आगरा। अपनी बेबाक लेखनी और मुखर विचारों के लिए पहचान बना चुकीं सुप्रसिद्ध लेखिका भावना वरदान शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनकी चर्चित पुस्तक “आगरा मुगल नहीं, ब्रजभूमि है” ने ताजमहल से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विमर्श को नई दिशा दी थी, जिसके बाद से वह लगातार सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। अब राजनीतिक गलियारों में उनके सक्रिय राजनीति में प्रवेश को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से भावना शर्मा सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय रही हैं, वह संकेत देता है कि वे निकट भविष्य में राजनीति में कदम रख सकती हैं।
भावना वरदान शर्मा वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति में प्रचार प्रमुख के रूप में दायित्व निभा रही हैं और महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सरोकारों तथा राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों पर लगातार सक्रिय हैं। उनके लेख, भाषण और सार्वजनिक गतिविधियां उन्हें एक निर्भीक वक्ता और प्रभावशाली विचारक के रूप में स्थापित करते हैं। बिजनिस मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त कर चुकीं भावना शर्मा आगरा में एक साहित्यिक संस्था का संचालन भी कर रही हैं। इसके माध्यम से वे साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं।
लगातार सक्रियता और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के चलते उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। बिना किसी शॉर्टकट के अपने कार्यों के दम पर स्थापित हुई उनकी छवि अब उन्हें राजनीति के संभावित चेहरे के रूप में भी सामने ला रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भावना वरदान शर्मा आने वाले समय में औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखती हैं या नहीं।