहरण है। बर्फ के क्रिस्टल ने रोशनी को मोड़कर अनोखा दृश्य बनाया। चार चांद का भ्रम बना लेकिन वास्तव में एक चांद था। घटना ने लोगों को आकर्षित किया और वैज्ञानिक व्याख्या उपलब्ध कराई। ठंडे मौसम और सही बादलों ने यह संभव बनाया।
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