Agra: भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 19 दोषियों को उम्रकैद बरकरार।
बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए 19 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा
आगरा/नई दिल्ली। बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए 19 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी है। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि समाज में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।
इस मामले में वादकारी पक्ष की ओर से आगरा निवासी सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि न्याय व्यवस्था पर समाज के विश्वास को बनाए रखने का भी था।
गौरतलब है कि 11 जुलाई 2003 को भागचंद पहलवान की उस समय निर्मम हत्या कर दी गई थी, जब वे नर्मदा नदी में स्नान कर लौट रहे थे। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 147, 148, 149, 323, 325 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हालांकि, बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने इस फैसले में बदलाव करते हुए सजा को धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पुनः बहाल कर दिया। अदालत ने सभी 19 दोषियों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उन्हें 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने बताया कि यह मामला दो दशक से अधिक पुराना और कई पेचीदगियों से भरा हुआ था। इसके बावजूद न्यायालय का यह फैसला यह दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को अंततः सजा मिलती है।
भागचंद पहलवान अपने समय के विख्यात पहलवान थे, जिन्हें मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘मध्य प्रदेश केसरी’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। यह फैसला न्यायिक व्यवस्था में विश्वास को और सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है।
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